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oi-Sumit Jha
Bangladesh former minister Ramesh Chandra Sen Demise: बांग्लादेश की जेल में बंद पूर्व मंत्री और अवामी लीग के दिग्गज हिंदू नेता रमेश चंद्र सेन का निधन हो गया है। 86 वर्षीय सेन शेख हसीना सरकार में जल संसाधन मंत्री रह चुके थे और पांच बार सांसद चुने गए थे। उनकी मौत के बाद बांग्लादेश की जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों की सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘हिरासत में हत्या’ करार दे रहे हैं, क्योंकि हसीना सरकार गिरने के बाद से अब तक पांच बड़े अवामी लीग नेताओं की जेल में मौत हो चुकी है।

Hindu leader Ramesh Chandra Sen: कैसे हुई मौत और क्या हैं आरोप?
जेल प्रशासन के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 9 बजे रमेश चंद्र सेन की तबीयत अचानक बिगड़ी और वे बेहोश हो गए। उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि, उनके समर्थकों का आरोप है कि 86 साल की उम्र और कई बीमारियों के बावजूद जेल में उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल नहीं दी जा रही थी। सोशल मीडिया पर उनकी मौत को सुनियोजित नरसंहार का हिस्सा बताया जा रहा है।
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रस्सियों से बंधे हाथ: वो वायरल तस्वीर
शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अगस्त 2024 में जब अवामी लीग के नेता देश छोड़कर भाग रहे थे, तब रमेश चंद्र सेन ने अपने घर पर ही रहना चुना। उन्हें भरोसा था कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। लेकिन गिरफ्तारी के बाद उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें उनके हाथ रस्सियों से बेरहमी से बंधे थे। इस तस्वीर ने मानवाधिकारों के हनन और बुजुर्ग नेताओं के साथ हो रहे बर्ताव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी थी।
कौन थे रमेश चंद्र सेन?
रमेश चंद्र सेन बांग्लादेश के सबसे कद्दावर हिंदू नेताओं में से एक थे। 30 अप्रैल 1940 को जन्मे सेन ने ठाकुरगांव-1 सीट से 5 बार सांसद बनकर अपनी लोकप्रियता साबित की थी। वे 2009 से 2014 तक देश के जल संसाधन मंत्री रहे। उन्हें एक जमीनी नेता माना जाता था जिन्होंने अपने क्षेत्र के विकास और अल्पसंख्यकों की आवाज बुलंद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी मौत को बांग्लादेशी राजनीति में एक बड़े युग का अंत माना जा रहा है।
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जेल में सुरक्षा पर उठते सवाल
रमेश चंद्र सेन की मौत के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव बढ़ गया है। आलोचकों का कहना है कि जेल में अवामी लीग के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अगस्त 2024 के बाद से यह पांचवीं घटना है जब किसी शीर्ष नेता ने हिरासत में दम तोड़ा है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि राजनीतिक प्रतिशोध के कारण बुजुर्ग कैदियों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
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