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साबरमती सेंट्रल जेल में लॉरेंस बिश्नोई को ‘दो सौ खोली’ नाम के हाई सिक्योरिटी एन्क्लेव में शिफ्ट किए जाने की खबर है. इस ब्लॉक में करीब 200 कैदियों को चार अलग-अलग सेक्शन में रखने की व्यवस्था है. बिश्नोई की सेल लगभग 7.5×11 फीट की बताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक यहां कैदियों की आवाजाही और आपसी कॉन्टेक्ट पर कड़ी निगरानी रखी जाती है. बिश्नोई इससे पहले ‘दस खोली’ नाम के छोटे हाई सिक्योरिटी हिस्से में था. उसकी नई शिफ्टिंग को अधिक सख्त निगरानी और कॉन्टेक्ट सीमित रखने के संदर्भ में देखा जा रहा है. इस खबर में जानें ‘हाई सिक्योरिटी एन्क्लेव’ के बारे में.
लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल के हाई सिक्योरिटी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया है, क्या होता है ये. (फाइल फोटो)
जेल की चारदीवारी के भीतर भी हर कैदी पर एक जैसी पाबंदियां नहीं होतीं. कुछ कैदियों के लिए सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए जाते हैं जहां उनकी आवाजाही से लेकर दूसरे कैदियों से कॉन्टेक्ट तक पर कड़ी निगरानी रखी जाती है. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के ऐसे ही एक हाई सिक्योरिटी एन्क्लेव में शिफ्ट किए जाने की खबर है. इस हिस्से को ‘दो सौ खोली’ कहा जाता है. यहां करीब 200 कैदियों को रखने की व्यवस्था है. बिश्नोई की सेल लगभग 7.5×11 फीट की बताई गई है. इस शिफ्टिंग ने सवाल खड़ा किया है कि आखिर इस खास बैरक की व्यवस्था कैसी है और बिश्नोई को पहले वाली जगह से यहां लाने के पीछे क्या वजह हो सकती है?
क्या है साबरमती जेल का हाई सिक्योरिटी एन्क्लेव?
‘दो सौ खोली’ साबरमती सेंट्रल जेल का अधिकतम सुरक्षा वाला ब्लॉक बताया जाता है. इसके चार अलग-अलग हिस्से कैदियों को अलग रखने और उनके बीच अनियंत्रित कॉन्टेक्ट रोकने के लिए बनाए गए हैं. यहां रखे जाने वाले कैदियों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण रहता है. इस तरह की व्यवस्था का मकसद जेल के भीतर सुरक्षा जोखिम घटाना और कैदियों के बीच कॉन्टेक्ट को सीमित करना है. ब्लॉक में 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस के दोषियों और अन्य गंभीर अपराधों में बंद कैदियों के होने की जानकारी भी दी गई है.
दो सौ खोली’ में कैसी है सुरक्षा व्यवस्था?
साबरमती जेल का ‘दो सौ खोली’ ब्लॉक अधिकतम सुरक्षा वाले हिस्से के तौर पर जाना जाता है. इसमें चार अलग-अलग सेक्शन बनाए गए हैं और हर सेक्शन में लगभग 50 कैदियों को रखने की व्यवस्था बताई गई है. इस तरह कैदियों के समूहों को अलग रखने और उनके बीच कॉन्टेक्ट सीमित करने में मदद मिलती है. रिपोर्ट के मुताबिक यहां 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषियों और दूसरे गंभीर अपराधों से जुड़े कैदियों को भी रखा गया है. यानी यह सामान्य बैरक नहीं बल्कि ऐसे कैदियों के लिए बना हिस्सा है जिनकी आवाजाही पर विशेष नियंत्रण जरूरी समझा जाता है.
बिश्नोई को इस ब्लॉक में रखने के पीछे क्या वजह है?
लॉरेंस बिश्नोई का नाम जबरन वसूली और धमकी से जुड़े कई मामलों में सामने आता रहा है. पहले अलग-अलग जेलों से कथित धमकी भरे फोन और ऑडियो-वीडियो मैसेज सामने आने की रिपोर्ट थी. जेल से इंटरव्यू देने को लेकर भी वह चर्चा में रहा. अब सूत्रों का दावा है कि पिछले दो सालों में उसकी ओर से सीधे किए गए फोन या संवाद का पता नहीं चला है. नई जगह पर कड़ी निगरानी का उद्देश्य उसके कॉन्टेक्टों और गतिविधियों को सीमित रखना हो सकता है. हालांकि इस शिफ्टिंग के पीछे के आधिकारिक कारणों की पुष्टि के लिए जेल प्रशासन का बयान जरूरी है.
जेल के बाहर कॉन्टेक्ट कैसे सीमित किए जाते हैं?
हाई सिक्योरिटी व्यवस्था का मकसद सिर्फ कैदी को छोटी सेल में रखना नहीं होता. उसकी आवाजाही को नियंत्रित करना और बिना अनुमति कॉन्टेक्ट की संभावनाएं कम करना भी इसका हिस्सा होता है. रिपोर्ट के मुताबिक बिश्नोई को अदालत की सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल कराया जाता है और कानूनी मामलों पर वकील से बातचीत का अवसर मिलता है. उसकी दिनचर्या को लेकर ध्यान करने और हनुमान चालीसा पढ़ने जैसी बातें भी रिपोर्ट में कही गई हैं. हालांकि ये निजी विवरण स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हैं.
क्या जेल में रहने के बावजूद गिरोह सक्रिय है?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिश्नोई के जेल में रहने के बावजूद उसके कथित गिरोह के कुछ सहयोगी विदेशों में रहकर नेटवर्क चलाते हैं. गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे नाम इस नेटवर्क से जोड़े जाते रहे हैं. बताया जाता है कि अलग-अलग सहयोगी भर्ती, संसाधन जुटाने और कथित आपराधिक गतिविधियों के समन्वय में भूमिका निभाते हैं. लेकिन बिश्नोई की नई जेल व्यवस्था और विदेश में सक्रिय बताए जा रहे नेटवर्क के बीच सीधे संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती. फिलहाल ‘दो सौ खोली’ में शिफ्टिंग को उसकी सुरक्षा निगरानी और जेल के भीतर कॉन्टेक्ट पर नियंत्रण के संदर्भ में देखा जा रहा है.
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सुमित कुमार हिंदी पत्रकारिता का एक उभरता और सक्रिय नाम हैं. वर्तमान में वे News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और सेंट्रल डेस्क टीम का हिस्सा हैं. पिछले चार साल से वे Network18

