बिहार को चाहिए 2.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी
बिहार को कुल 2.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी चाहिए थी। अभी तक 2.24 लाख मीट्रिक टन डीएपी आ चुकी है। मतलब सिर्फ 21 हजार मीट्रिक टन की कमी है। दिसंबर में राज्य को 70 हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत थी। केन्द्र ने इससे भी अधिक 73 हजार मीट्रिक टन डीएपी भेज दी है। इससे साफ है कि सरकार किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर है।
डीएपी को लेकर विधानसभा में भी हुआ था हंगामा
कुछ दिनों पहले विधानसभा में भी डीएपी की कमी को लेकर हंगामा हुआ था। कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने कहा था कि डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने किसानों को डीएपी मिलने का भरोसा दिलाया था। नवंबर के तीसरे हफ्ते में बिहार को 1.75 लाख मीट्रिक टन डीएपी चाहिए थी। उस समय सिर्फ 1.35 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध थी। यानी मांग के हिसाब से सिर्फ 77 प्रतिश डीएपी ही मौजूद थी। नवंबर के आखिर तक केंद्र ने 15 हजार मीट्रिक टन डीएपी और भेजी थी।
क्या होता है डीएपी
डीएपी यानी डाई अमोनियम फॉस्फेट एक तरह की खाद होती है। यह गेहूं जैसी फसलों के लिए बहुत जरूरी होती है। इसमें फॉस्फोरस और नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो पौधों की अच्छी बढ़त के लिए जरूरी हैं। डीएपी की कमी से पौधों की बढ़वार रुक जाती है और पैदावार कम हो जाती है। इसलिए समय पर डीएपी मिलना किसानों के लिए बहुत जरूरी है। अब जबकि डीएपी की आपूर्ति बढ़ गई है, किसान निश्चिंत होकर अपनी फसल की बुआई कर सकते हैं।

