Aaj Ka Mausam Live: देश के कई राज्यों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. उत्तर भारत में तो मानों आसमान से आग बरस रही है. उत्तर प्रदेश से लेकर मध्यप्रदेश तक कई शहरों में तापमान 40 के पार जा चुका है. इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए राहत की खबर दी है. मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल का आखिरी सप्ताह आते-आते मौसम का मिजाज अचानक बदलने वाला है. एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जो उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक असर दिखाएगा. IMD के अुसार आने वाले दिनों में आंधी-तूफान, तेज हवाएं और बारिश कई राज्यों में दस्तक देंगी. हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. यही वजह है कि 13 राज्यों में मौसम पलटने का अलर्ट जारी किया गया है. कहीं लू चलेगी तो कहीं ओलावृष्टि होगी. कहीं आसमान साफ रहेगा तो कहीं अचानक बादल छा जाएंगे. इस बदलते मौसम के पीछे कई वेदर सिस्टम एक साथ काम कर रहे हैं.
दिल्ली में मिलेगी राहत. (PTI)
दिल्ली-NCR में लू और फिर राहत के संकेत
दिल्ली-एनसीआर में इस समय गर्मी अपने चरम पर है और लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर को झुलसा देने वाली महसूस हो रही हैं. तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है और कुछ इलाकों में यह 42 डिग्री तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक लू का असर और तेज हो सकता है, इससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. हवा की गति 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने का अनुमान है, लेकिन यह गर्म हवाएं ही होंगी जो राहत देने के बजाय परेशानी बढ़ाएंगी. खासकर दोपहर के समय हालात ज्यादा खराब रहेंगे. हालांकि 25 अप्रैल के बाद मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है. आसमान में आंशिक बादल छाने लगेंगे, जिससे सीधे धूप का असर कुछ कम होगा. इसके बाद 27 से 28 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है. यह बारिश गर्मी से कुछ राहत जरूर दे सकती है और तापमान में गिरावट ला सकती है. लेकिन तब तक लोगों को सावधानी बरतनी होगी. अधिक पानी पीना, धूप से बचना और जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलना बेहद जरूरी है.
यूपी में लू का प्रकोप और राहत की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते नजर आ रहे हैं. 23 से 25 अप्रैल के बीच प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है. खासतौर पर बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी ने कहर मचा रखा है. बांदा, झांसी, हमीरपुर जैसे जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, जो लोगों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है. सुबह से ही तेज धूप निकल जाती है और दोपहर होते-होते गर्म हवाएं चलने लगती हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां छांव और पानी की कमी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि महीने के आखिरी दिनों में कुछ बदलाव संभव है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है और कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हो सकती है. इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है. लेकिन फिलहाल अगले कुछ दिन बेहद सावधानी से बिताने की जरूरत है.
बिहार में गर्मी का टॉर्चर जारी
बिहार में भीषण गर्मी का दौर लगातार जारी है और लोगों के लिए यह किसी टॉर्चर से कम नहीं है. राज्य के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है, इससे दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. तेज धूप और उमस भरी गर्मी ने हालात और खराब कर दिए हैं. IMD के अनुसार फिलहाल बारिश की कोई ठोस संभावना नहीं है और मौसम साफ बना रहेगा. हालांकि सीमावर्ती जिलों जैसे किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में हल्के बादल छाने और आंधी जैसी स्थितियां बनने के संकेत जरूर हैं, लेकिन इससे व्यापक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती और पानी की समस्या के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. वहीं शहरों में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना और धूप से बचना बेहद जरूरी है. आने वाले दिनों में यदि कोई मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय होता है तभी राहत संभव है.
राजस्थान में तपिश का कहर
राजस्थान में गर्मी ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं और स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है. राज्य के कई हिस्सों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. श्रीगंगानगर, चुरू, कोटा, झुंझुनूं और जयपुर जैसे शहरों में भीषण गर्मी का असर साफ देखा जा सकता है. दिन के समय सड़कें सूनी नजर आती हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं. लू के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं और बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है. मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे हालात और खराब हो सकते हैं. खासकर पश्चिमी राजस्थान में गर्म हवाओं का असर ज्यादा रहेगा. हालांकि महीने के आखिर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से कुछ इलाकों में बादल छा सकते हैं और हल्की बारिश की संभावना भी बन सकती है. इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन फिलहाल गर्मी से राहत के कोई बड़े संकेत नहीं हैं. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और खुद को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है.
