नई दिल्ली (Bhuvnesh Kumar Story). असफलताएं इंसान को तोड़ सकती हैं. लेकिन हौसला बुलंद हो तो वही कामयाबी की सबसे बड़ी सीढ़ी बन जाती हैं. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के छोटे से गांव जटपुरा के भुवनेश कुमार ने इसे सच साबित कर दिखाया है. महज 21 साल की उम्र में एसएससी सीजीएल जैसी कठिन परीक्षा को क्रैक करना आम बात नहीं है. उन्होंने केंद्रीय सचिवालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) बनकर साबित कर दिया कि इरादे पक्के हों तो रिसोर्सेस की कमी कभी रुकावट नहीं बनती.
तानों ने बदली जिंदगी, ठानी सरकारी नौकरी की जिद
करीब 18 साल की उम्र में भुवनेश कुमार कई सरकारी परीक्षाओं में असफल हुए थे. गांव के एक शख्स ने उन्हें ताना मारा था कि ‘दिल्ली जाए बिना SSC CGL निकाल पाना मुमकिन नहीं है.’ यह ताना उनके दिल पर तीर की तरह चुभ गया. उन्होंने इसे अपनी ईगो पर लिया और चुनौती स्वीकार की. उन्होंने ठान लिया कि वे बिना दिल्ली गए, अपने गांव से ही रहकर इस परीक्षा को पास करके दिखाएंगे. आखिरकार उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर ताने देने वाले हर शख्स को करारा जवाब दे दिया है.
पिता के एक्सीडेंट ने खत्म किया बचपन
भुवनेश कुमार की जिंदगी में असली संघर्ष मात्र 13 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था. तब वह 9वीं में पढ़ते थे. उनके किसान पिता का भयानक एक्सीडेंट हो गया. उससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आ गई और वे बिस्तर पर आ गए. पिता ने खुद 45 साल की उम्र तक सरकारी नौकरी की तैयारी की थी लेकिन सफल नहीं हो पाए थे. परिवार की आर्थिक हालत बिल्कुल चरमरा गई थी. घर का खर्च चलाने और कॉपी-किताबों का इंतजाम करने के लिए छोटे से भुवनेश ने बच्चों को 25-25 रुपये फीस में ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया.
चपरासी (MTS) परीक्षा में फेल होने का सबसे बड़ा झटका
सफलता की राह में असफलताएं उनका पीछा नहीं छोड़ रही थीं. एसएससी सीजीएल 2022 से सीएचएसएल, डीडीए और ईपीएफओ जैसी कई परीक्षाओं में वे कभी टाइपिंग में, कभी कंप्यूटर टेस्ट में तो कभी मामूली अंकों से बाहर हो जाते थे. सबसे गहरा सदमा चपरासी स्तर की एसएससी एमटीएस परीक्षा में फेल होने पर लगा. उस रात वे बहुत टूटे और अपनी मां के पास जाकर रोए कि क्या वे चपरासी बनने के भी लायक नहीं हैं? तब उनकी मां ने उन्हें संभाला और कहा कि बेटा, तुम्हारी किस्मत में इससे भी बहुत बेहतर लिखा है.
उसी रात आया CGL का रिजल्ट और बदल गई किस्मत
मां के हौसले भरे शब्दों का जादू ऐसा चला कि उसी रात चमत्कार हो गया. एसएससी एमटीएस के रिजल्ट के ठीक 3 घंटे बाद, रात के ठीक 12 बजे SSC CGL 2024 का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ. जब उन्होंने कांपते हाथों से पीडीएफ में अपना रोल नंबर सर्च किया तो उनके नाम के आगे ‘ASO in CSS’ (लेवल-7 गजेटेड ऑफिसर) लिखा हुआ था. महज 21 साल की उम्र में उनकी मेहनत रंग लाई और आज वे हर महीने 81,000 रुपये से ज्यादा की सैलरी पा रहे हैं.
असफलता से तय किया सफलता तक का संघर्ष
भुवनेश कुमार की कहानी देश के करोड़ों युवाओं के लिए मिसाल है. यह सिखाती है कि असफलता कभी अंत नहीं होती. घर के माहौल और पिता के दर्द से पढ़ाई डिस्टर्ब न हो, इसके लिए उन्होंने गांव से 10 किमी दूर लाइब्रेरी जाने का फैसला किया. बस के सफर के दौरान भी वे फोन और पर्चों से Vocabulary याद करते थे. अगर आप भी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो छोटी-छोटी असफलताओं से घबराएं नहीं. अपनी कमजोरियों पर काम करें और सेल्फ-स्टडी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं.

