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Karnataka News Today: कर्नाटक के बागलकोट में नम्मा क्लिनिक में तैनात डॉक्टर अंकिता यारागल को बिना ड्यूटी 75000 रुपये सैलरी उठाने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है. कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी अंकिता बिना इस्तीफा दिए प्राइवेट कॉलेज से MD की पढ़ाई कर रही थीं और तीन महीने से क्लिनिक नहीं आई थीं. स्थानीय लोगों के विरोध और THO के निरीक्षण में सच सामने आने पर प्रशासन ने उनकी संविदा रद्द कर दी.
मामले की जांच की जा रही है.
सरकारी नौकरी, 75,000 रुपये महीने की फिक्स्ड सैलरी और वो भी बिना क्लिनिक गए. जी हां, इसे कहते हैं असली नेपो-किड्स वाला प्रिविलेज और अल्टीमेट जुगाड़. कर्नाटक के बागलकोट जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हेल्थ डिपार्टमेंट और पॉलिटिकल गलियारों में तहलका मचा दिया है. बागलकोट से कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी डॉक्टर अंकिता आर यारागल को नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद से बर्खास्त कर दिया गया है. मैडम पिछले तीन महीनों से क्लिनिक का रुख तक नहीं कर रही थीं, लेकिन उनकी हाजिरी पूरी लग रही थी और खाते में सरकारी सैलरी जमा हो रही थी. वजह? वो प्राइवेट कॉलेज में आराम से अपनी MD की पढ़ाई पूरी कर रही थीं. जब लोकल एक्टिविस्ट्स ने इस घोस्ट डॉक्टर की पोल खोली, तो प्रशासन को तुरंत एक्शन मोड में आना पड़ा.
काम जीरो, सैलरी फुल, नम्मा क्लिनिक में बड़ा स्कैम
अप्रैल 2025 में डॉ. अंकिता को बागलकोट के वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक में संविदा (Contractual) मेडिकल ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया था. सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन इस साल मार्च में उन्होंने बिना सरकारी पद से इस्तीफा दिए एक प्राइवेट कॉलेज में MD (पैथोलॉजी) की पढ़ाई शुरू कर दी. स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार, डॉ. अंकिता ने महीनों से क्लिनिक में कदम भी नहीं रखा था. मरीज जब भी आते, उन्हें डॉक्टर गायब मिलतीं. पूरे क्लिनिक का दारोमदार सिर्फ नर्सेज के भरोसे था जबकि मैडम बिना किसी जवाबदेही के 75,000 रुपये महीने का सरकारी वेतन उठा रही थीं.
आउट ऑफ स्टेशन का बहाना और औचक निरीक्षण
हाल ही में जब बागलकोट तालुक स्वास्थ्य अधिकारी (THO) डॉ. सरस्वती मागी ने नम्मा क्लिनिक का औचक निरीक्षण किया तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था. ऑन-ड्यूटी डॉक्टर क्लिनिक से गायब थीं. जब डॉ. मागी ने फोन पर उनसे संपर्क किया तो डॉ. अंकिता ने बेहद ढिठाई से कहा कि वो शहर से बाहर हैं. हालांकि, वहां मौजूद मरीजों ने साफ-साफ शिकायत की कि मैडम पिछले तीन महीनों से क्लिनिक आई ही नहीं हैं. इसके बावजूद रजिस्टर में उनकी अटेंडेंस पूरी तरह से दर्ज की जा रही थी. यानी टैक्सपेयर्स के पैसों की सरेआम लूट हो रही थी और गरीब मरीजों को इलाज तक नसीब नहीं हो रहा था.
फैमिली पावर का फायदा और कानूनी ऐक्शन
लोकल एक्टिविस्ट राजू नाइक ने आरोप लगाया कि डॉ. अंकिता के पिता डॉ. राजकुमार यारागल खुद जिले के स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) हैं. अपने पद और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके उन्होंने अपनी बेटी की नियुक्ति और इस फर्जीवाड़े को संरक्षण दिया. मामला उजागर होते ही बागलकोट जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गजानन बाले ने सख्त रुख अपनाते हुए डॉ. अंकिता की सेवाएं तुरंत समाप्त करने का आदेश दिया. हालांकि, बचाव में डॉ. अंकिता के पिता ने कहा कि नियुक्ति उनके कार्यकाल से पहले हुई थी और उन्होंने प्रभार संभालने के बाद अपनी बेटी का वेतन जारी नहीं किया है. फिर भी, विधायक उमेश मेटी और आरोपी डॉक्टर ने इस पूरे विवाद पर चुप्पी साध रखी है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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