महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर हो रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) भी अब इसमें कूद गया है. वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज नायर ने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले लोग किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से रह रहे हैं. राज नायर ने कहा, ‘सभी भारतीय भाषाएं हमारी मातृभाषाएं हैं और हर भाषा का सम्मान होना चाहिए. महाराष्ट्र में मराठी राज्यभाषा है, इसलिए यहां उसका सम्मान आवश्यक है और सभी को इसे सीखने का प्रयास करना चाहिए. राजनीतिक बयानबाजी और तू-तू मैं-मैं देश के लिए सही नहीं है. महाराष्ट्र में रहने वाले लोग किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और टैक्स भरकर जी रहे हैं. ऐसे में किसी को भी अहसान जताने का अधिकार नहीं है.’
‘संविधान से चलता है देश’
वीएचपी प्रवक्ता राज नायर ने कहा कि भारत एक महान संविधान के तहत चलता है, जिसे बाबा साहेब अंबेडकर ने हमें दिया है. इस संविधान में सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार सुरक्षित हैं, चाहे वे किसी भी धर्म या वर्ग से हों. जो लोग स्वयं को अल्पसंख्यक कहते हैं, उनके भी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं. कोई उन पर कोई एहसान नहीं कर रहा. यदि वे इस देश, इसकी मिट्टी और विरासत से प्रेम करें और इसे अपना देश मानें, तो सभी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी. पूर्वजों को पहचानना और साझा इतिहास को स्वीकारना ही समाधान है.’ उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में अल्पसंख्यकों की स्थिति देखें तो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदुओं की हालत बेहद खराब है. भारत में अल्पसंख्यकों को जितने अधिकार मिले हैं, उतने किसी देश में नहीं. वास्तव में मुसलमानों को अल्पसंख्यक कहना भी ठीक नहीं, क्योंकि वे भी इसी देश की मिट्टी से जुड़े हैं. यहूदियों और पारसियों को सही मायनों में अल्पसंख्यक कहा जा सकता है. भारत में मुसलमान और ईसाई सबसे सुरक्षित हैं, यह तथ्य है, न कि बहस का विषय.’
Aaj Ki Badi Khabren LIVE: वाहनों पर क्या बोले दिल्ली के मंत्री
आज की बड़ी खबरें लाइव: दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पुराने वाहनों को हटाने के नियमों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने कहा कि किसी वाहन को कब सड़कों से हटाना है, इसका आधार उसकी उम्र नहीं, बल्कि उसका प्रदूषण स्तर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि चाहे दोपहिया हो या तिपहिया, उन्हें सड़क से हटाने का फैसला उनकी असली प्रदूषण क्षमता पर आधारित होना चाहिए, न कि सिर्फ उनकी उम्र पर. उन्होंने कहा कि एक ही श्रेणी के वाहनों में भी प्रदूषण स्तर में भारी अंतर हो सकता है. कुछ दोपहिया वाहन केवल 5 साल में ही अधिक प्रदूषण फैलाने लगते हैं, जबकि कुछ चारपहिया वाहन 10 साल बाद भी साफ-सुथरे रह सकते हैं, खासकर यदि उनका उपयोग सीमित रहा हो. ऐसे में सभी वाहनों पर एक जैसी उम्र सीमा थोपना उचित नहीं है.