दक्षिण भारत में बारिश हो सकती है. (PTI)
हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मौसम का बदलाव
- हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है. अगले 48 घंटों में कई जिलों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है. शिमला, कुल्लू, कांगड़ा, मंडी और लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में तेज हवाएं चल सकती हैं. इसके साथ ही गरज-चमक और ओलावृष्टि का खतरा भी बना हुआ है. मौसम विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि खराब मौसम के कारण सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं और यात्रा में दिक्कत आ सकती है.
- उत्तराखंड: उत्तराखंड में 24 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर खासतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में देखने को मिलेगा. बागेश्वर, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे जिलों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है. इसके अलावा कई स्थानों पर तेज हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ ओले गिरने का भी खतरा है. हालांकि मैदानी क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है, लेकिन तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जाएगी.
- जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में भी मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. 24 अप्रैल के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है. घाटी में बादल छाए रहेंगे, जिससे तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा. हालांकि जम्मू क्षेत्र में गर्मी का असर बना रहेगा. दिन और रात के तापमान में अंतर देखने को मिलेगा. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान यात्रा से बचने की सलाह दी है.
दक्षिण भारत में सक्रिय हुआ नया वेदर सिस्टम
दक्षिण भारत में भी मौसम का मिजाज बदलने लगा है और एक नया वेदर सिस्टम सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं. तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश हो सकती है. इसके साथ ही तेज हवाएं चलने की भी संभावना है, जो मौसम को अचानक बदल सकती हैं. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में भी बादल छाए रहेंगे और गरज-चमक के साथ बारिश दर्ज की जा सकती है. इस बदलाव से जहां कुछ इलाकों में तापमान में गिरावट आएगी, वहीं कुछ जगहों पर उमस बढ़ सकती है. किसानों के लिए यह मौसम महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि बारिश से फसलों को फायदा मिल सकता है, लेकिन तेज हवाएं नुकसान भी पहुंचा सकती हैं. ऐसे में सतर्कता जरूरी है.
पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट
पूर्वोत्तर भारत में मौसम पहले से ही बिगड़ा हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आ सकती है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक इसी तरह की स्थिति बने रहने का अनुमान जताया है. इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है, जो जानलेवा साबित हो सकता है. कई जगहों पर जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. लोगों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें और जरूरी होने पर ही बाहर निकलें. यह गतिविधियां प्री-मानसून के संकेत मानी जा रही हैं, जो आने वाले समय में और तेज हो सकती हैं.
पश्चिमी विक्षोभ क्या होता है?
पश्चिमी विक्षोभ एक प्रकार का वेदर सिस्टम होता है, जो भूमध्य सागर क्षेत्र से उठकर भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में आता है. यह ठंडी हवाएं, बारिश और बर्फबारी लाता है. सर्दियों में इसका असर ज्यादा होता है, लेकिन गर्मियों में भी यह मौसम बदल सकता है.
लू से बचने के लिए क्या करें?
लू से बचने के लिए ज्यादा पानी पिएं. धूप में निकलने से बचें. हल्के और ढीले कपड़े पहनें. सिर को ढककर रखें. बाहर जाते समय छाता या टोपी का इस्तेमाल करें.
आंधी-तूफान के दौरान क्या सावधानी रखें?
आंधी के दौरान खुले में न रहें. पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें. घर के अंदर सुरक्षित जगह पर रहें. मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कम करें.
क्या यह प्री-मानसून संकेत हैं?
हां, इस तरह की गतिविधियां प्री-मानसून का संकेत हो सकती हैं. अप्रैल और मई में ऐसे सिस्टम सक्रिय होते हैं, जो मानसून की तैयारी का हिस्सा होते हैं.
क्या तापमान में गिरावट स्थायी होगी?
नहीं, यह गिरावट अस्थायी होगी. कुछ दिनों की राहत के बाद फिर से गर्मी बढ़ सकती है. मई में तापमान फिर से ऊंचा रहने की संभावना है.

