मुंबई. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने शनिवार को कर्ज माफी को लेकर चिंताओं पर बात की. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को अपने फसल कर्ज 31 मार्च तक चुकाने होंगे. उन्होंने माना कि चुनावी वादे हमेशा तुरंत अमल में नहीं आते और भविष्य के फैसले मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे. हालांकि, उन्होंने भरोसा दिया कि किसानों के बोझ को कम करने के लिए 0% ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा.
पवार ने बारामती में एक कार्यक्रम में कहा, “चाहे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हों या उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, ध्यान हमेशा लोगों की भलाई पर रहता है. हाल ही में, कई नागरिकों ने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए कर्ज माफी के वादे पर चिंता जताई. 28 मार्च तक, मैं महाराष्ट्र के लोगों को इस कार्यक्रम के माध्यम से स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं कि वे अपने फसल कर्ज को 31 मार्च तक चुका दें.”
उन्होंने आगे कहा, “चुनावों के दौरान किए गए वादे हमेशा सीधे तौर पर कार्यों में तब्दील नहीं होते… मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, भविष्य में निर्णय लिए जाएंगे. हालांकि, अभी और अगले साल के लिए, लिए गए कर्ज को चुकाना होगा. एक सकारात्मक बात यह है कि 0% ब्याज पर कर्ज लेने की व्यवस्था की गई है.”
राज्य की वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर चर्चा करते हुए, पवार ने महाराष्ट्र के 7.20 लाख करोड़ रुपए के बजट को संभालने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि केवल बिजली के बिल माफ करने में ही सरकार को लगभग 65,000 करोड़ रुपए का खर्च आता है. उन्होंने कहा, “जो भी कहा गया है, वह सीधे तौर पर लागू नहीं होता क्योंकि 7.20 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश करते समय, लगभग 65,000 करोड़ रुपए के बिजली के बिल माफ कर दिए गए हैं, जिसका मतलब है कि आप नहीं, बल्कि हम, सरकार को इसे चुकाना पड़ता है.”
पवार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के वित्तीय बोझ का भी उल्लेख किया, जिसमें लड़की बहिन योजना के लिए 45,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. इसके अलावा, वेतन, पेंशन और ऋण ब्याज भुगतान के लिए 3.5 लाख करोड़ रुपए की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, “अगर हम 65,000 करोड़ रुपए और 3.5 लाख करोड़ रुपए जोड़ें, तो लगभग 4.25 लाख करोड़ रुपये पहले ही खर्च हो चुके हैं. बाकी बचे धन से स्कूल की किताबें, यूनिफॉर्म, बिजली, पानी और सड़कों जैसी आवश्यक खर्चों को पूरा करना होगा.”

