राहुल गांधी हो या दीपके हो, कांग्रेस हो या कॉकरोच पार्टी हो, आज की डेट में सबके तेवर ठंडे पड़ गए हैं. कोई सड़क पर नहीं दिख रहा है. कोई कह रहा है कि अभी घर बैठो. नेहा बोरा भी नहीं दिख रही है. बाकी लोग भी नहीं दिख रहे, जो रिजीम चेंज की बातें कर रहे थे. कॉकरोच वालों का तो हाल ये हो गया है कि अब इन्हें क्रांति आंदोलन ये सब याद नहीं आ रहा है, इन्हें अब परिवार याद आ रहा है, त्योहार याद आ रहा है. इनका कोई दांव चल नहीं रहा है. कोर्ट से भी इन्हें ऐसी फटकार मिल रही है, जिसने कान से धुआं निकाल दिया है.
इन लोगों के तेवर इसलिए भी ढीले पड़ गए हैं, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने चाभी टाइट कर दी है. ये लोग जहां जहां से सपोर्ट लेना चाह रहे होंगे, वहां से सपोर्ट भी नहीं मिल पा रहा है. आप देखिए कि अमेरिका से भी इन्हें बड़ा झटका मिल गया. भारत दौरे पर आए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो से इंडी और कॉकरोच के प्रोटेस्ट पर सवाल किया गया है. लेकिन मार्को रूबियो ने इस पर कमेंट करने से मना कर दिया. रूबियो ने कहा कि ये भारत का अंदरूनी मामला है. भारत में लोकतंत्र है. भारत अपने आप देख लेगा.
कॉकरोच वालों को अमेरिका का झटका
यानी जिस अमेरिका में मोदी विरोधी डीप स्टेट एक्टिव है. जो अमेरिका दुनियाभर के प्रोटेस्ट पर नजर रखता है. कमेंट करता है. जिस अमेरिका के लिए ये दावा किया जा रहा है कि वहीं से कॉकरोच पार्टी की फंडिंग हो रही है. उस अमेरिका के विदेश मंत्री कह रहे हैं कि भारत में चल रहे प्रोटेस्ट पर कुछ बोलने की जरूरत ही नहीं. इतना ही नहीं… संयुक्त राष्ट्र की जिन संस्थाओं ने ये माहौल बनाया था कि भारत में प्रोटेस्ट को दबाया जा रहा है, उसकी धज्जियां भी मार्को रूबियो ने ये कहकर उड़ा दी की यूएन के एक्सपर्ट तो फालतू के लोग हैं. जबकि यहां तो इंडी वाले, कॉकरोच वाले यही माहौल बनाने में लगे थे कि दुनिया देख रही है कि भारत में क्या हो रहा है.
UN Human Rights ने प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की बात कही थी. इसी पर इंडी वाले उछल रहे थे. लेकिन आज अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान ने इन्हें झटका दे दिया… अब ये हाल है कि कॉकरोच वालों का पूरा प्लान एक्सपोज हो गया है. वो हाईकोर्ट जाते हैं तो वहां फटकार मिलती है. पब्लिक का सपोर्ट वैसे ही नहीं मिल रहा है. देश में रिजीम चेंज करना और देश की इकॉनमी को हिट करने का जो प्लान था वो फेल हो गया है. आज भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है. भारत की इकॉनमी ऐसा ब्राइट स्पॉट है जिसके साथ हर कोई जुड़ना चाहता है.
भारत की शर्तों पर होगी ट्रेड डील
पीएम मोदी विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में जुटे हैं. जिससे देश के बाहर और देश के अंदर कई लोगों को दिक्कत हो रही है. ये आरोप खुद बीजेपी लगा रही है. अब ये सारा खेल पब्लिक के सामने खुल गया है. सारी अड़चनों को पीएम मोदी दूर कर रहे हैं. देश की तरक्की की राह में जो भी मुश्किलें आ रही हैं, पीएम मोदी उनको निपटाते जा रहे हैं. आप देखिए अमेरिका भी भारत के साथ ट्रेड डील पूरी करने के लिए बेकरार है. अमेरिका को भी पता चल गया कि भारत पर दबाव बनाकर कुछ होने वाला नहीं है. ट्रेड डील भारत की शर्तों पर ही होगी.
