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Air India pilot drunk drug controversy: एयर इंडिया के कॉकपिट में नशेंबाजी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. हाल ही में गांजा और शराब के नशे में पायलटों के पकड़े जाने से एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अहमदाबाद क्रैश जैसे इतिहास के खौफनाक सबक याद दिलाते हैं कि एविएशन के क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस की जरूरत है. ऐसी लापरवाही सैकड़ों जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है. हालांकि एयरलाइन ने अब स्क्रीनिंग सख्त कर दी है.
एयर इंडिया को इन घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है.
जब टाटा ने एयर इंडिया की कमान अपने हाथ में ली थी, तो देश भर के एविएशन सेक्टर और आम यात्रियों को उम्मीद की एक बड़ी किरण नजर आई थी कि दशकों पुरानी सरकारी लीपापोती और कमियों का दौर अब खत्म होगा. ऐसा लगा था कि एक प्रोफेशनल और कड़े कॉर्पोरेट कल्चर के आने से फ्लाइट सेफ्टी और क्रू की जिम्मेदारी जैसे गंभीर मुद्दों पर अब कोई कोताही नहीं बरती जाएगी. लेकिन हालिया मामलों ने इस उम्मीद को तगड़ा झटका दिया है. पहले गांजा और अब शराब के नशे में धुत पायलटों का कॉकपिट तक पहुंच जाना हर एयर ट्रैवलर के लिए सिरदर्द बन गया है. सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एयर इंडिया के कुछ पायलटों को हो क्या गया है?
गांजा और शराब: कॉकपिट में नशे का नया खेल
हाल ही में सामने आए मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. कुछ समय पहले फुकेट से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट के दौरान आसमान में बड़ा तकनीकी ड्रामा हुआ, जिसके बाद जांच में पता चला कि मुख्य पायलट ने गांजे का सेवन किया था. इस खुलासे के बाद एयरलाइन ने उसे तुरंत बर्खास्त कर दिया. यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि यूरोप के ज्यूरिख एयरपोर्ट पर ज्यूरिख-दिल्ली फ्लाइट उड़ाने से ठीक पहले एक को-पायलट शराब के नशे में पकड़ा गया. ग्राउंड स्टाफ की सतर्कता से समय रहते बड़ी अनहोनी टल गई, वरना 36 हजार फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी.
टाटा के राज में भी सुधार की राह क्यों है मुश्किल?
टाटा के आने के बाद एयरलाइन को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर लाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीन पर क्रू मेंबर्स की मानसिक स्थिति, भारी वर्कलोड, रेस्ट पीरियड की कमी और मैनेजमेंट के बीच की दूरी एक बड़ा संकट बन चुकी है. सीनियर पायलटों का मानना है कि टॉप मैनेजमेंट केवल ग्रोथ और विमानों की संख्या बढ़ाने पर फोकस कर रहा है, जबकि कॉकपिट संभालने वालों के तनाव और उनकी वेलबीइंग पर वैसा ध्यान नहीं दिया जा रहा है. हालांकि, एयरलाइन ने अब सख्ती दिखाते हुए 100% पायलटों की ड्रग और अल्कोहल स्क्रीनिंग शुरू कर दी है, लेकिन ऐसे मामलों का बार-बार सामने आना यह बताता है कि कल्चर बदलने में अभी वक्त लगेगा और पैसेंजर्स की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों पर और अधिक कड़े डंडे की जरूरत है.
इतिहास के वो खौफनाक सबक, जब लापरवाही ने ली जान
एविएशन इंडस्ट्री में लापरवाही का इतिहास बेहद डरावना रहा है. भारत के एविएशन इतिहास में अहमदाबाद क्रैश या ऐसे तमाम अन्य हादसे इस बात की गवाही देते हैं कि कॉकपिट में जरा सी चूक या प्रोटोकॉल की अनदेखी सैकड़ों बेकसूर लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है. दुनिया भर में जब भी एयरलाइंस ने सेफ्टी स्टैंडर्ड्स से समझौता किया है, उसका नतीजा बड़ी तबाही के रूप में सामने आया है. यही वजह है कि एविएशन सेक्टर में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को सबसे ऊपर रखा जाता है, ताकि किसी भी अनहोनी को हवा में ही रोका जा सके.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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