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CBSE Three Language Policy Exemptions: सीबीएसई ने सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी लागू कर दी है. इसमें 2 भारतीय भाषाएं जरूरी होंगी. हालांकि, दिव्यांग, विदेशी और माइग्रेट होने वाले स्टूडेंट्स को इसमें विशेष छूट दी गई है. जानिए बोर्ड के नए सर्कुलर के अनुसार किसे और कैसे छूट मिलेगी.
CBSE Three Language Policy 2026: सीबीएसई ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी में कुछ खास स्टूडेंट्स को छूट दी है (फोटो सोर्स- Unsplash)
नई दिल्ली (CBSE Three Language Policy Exemptions). सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्कूलों के लिए तीन-भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है. बोर्ड की तरफ से जारी नए सर्कुलर के मुताबिक, इस नीति का असल मकसद स्टूडेंट्स पर पढ़ाई का बोझ बढ़ाना बिल्कुल नहीं है, बल्कि उन्हें भारतीय भाषाओं से जोड़ना और भाषाई समझ को मजबूत करना है. इस नए नियम के आने के बाद से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स के मन में कई तरह के सवाल हैं.
CBSE की नई भाषा नीति: क्या है नियम और कब से होगा लागू?
सीबीएसई की नई गाइडलाइंस के अनुसार, थ्री लैंग्वेज पॉलिसी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी. राहत की बात यह है कि साल 2026-27 में कक्षा 10 के स्टूडेंट्स पर कोई बदलाव नहीं होगा, वे पहले की तरह सिर्फ 2 भाषाएं ही पढ़ेंगे. बदलाव कक्षा 9 के स्टूडेंट्स के लिए है, जिन्हें अब तीन भाषाएं (R1, R2 और R3) पढ़नी होंगी. शर्त बस इतनी है कि इन तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए.
बोर्ड एग्जाम में नहीं होगा पेपर
नई पॉलिसी से स्टूडेंट्स को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. तीसरी भाषा (R3) की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. स्कूल अपने स्तर पर ही इसका टेस्ट लेगा. अगर कोई स्टूडेंट कक्षा 9 में इस तीसरी भाषा में पास नहीं भी हो पाता तो भी उसे कक्षा 10 में प्रमोट कर दिया जाएगा. हालांकि, 10वीं का पासिंग सर्टिफिकेट लेने के लिए स्टूडेंट को स्कूल स्तर की यह परीक्षा जरूर पास करनी होगी.
इन स्टूडेंट्स को मिली छूट
सीबीएसई ने साफ किया है कि कुछ परिस्थितियों में स्टूडेंट्स पर यह नियम लागू नहीं होगा:
- दिव्यांग छात्र (CwSN): RPwD Act, 2016 के तहत आने वाले दिव्यांग स्टूडेंट्स को तीसरी भाषा पढ़ने की अनिवार्यता से छूट दी गई है.
- विदेशों में स्थित CBSE स्कूल: भारत के बाहर चल रहे सीबीएसई स्कूलों के स्टूडेंट्स के लिए तीसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषा पढ़ना जरूरी नहीं होगा.
- विदेश से लौटने वाले स्टूडेंट्स: जो विदेशी स्टूडेंट्स विदेश से भारत लौट रहे हैं, उन्हें भी तीसरी भाषा के तौर पर भारतीय भाषा पढ़ने से राहत दी गई है.
- माता-पिता का ट्रांसफर: अगर माता-पिता के दूसरे राज्य में ट्रांसफर के कारण स्टूडेंट का स्कूल बदलता है तो वह मिडिल क्लास (6वीं से 8वीं) में चुनी गई अपनी पुरानी तीसरी भाषा को ही 9वीं में जारी रख सकता है. इसके लिए स्कूलों को अलग से व्यवस्था करनी होगी.
शिक्षकों की कमी के लिए स्कूलों को निर्देश
ज्यादातर स्कूलों में नई भाषा के शिक्षकों की कमी हो जाती है. इसके लिए सीबीएसई ने फ्लेक्सिबल रुख अपनाया है. स्कूल अब मौजूदा शिक्षकों के अलावा रिटायर्ड टीचर्स, पोस्टग्रेजुएट टीचर्स या साहोदय क्लस्टर (आस-पास के स्कूलों के साथ शिक्षक साझा करना) की मदद ले सकते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन और हाइब्रिड मोड में भी भाषा की पढ़ाई कराई जा सकती है. बोर्ड खुद स्कूलों को स्टडी मटीरियल और ट्रेनिंग देगा, जिससे किसी भी स्टूडेंट का नुकसान न हो.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

