Last Updated:
MGNREGA Budget : मनरेगा में सरकार अगले वित्तवर्ष में बजट का आवंटन और बढ़ाने वाली है. योजना के जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अगले साल करीब 90 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया जा सकता है.
मनरेगा में कामगारों को 100 दिन की गारंटी वाला रोजगार मिलता है. नई दिल्ली. कामगारों और मजदूरों को अगले साल जमकर कमाई होने का अनुमान है. माना जा रहा है कि सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत अगले वित्तवर्ष के बजट में ज्यादा पैसे देने पर विचार कर रही है. सरकार का कहना है कि इस बार मानसून औसत से बेहतर रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में डिमांड बढ़ने का अनुमान है. इस साल जुलाई के बाद से मनरेगा का कामकाज काफी धीमा रहा है, लेकिन अगले साल सरकारी योजनाओं का कामकाज बढ़ने की वजह से इसमें उछाल आने की पूरी संभावना है.
किस काम के लिए ज्यादा जरूरत
अधिकारियों के अनुसार, मनरेगा में अब तक हुए कार्यों की समीक्षा के बाद आकलन किया गया है कि इस बार मकानों निर्माण के लिए कामगारों की ज्यादा जरूरत होगी. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरों और गांवों में मकान बनाए जा रहे हैं, जिसमें कामगारों की बड़ी संख्या में जरूरत पड़ेगी. इसके अलावा जल संरक्षण और सिंचाई योजनाओं के लिए भी बड़ी संख्या में कामगारों की जरूरत होगी. इस काम के लिए गारंटी वाली रोजगार योजना के तहत भी ज्यादा कामगारों की जरूरत होगी.
योजना में कितने रोजगार की गारंटी
मनरेगा के तहत सरकार हर साल 100 दिन का गारंटी वाला रोजगार मुहैया कराती है. योजना में पिछले वित्तवर्ष यानी 2024-25 के लिए 85,640 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था. चालू वित्तवर्ष में योजना का कामकाज सुस्त चल रहा है. अक्टूबर 2022 में जहां 1.7 करोड़ लोगों को रोजगार दिया गया था, वहीं इस साल अक्टूबर में सिर्फ 89 लाख कामगारों की ही जरूरत पड़ी. इससे पहले सितंबर में 1.17 करोड़, अगस्त में 1.19 करोड़ कामकारों की जरूरत पड़ी थी. पिछले साल इसी समय 1.6 करोड़ और 1.61 करोड़ कामगारों की जरूरत पड़ी थी. इस साल जुलाई में भी 1.66 करोड़ कामकारों की जरूरत पड़ी, जो पिछले साल इसी महीने 1.89 करोड़ थी.
अच्छे मानसून ने घटाई जरूरत
मद्रास स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के निदेशक एनआर भानुमूर्ति ने बताया कि इस साल मानसून काफी बेहतर रहा है, जो इस बात का साफ संकेत है कि मनरेगा के तहत कामकाज की जरूरत कम रही. उन्होंने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था अच्छी होती है तो मनरेगा में काम करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि देश का जॉब मार्केट भी अच्छा प्रदर्शन करता है. जैसे इस साल जून से सितंबर तक मानसून के दौरान 8 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और ज्यादातर राज्यों की अर्थव्यवस्था ने भी अच्छा प्रदर्शन किया.
करोड़ों की मजदूरी भी बकाया
सरकार को वित्तवर्ष 2027 के लिए ज्यादा पैसों का आवंटन करना पड़ेगा, क्योंकि योजनाओं के विस्तार से खर्चा तो बढ़ा ही है, साथ ही पुरानी बकाया मजदूरी का भी भुगतान करना है. 15 फरवरी, 2025 तक के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि मजदूरी के रूप में ही 12,219 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि औजारों का बकाया भुगतान 11,227 करोड़ रुपये है. यह मौजूदा आवंटन का करीब 27.26 फीसदी हिस्सा है. इसकी वजह से चालू वित्तवर्ष का मौजूदा वर्किंग बजट 62,553.73 करोड़ रुपये है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

