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Australia PR Process for Indians: ऑस्ट्रेलिया की परमानेंट रेजीडेंसी (PR) क्या है और इसे मिलने में कितने साल लगते हैं? जानिए 189, 190 और 491 वीजा के बदलते नियम, ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों की रिकॉर्ड आबादी और पीआर हासिल करने का पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस.
Australia PR Process: ऑस्ट्रेलिया में पीआर के लिए हेल्थकेयर वालों को प्राथमिकता दी जाती है
नई दिल्ली (Australia PR Process for Indians). विदेश में बसने और शानदार करियर बनाने की चाहत रखने वाले भारतीय युवाओं के लिए ऑस्ट्रेलिया हमेशा से सबसे पसंदीदा देशों में से एक रहा है. लेकिन जब बात ऑस्ट्रेलिया की पीआर (Permanent Residency) यानी स्थाई निवास की आती है तो हर किसी के मन में पहला सवाल यही उठता है कि आखिर पीआर मिलने में कितने साल लगते हैं? ऑस्ट्रेलिया में पीआर मिलने का सफर कोई तयशुदा समय सीमा नहीं है. यह वीजा टाइप, प्रोफेशन, पॉइंट स्कोर और डॉक्यूमेंट्स की मजबूती पर निर्भर करता है. जहां कुछ लोगों को यह 1 से 2 साल में मिल जाती है, वहीं कुछ को 3 से 5 साल तक का इंतजार करना पड़ता है.
ऑस्ट्रेलिया की PR क्या है और कैसे मिलती है?
ऑस्ट्रेलियाई पीआर (Permanent Residency) एक ऐसा वीजा है जो आपको बिना किसी पाबंदी के ऑस्ट्रेलिया में अनिश्चित काल के लिए रहने, काम करने और पढ़ाई करने का अधिकार देता है. इसके बाद आप 5 साल बाद वहां की सिटीजनशिप के लिए भी पात्र हो जाते हैं. भारतीय सबसे ज्यादा नीचे दिए गए 3 स्किल्ड पाथवे के जरिए पीआर हासिल करते हैं:
- 189 स्किल्ड इंडिपेंडेंट वीजा (Skilled Independent): यह डायरेक्ट पीआर वीजा है, जिसके लिए किसी स्टेट स्पॉन्सरशिप की जरूरत नहीं होती. इसमें ईओआई (EOI) इनविटेशन आने में 6 महीने से 2 साल और प्रोसेसिंग में 6-12 महीने लगते हैं. कुल मिलाकर 1 से 3 साल का समय लगता है.
- 190 स्किल्ड नॉमिनेटेड वीजा (Skilled Nominated): यह स्टेट स्पॉन्सर्ड पीआर वीजा है, जिसे तस्मानिया या विक्टोरिया जैसे राज्य देते हैं. स्टेट नॉमिनेशन में 1-6 महीने और वीजा प्रोसेसिंग में 6-12 महीने लगते हैं. इसका कुल सफर 1 से 2 साल का होता है.
- 491 रीजनल वीजा (Regional Temporary to PR): यह 5 साल का अस्थायी वीजा है. इसमें पहले आपको रीजनल एरिया में 3 साल रहकर वहां की इनकम कंडीशन पूरी करनी होती है, जिसके बाद यह 191 वीजा के जरिए पीआर में बदल जाता है, इस पूरे सफर में 3 से 5 साल लग जाते हैं.
फास्ट पीआर के नियम क्या हैं?
मौजूदा नियमों और बजट प्राथमिकताओं के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई सरकार हेल्थकेयर (डॉक्टर्स, नर्स), टीचिंग, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन ट्रेड्स (कारपेंटर, शेफ) और क्षेत्रीय (Regional) इलाकों से जुड़े आवेदकों को सबसे तेज प्राथमिकता दे रही है. जिन उम्मीदवारों का पॉइंट स्कोर 80 से 95+ के बीच है, उन्हें बहुत जल्दी इनविटेशन मिल रहे हैं. दूसरी तरफ, आईटी और अकाउंटिंग के क्षेत्र में कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है, जिससे इन सेक्टर्स के आवेदकों को थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
ऑस्ट्रेलिया पीआर प्रोसेस का Step-by-Step फ्रेमवर्क
अगर आप भारत से ऑस्ट्रेलिया पीआर के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आपको इस 8-स्टेप प्रक्रिया से गुजरना होगा:
- स्किल असेसमेंट: सबसे पहले आपकी पढ़ाई और वर्क एक्सपीरियंस को संबंधित ऑस्ट्रेलियाई अथॉरिटी से जांचना होता है.
- इंग्लिश टेस्ट (IELTS/PTE): भाषा की दक्षता साबित करने के लिए अच्छे स्कोर की जरूरत होती है.
- EOI सबमिट करना: अपने पॉइंट्स (उम्र, अनुभव, शिक्षा के आधार पर) कैलकुलेट करके ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ पोर्टल पर डालना.
- इनविटेशन (ITA): कट-ऑफ क्लियर होने पर सरकार की तरफ से वीजा अप्लाई करने का न्योता मिलना.
- वीजा एप्लिकेशन: इनविटेशन मिलने के 60 दिनों के अंदर सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ वीजा की फीस भरकर फाइनल फाइल लगाना.
- मेडिकल और PCC: पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) और मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट जमा करना.
- S56 रिक्वेस्ट (यदि आवश्यक हो): अगर वीजा अधिकारी को कोई अतिरिक्त डॉक्यूमेंट चाहिए तो वह इसकी मांग करता है.
- पीआर ग्रांट: सभी जांचों के सफल होने के बाद आखिरकार आपका ऑस्ट्रेलिया का पीआर वीजा मंजूर हो जाता है.
अगर डॉक्यूमेंट्स में कोई विसंगति होती है, पीसीसी आने में देरी होती है या पॉइंट्स कम होते हैं तो पीआर के इस सफर में देरी हो सकती है. इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह यही होती है कि आवेदन करने से पहले अपने सभी पेपर्स को पूरी तरह व्यवस्थित रखें.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

