हाई प्रोफाइल केस
इस बीच एजीईएल ने नवंबर में स्पष्ट किया था कि अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और वरिष्ठ कार्यकारी विनीत एस जैन पर यूएस फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट के उल्लंघन और रिश्वतखोरी के आरोप नहीं लगाए गए हैं। अडानी और ग्रुप के दूसरे अधिकारियों के खिलाफ दायर मुकदमे को अमेरिकी अदालत में सिंगल जज न्यायाधीश को सौंपा गया है।
इस बारे में अडानी ग्रुप, उनके अधिकारियों और अमेरिकी की लीगल फर्म्स ने सवालों का जवाब नहीं दिया। Quinn Emanuel लॉस एंजिल्स की फर्म है। उसका दावा है कि वह बिजनस लिटिगेशन और आर्बिट्रेशन स्पेस में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। फर्म का कहना है कि उसके वकीलों ने 2,300 से अधिक मामलों की सुनवाई की है। उनमें से 88% में जीत हासिल की है और $70 अरब से अधिक के फैसले और समझौते जीते हैं। कंपनी ने गूगल, ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट और उबर के लिए हाई-प्रोफाइल मामलों को मैनेज किया है।
क्या हैं आरोप
Kirkland & Ellis का मुख्यालय शिकागो में है। इसका ऑपरेशन एशिया और यूरोप सहित दुनिया भर के 21 शहरों में है। यह हाई प्रोफाइल कमर्शियल और इंटिलेक्चुअल प्रॉपर्टी लिटिगेशन के साथ-साथ व्हाइट कॉलर और सरकारी विवादों को निपटाने में एक्सपर्ट है। फर्म ने ऐपल, गूगल, फेसबुक, जॉनसन एंड जॉनसन और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों का केस लड़ा है।
Azure Power के पूर्व कार्यकारी रंजीत गुप्ता और रूपेश अग्रवाल पर FCPA का उल्लंघन करने की साजिश का आरोप है। यह मामला ठेके हासिल करने के लिए भारत में सरकारी अधिकारियों को कथित रिश्वत देने से जुड़ा है। कनाडा के संस्थागत निवेशक CDPQ से जुड़े सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल और दीपक मल्होत्रा पर न्याय में बाधा डालने की साजिश का आरोप है। इसमें सबूतों को नष्ट करने या बदलने और जांच के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी को रोकना शामिल है।

