क्यों है निजी सेक्टर की जरूरत
यह समिट ऐसे समय हुआ है जबकि चीन ने DeepSeek के जरिए दुनिया को अपनी ताकत दिखाई है। इससे चीन के शेयर मार्केट में काफी तेजी आई है और उसके टेक सेक्टर को लेकर निवेशकों की रुचि बढ़ी है। शी सेमीकंडक्टर में चीन को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं और देश के विकास में एआई के यूज को बढ़ावा देना चाहते हैं। लेकिन अमेरिका ने चीन को चिप्स की सप्लाई पर पाबंदी लगा दी है। उसे डर है कि चीन इसका इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए कर सकता है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका के साथ टेक सेक्टर में टक्कर के लिए चीन को निजी सेक्टर की जरूरत है।
यही वजह है कि शी निजी कंपनियों पर डोरे डाल रहे हैं। जैक मा किसी जमाने में एशिया के सबसे बड़े रईस थे। लेकिन चीन की सरकार के टेक कंपनियों पर सख्ती के कारण उनकी नेटवर्थ में काफी गिरावट आई है। हालांकि हाल के दिनों में अलीबाबा के शेयरों में तेजी आई है और पिछले पांच हफ्तों में इसका मार्केट कैप 100 अरब डॉलर बढ़ गया है। हॉन्ग कॉन्ग में भी टेक शेयरों में हाल में काफी तेजी आई है। हेंग सेंग टेक इंडेक्स भी सोमवार को शुरुआती ट्रेड में तीन साल के टॉप पर पहुंच गया था।
चीन की दिक्कत
शी ने इससे पहले 2018 में निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग की थी। तब उन्होंने टैक्स कम करने और निजी कंपनियों को बराबर का मौका देने की बात कही थी। लेकिन हाल के वर्षों में उनकी सरकार ने निजी कंपनियों खासकर टेक सेक्टर की कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की। चीन की इकॉनमी इस समय कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। देश में बेरोजगारी चरम पर है, लोग पैसा खर्च करने के बजाय बचत कर रहे हैं और रियल एस्टेट सेक्टर गहरे संकट में है। साथ ही अमेरिका के साथ तनाव भी बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि शी इकॉनमी को बूस्ट करने के लिए प्राइवेट कंपनियों पर डोरे डाल रहे हैं।

