दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलनों में शामिल छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर में 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों को लेकर छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है.
हालांकि, इस राहत के साथ ही मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है. केंद्र सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की इजाजत दे दी, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि उनके गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड हैं और वे जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में मौजूद थे.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों को ध्यान में रखते हुए अपने आदेश का दायरा तय किया. अदालत ने साफ किया कि छात्रों के खिलाफ पहले दर्ज आपराधिक मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, लेकिन गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की भूमिका की अलग से जांच की जा सकती है.
दिल्ली पुलिस को नई FIR की इजाजत
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर पहले दर्ज 13 एफआईआर को खत्म करने और 2,873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी. पुलिस का कहना था कि इन लोगों के नाम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के रिकॉर्ड में गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े हैं और प्रदर्शन के दौरान उनकी मौजूदगी की शुरुआती जानकारी मिली है.
पुलिस के मुताबिक, नई एफआईआरएफआईआर का मकसद यह पता लगाना होगा कि इन लोगों में से किसी की प्रदर्शन के दौरान हिंसा, लोगों को चोट पहुंचाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में कोई भूमिका थी या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने इसी सीमित दायरे में दिल्ली पुलिस को नई एफआईआर दर्ज कर जांच करने की अनुमति दी है.
SC के आदेश पर सीजेपी भी खुश
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया है. दीपके ने इस फैसले को ‘पूर्ण न्याय’ बताते हुए कोर्ट का शुक्रिया अदा किया और कहा कि जंतर-मंतर पर संघर्ष करने वालों और NEET पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय मिला है.
वहीं सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुशी जताई है. दास कहा कि पार्टी शुरू से ही यह चाहती थी कि अगर प्रदर्शन में कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाला व्यक्ति शामिल था और उसने अपराध किया है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए.
सौरव दास ने साथ ही उठाए कुछ सवाल
दास ने कहा कि पुलिस ने चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के आधार पर करीब 2,800 ऐसे लोगों की मौजूदगी का दावा किया था, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर बताया गया. उनका सवाल था कि अगर ये लोग वास्तव में इतने गंभीर अपराधों में शामिल थे, तो वे समाज में खुलेआम कैसे घूम रहे थे.
उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रदर्शन के दौरान किसी ने हत्या, दुष्कर्म या कोई अन्य गंभीर अपराध किया है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोष साबित होने पर उसे सजा मिलनी चाहिए. उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मुद्दे को लेकर स्थिति अब स्पष्ट हो गई है.
अनुच्छेद 142 के तहत छात्रों को राहत
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए छात्रों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त किया है. अदालत ने युवाओं के भविष्य और उनकी आगे की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी.
हालांकि, अदालत की ओर से दी गई राहत का मतलब यह नहीं है कि प्रदर्शन से जुड़े हर व्यक्ति को जांच से पूरी तरह छूट मिल गई है. 2,873 लोगों के मामले में अब दिल्ली पुलिस अलग से जांच करेगी और यह तय किया जाएगा कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के पर्याप्त सबूत हैं या नहीं.

