पटना. बिहार में का बा… केकरा , जात-पात, लाठी-डंडा और बबुआ जैसे शब्दों के सुनने के आप आदि हैं तो बहुत जल्द ही आपका समय आने वाला है. चुनावी मौसम में बिहारी नेताओं के मुंह से इस तरह के शब्द खूब सुनाई देंगे. बिहारी नेताओं में सबसे ज्यादा बिहारी शब्दों का इस्तेमाल सीएम नीतीश कुमार, लालू यादव और दिवंगत रामविलास पासवान खूब किया करते थे. लालू यादव की तो ठेठ बिहारी शब्दों का इस्तेमाल तो देश जानता है. हालांकि, बहुत कम ही उम्मीद है कि वह चुनाव प्रचार में इस बार भी शामिल होंगे. एलजेपी सुप्रीमो रामविलास पासवान भी खूब ‘जे है कि’ शब्दों का प्रयोग करते थे. वहीं, नीतीश कुमार ‘केकरा के’ का खूब प्रयोग करते हैं. ऐसे में आज जानते हैं कि बिहार में ऐसी 10 बोली, जो देशभर में कहीं नहीं बोली जाती है.
साल 2020 के बिहार चुनाव में नेहा सिंह राठौड़ के ‘बिहार में का बा’ ने काफी धूम मचाई थी. हर कोई बिहार में का बा-का बा कर रहा था. उत्तर से दक्षिण बिहार और पूरब से पश्चिम बिहार में मगही, मैथिली, अंगिका और भोजपुरी के साथ बिहारी लोकल लैंग्वेज खूब बोले जाते हैं. साल 2020 के बिहार चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर सभा में भाषण की शुरुआत वहां की स्थानीय भाषा से ही होती थी. जैसे, उन्होंने बेगूसराय में अपनी भाषण की शुरुआत करते हुए कहा, ‘की हाल चाल सब ठीक न’ इसी तरह मिथिला, अंगिका और मगही में भी पीएम मोदी ने अलग-अलग सभाओं में संवाद किया. ऐसे में आज आपको बताने जा रहे हैं कि बिहार की वह 10 ठेठ बोली जो सिर्फ बिहार और बिहारी ही बोलते हैं.
1- बिहार में लालू-नीतीश जैसे नेता विकास को विकसवा, रोजगार को रोजगरवा, परिवर्तन को परिवर्तनवा, पानी को पनिया, सड़क को सड़कवा, बिजली को बिजलिया, खैनी को खैनिया, कुर्ता को कुर्तावा , धोती को धोतिया और लड़का को लैयका बोलते हैं.
2- भोजपुरी शब्दों में ‘बा ‘ का खूब इस्तेमाल होता है. सिवान, सारण, छपरा, हाजीपुर, आरा, बक्सर एरिया में हर चीज में हम लोग के लिए ‘हमनी ‘का इस्तेमाल होता है.
3- नेता बोलचाल में किसको वोट दोगे शब्द की जगह बोलते हैं कि ‘केकरा क वोट देबहो..या केकरा का साथ देबो’
4- जाति की बात पर बोलते हैं कि हम जात-पात ‘नैई’ मानते हैं… लेकिन, घूर जातिवादी होते हैं. सिर्फ दिखाने के लिए.
5- दबंगई या ताकत दिखाने के लिए बोलते हैं कि ‘हम भी लाठी डंडा से जवाब दैबे’…भइया हम तो तोहार साथ बानी जैसे शब्द खूब बोले जाते हैं.
6- नेता पलायन को बोलते हैं हम पलायनबा कम कर देंगे..पलायन रोकी की न रोकी. रोटी बेटी की क्रिया ई बार विकासवा की गंगा बहेगा.
7- भ्रष्टाचार के संबंध में चारा घोटाला का इस बार भी खूब जिक्र आएगा.
8- बबुआ और सुशासन बाबू जैसे शब्दों का भी खूब इस बार भी बहार आएगा.
9- माई-बाप को संबोधन में नेता कहते हैं तोहनी हमार माई-बाप बा.
10- राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में चदरबा, टेबुलवा दरिया औऱ लाउडस्पीकरवा जैसे शब्दों को खूब प्रयोग होता है.