अमेरिका के साथ ट्रेड डील होने से भारत को भी फायदा होगा। भारत की जीडीपी को बूस्ट मिलेगा, और इसका असर इकॉनमी पर भी पड़ेगा. दूसरी तरफ आप देखिए Jio प्लेटफॉर्म्स के IPO ने अलग ही धमाल मचा रखा है. आज ही Jio का आईपीओ लॉन्च हुआ और लॉन्च होने के एक घंटे के अंदर ही पूरा आईपीओ सब्सक्राइब हो गया. यानी जिस इंडियन इकॉनमी को चोट पहुंचाने की साजिश थी. वो लगातार बढ़ रही है. और इस से एंटी मोदी इकोसिस्टम को और तकलीफ हो रही है.
बस होने ही वाली है ट्रेड डील
आप देखिए कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील लंबे समय से अटकी हुई है. कल ही नेटवर्क 18 के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी के साथ इंटरव्यू में मार्को रूबियो ने कहा था कि ट्रेड डील होने ही वाली है. अगले कुछ हफ्तों में ये हो सकती है. वहीं अब ट्रंप भी कह रहे हैं कि ट्रेड डील बस होने ही वाली है.
देश के बाहर बैठे एंटी इंडिया एलिमेंट्स की कोशिशों के बाद भी भारत की इकॉनमी आगे बढ़ रही है. और अब अमेरिका से ट्रेड डील भी होने ही वाली है. इससे भारत को क्या फायदा होगा वो देखिए…
इस ट्रेड डील से क्या-क्या फायदा?
दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट यानी अमेरिका ,भारतीय कंपनियों के लिए और खुल सकता है. एसबीआई के मुताबिक भारत के टॉप 15 एक्सपोर्ट आयटम की अमेरिका को बिक्री एक साल में करीब 9.16 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है. बाकी प्रोडक्ट्स को भी जोड़ें तो एडिशनल गूड्स एक्सपोर्ट्स 9.44 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता हैं. वहीं अमेरिका से भारत का गूड्स इम्पोर्ट करीब 5.19 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ने की संभावना है.
एसबीआई के हिसाब से भारत को करीब 4.25 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना ट्रेड सरप्लस मिल सकता है. भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष 25 में करीब 3.86 लाख करोड़ रुपये था. SBI का अनुमान है कि ट्रेड डील के बाद ये सालाना 8.50 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है.
एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि ट्रेड डील का नेट इम्पैक्ट भारत की GDP पर करीब 1.1% तक हो सकता है. साथ ही जीरो कम इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 3 बिलियन डॉलर सालाना की बचत हो सकती है. भारत के करीब 48% इलेक्ट्रिकल मशीन एक्सपोर्ट, 35.5% फार्मा एक्सपोर्ट और करीब 45% टेक्सटाइल एक्सपोर्ट अमेरिका जाते हैं.
वहीं टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज का अनुमान है कि टैरिफ से राहत के बाद अमेरिका को एक्सपोर्ट 2027 में डबल डिजिट में जा सकते हैं. ज्यादा अमेरिकी ऑर्डर आएंगे तो भारत में प्रोडक्शन बढ़ेगा MSME को बिजनेस मिलेगा. भारत में रोजगार बढ़ेंगे और नई मैन्यूफैक्चरिंग कैपेसिटी में निवेश आएगा. दोनों देशों ने टेक्नोलॉजी, GPUs, डेटा सेंटर, और Resilient Supply Chains में सहयोग बढ़ाने की भी बात की है.
यानी ये डील सिर्फ भारत का एक्सपोर्ट ही नहीं बढ़ा सकती, बल्कि मैन्यूफैक्चरिंग, नौकरी, निवेश और जीडीपी विकास को भी पुश दे सकती है. लेकिन कुछ लोगों को ये अच्छा नहीं लग रहा है. वो भारत की तरक्की नहीं देख पा रहे हैं. बीजेपी ने कहा कि देश के अंदर और बाहर कई ताकतें भारत के खिलाफ साजिश कर रही हैं.
BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत जिस गति से, जिस शक्ति से और जिस दिशा से प्रगति की रफ्तार पर बढ़ते हुए संपूर्ण विश्व में अपना प्रभावी स्थान बना रहा है. अनेक शक्तियां ऐसी हैं जिन्हें ये रास नहीं आ रहा है और वो शक्तियां देश के बाहर भी हैं और देश के अंदर भी हैं. वो शक्तियां जिनके तीन मुख्य आधार हैं, वो भारत को अस्थिर करने में लगी हैं. नंबर 1, सत्ता में आने पर लूट। नंबर 2, समाज में फूट। और नंबर 3, भारतीय संस्कृति और धर्म से घृणा.
