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G7 Nations GDP : भारत की अगुवाई में चल रही ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जी-7 देशों के समूह पर सीधा निशाना साधा. पुतिन अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों के इस समूह को आईना दिखाते कहा कि पता नहीं ये खुद को जी-7 देश क्यों कहते हैं, जबकि इनका ग्लोबल जीडीपी में योगदान ब्रिक्स देशों का आधा भी नहीं है. पुतिन के इस बयान के आखिर क्या मायने हैं और जी-7 में शामिल देशों की असल में कितनी हैसियत है.
भारत के पुराने दोस्त रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स के मंच से पश्चिमी देशों पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भला ये लोग खुद को जी-7 क्यों कहते हैं, जबकि उनका ग्लोबल जीडीपी में योजना महज 18 फीसदी है. इसके मुकाबले ब्रिक्स देशों का ग्लोबल जीडीपी में योगदान 40 फीसदी से ज्यादा है. जी-7 समूह में एक देश को छोड़कर सभी पश्चिमी देश हैं और इसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं. इसमें सिर्फ जापान ही एशिया का है, बाकी सभी पश्चिमी देश हैं.
अमेरिका : जी-7 समूह का बॉस अमेरिका ही है, क्योंकि उसकी इकनॉमी न सिर्फ इस समूह में बल्कि दुनिया में सबसे ज्यादा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने साल 2026 में अपने आंकड़ों में बताया था कि अमेरिका की जीडीपी का आकार अभी करीब 32.38 ट्रिलियन डॉलर है और कुल ग्लोबल जीडीपी में उसका योगदान 25 फीसदी के आसपास है. हालांकि, उस पर जीडीपी से भी करीब 8 ट्रिलियन डॉलर ज्यादा कर्ज भी है, जो करीब 40 ट्रिलियन डॉलर होता है.
ब्रिटेन : जी-7 समूह में शामिल ब्रिटेन अभी दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसका आकार साल 2026 में करीब 4.26 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. ब्रिटेन का ग्लोबल जीडीपी में योगदान करीब 2 फीसदी का है, जबकि उस पर 3 ट्रिलियन पाउंड का कर्ज लदा हुआ है. यह ब्रिटेन की कुल जीडीपी का करीब 95 फीसदी है. इसका मतलब है कि जी-7 के दोनों टॉप देश भारी कर्ज में डूबे हुए हैं.
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फ्रांस : जी-7 समूह में शामिल फ्रांस की जीडीपी अभी करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर है और उसका ग्लोबल जीडीपी में योगदान 2 फीसदी के आसपास पड़ता है. यहां तक तो ठीक है लेकिन इस देश पर भी उसकी जीडीपी से ज्यादा कर्ज लदा हुआ है. फ्रांस पर अभी करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज लदा हुआ है. यह फ्रांस की जीडीपी का करीब 117 फीसदी है. साल 1949 से 2026 तक फ्रांस की जीडीपी की औसत ग्रोथ 0.75 फीसदी रही है. ग्लोबल जीडीपी में इसका योगदान 2 फीसदी से भी कम है.
जर्मनी : आईएमएफ के अनुसार, जर्मनी अभी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकनॉमी है और उसकी जीडीपी का आकार 5.45 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है. ग्लोबल जीडीपी में इसका योगदान 4.3 फीसदी के आसपास है. हालांकि, पर्चेजिंग पॉवर के रूप में देखें तो इसका योगदान 3 फीसदी से भी कम है. इस देश पर भी 3.52 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज लदा हुआ है. यह जर्मनी की जीडीपी का करीब 65 फीसदी बैठता है.
इटली : यूरोपीय देश इटली की इकनॉमी अभी करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर की है और इसके मुकाबले 138 फीसदी का कर्ज लदा हुआ है. यह दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी इकनॉमी है और यहां प्रति व्यक्ति आय 45 हजार डॉलर सालाना से ज्यादा है. ग्लोबल जीडीपी में इसका योगदान करीब 1.8 फीसदी है और इटली पर करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज लदा हुआ है. इटली की विकास दर आज करीब 1 फीसदी से भी कम है, जो इसके भारी कर्ज का परिणाम है.
जापान : जी-7 समूह में शामिल एकमात्र एशियाई देश जापान दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. आईएमएफ के अनुसार, अभी इस देश की इकनॉमी का आकार करीब 4.38 ट्रिलियन डॉलर है. ग्लोबल इकनॉमी में इस देश का योगदान करीब 4 फीसदी है. जापान की सबसे बड़ी समस्या उसका कर्ज है, जो उसकी जीडीपी से 208 फीसदी ज्यादा है. जापान पर करीब 8.95 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है. हालांकि, इतना कर्ज होने के बावजूद जापान पर ज्यादा जोखिम नहीं है. इसकी वजह ये है कि जापान का ज्यादातर कर्ज घरेलू बाजार में है न कि विदेशी कर्ज.
कनाडा : दुनिया की नौवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश कनाडा की जीडीपी अभी करीब 2.6 ट्रिलियन डॉलर है. ग्लोबल जीडीपी में इसका योगदान करीब 1.2 फीसदी है. कनाडा पर कुल कर्ज करीब 2.4 कनाडाई ट्रिलियन डॉलर है, जो उसकी जीडीपी का करीब 40 फीसदी बैठता है. कनाडा की विकास दर अभी करीब 3.3 फीसदी के आसपास है.