दुनिया में भारत की तरक्की की चर्चा
भारत की इकॉनमी में पिछले 10 साल में कितना बदलाव आया है. दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है. दक्षिण कोरिया के इकॉनमिस्ट क्युंगहून किम ने भारत की इकॉनमी का अलग-अलग पैरामीटर्स पर आंकलन किया है. किम का कहना है कि भारत की आर्थिक तरक्की सिर्फ इस आधार पर नहीं आंकनी चाहिए कि आज देश कितना गरीब या अमीर है. महत्वपूर्ण सवाल ये है कि क्या लाइफस्टाइल तेजी से ऊपर उठ रही है और क्या भारत दूसरे देशों की बराबरी कर रहा है?
किम ने जो आंकड़े दिए हैं उसके मुताबिक, 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP 2,702 डॉलर थी. परचेजिंग पावर पैरिटी के हिसाब से ये 11 हजार 784 डॉलर थी. 2007 तक वर्ल्ड बैंक भारत को कम आय वाले देश की कैटेगरी में रखता था. 1990 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP कम आय वाले देशों के औसत से सिर्फ 15% ज्यादा थी. 2025 तक प्रति व्यक्ति GDP उस औसत से चार गुना से भी ज्यादा हो गई है.
मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं जैसे चीन, वियतनाम की तुलना में 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP उनके औसत का 64% तक पहुंच गई. इसमें से ज्यादातर सुधार और बदलाव पिछले 10 साल के दौरान हुआ है. 1990 में ये अंतर करीब 47% पर था , 2014 तक केवल 51% पहुंचा, यानी 24 साल में 4% की बढ़ोतरी और मोदी सरकार के पहले दस साल में 13% की बढ़ोतरी हुई. 1990 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP हाई इनकम वाले देशों के औसत का सिर्फ 6% थी. जो साल 2014 तक केवल 11 % था और 2025 तक ये बढ़कर 17% हो गई. यानी 24 साल में 5 % ग्रोथ और अगले दस साल में 6 % ग्रोथ…
Jio के आईपीओ ने मचाई धूम
भारत की इकॉनमी को आगे बढ़ाने में छोटी बड़ी सरकारी और प्राइवेट सभी कंपनियों का रोल है. आज ही Jio प्लेटफॉर्म्स का IPO मार्केट में आया और आते ही इसने धूम मचा दी. ये भारत का सबसे बड़ा IPO है। देखिए Jio के IPO ने मार्केट में कैसा धमाका किया है.
शेयर मार्केट में लिस्ट होने से पहले ही Jio के IPO के 3 बड़े रिकॉर्ड बना दिए हैं. पहला रिकॉर्ड है भारत के सबसे बड़े IPO का है. Jio Platforms का IPO करीब 30 हजार 213 करोड़ रुपये का है. पहले ही दिन Jio का IPO 3 गुना से ज्यादा भर चुका है. यानी 30 हजार 213 करोड़ के IPO के लिए 3 गुना ज्यादा बोली लग चुकी है. रिटेल निवेशकों के पास IPO में पैसा लगाने के लिए अभी दो दिन का समय बाकी है.
Jio ने दूसरा रिकॉर्ड बनाया है IPO भरने की रफ्तार का. Jio का IPO सुबह खुला और 100 मिनट के अंदर पूरा IPO Subscribe हो गया. बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए रखा गया हिस्सा सिर्फ 10 मिनट में पूरा भर गया. आधे घंटे से भी कम समय में करीब 2 गुना Subscribe हो गया.
तीसरा रिकॉर्ड तो Jio का IPO खुलने से पहले ही बन चुका था. Jio ने Anchor Investors के लिए करीब 8 हजार 110 करोड़ रुपये के शेयर रखे थे. इन शेयरों को खरीदने के लिए करीब ढाई लाख करोड़ रुपये की डिमांड आ गई. यानी जितने शेयर मौजूद थे, उनसे 30 गुना से ज्यादा डिमांड आ गई. किसी भारतीय IPO के एंकर हिस्से के लिए इतनी बड़ी डिमांड पहले नहीं देखी गई थी.

