Hawk News
  • Hindi News
  • Business
  • Education
  • Health
  • Jobs
  • Politics
  • Sports
  • Tech
  • All
  • Hindi News
  • Business
  • Education
  • Health
  • Jobs
  • Politics
  • Sports
  • Tech
  • All
Facebook Twitter Instagram
Friday, October 16
Facebook Twitter LinkedIn VKontakte
Hawk News
Banner
  • Hindi News
  • Business
  • Education
  • Health
  • Jobs
  • Politics
  • Sports
  • Tech
  • All
Hawk News
Home » All News » कानून माथा देखकर तिलक नहीं लगाता, न किसी का सगा, न किसी से बैर!
Hindi News

कानून माथा देखकर तिलक नहीं लगाता, न किसी का सगा, न किसी से बैर!

HawkNewsBy HawkNewsOctober 16, 2026No Comments7 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email
Total Views: 0

किसी भी लोकतांत्रिक देश के नागरिकों के लिए सबसे संतोष की बात यही होती है कि कानून अपना काम करे और व्यवस्था नियमों के मुताबिक चले. जब लोगों को लगता है कि कानून सबके लिए बराबर है, तो उनका भरोसा मजबूत होता है. लेकिन जब किसी व्यक्ति या संगठन को उसकी पहुंच, लोकप्रियता या राजनीतिक रसूख के कारण विशेष छूट मिलती दिखाई देती है, तो यही भरोसा कमजोर होने लगता है.

भारत में सरकार बदलने का अधिकार मतदाताओं के पास है. 1977 के आम चुनाव में आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी की सरकार को जनता ने सत्ता से बाहर कर दिया था. यह भारतीय लोकतंत्र की ताकत का उदाहरण है. राजनीतिक सत्ता का फैसला अंततः चुनाव और संवैधानिक प्रक्रिया से होता है, न कि किसी संगठन के दावे या सड़क पर जुटी भीड़ से.

जो लोग यह मानकर चल रहे थे कि भीड़, राजनीतिक समर्थन और सरकार पर दबाव बनाकर हर नियम को चुनौती दी जा सकती है, उन्हें अब कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से यही संदेश निकलता है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून से ऊपर होने का अधिकार किसी को नहीं.

लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना गलत नहीं है. किसी नीति का विरोध करना, मंत्री के इस्तीफे की मांग करना और व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन करना नागरिकों का अधिकार है. लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब कोई संगठन अपने आंदोलन को ही कानून से ऊपर समझने लगे.सवाल सरकार के विरोध का नहीं, बल्कि उस तरीके का है, जिससे अपनी बात मनवाने की कोशिश की जाती है.

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों के साथ हुई थी. परीक्षा व्यवस्था की खामियां, NEET-UG में अनियमितताओं और सरकारी स्कूलों की हालत जैसे मुद्दे आम परिवारों से जुड़े हैं. ऐसे विषयों पर आवाज उठाने से किसी संगठन को समर्थन मिलता है, तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए. लेकिन किसी जनहित के मुद्दे पर समर्थन मिल जाने का अर्थ यह नहीं कि आगे उठाए जाने वाले हर कदम को भी सही मान लिया जाए.

CJP ने शुरुआत में शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को लेकर सरकार पर दबाव बनाया. इसके बाद संगठन E20 ईंधन नीति और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय दिखाई दिया. अक्टूबर में उसने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं. निर्वाचन आयोग ने अनियमितताओं के आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है. इस विवाद का समाधान तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए.

यहां सवाल उठाना जरूरी है कि किसी आंदोलन की लोकप्रियता और उसकी राजनीतिक रणनीति को एक ही चीज क्यों मान लिया जाए? शिक्षा में सुधार की मांग जायज हो सकती है, लेकिन इससे संगठन को भविष्य की हर गतिविधि के लिए स्वतः समर्थन नहीं मिल जाता. किसी भी आंदोलन की विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि उसके दावे कितने मजबूत हैं और उसका आचरण उसकी मांगों के अनुरूप है या नहीं.

जनता के मुद्दे उठाना एक बात है और उन मुद्दों के सहारे राजनीतिक दबाव बनाना दूसरी. दोनों के बीच फर्क समझना जरूरी है. किसी संगठन की नीयत पर बिना प्रमाण फैसला नहीं सुनाया जा सकता, लेकिन उसके बदलते एजेंडे और सार्वजनिक गतिविधियों पर सवाल जरूर पूछे जा सकते हैं.

CJP के नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की. उनका तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और तिरंगा फहराना अपराध नहीं है. लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए. इस सिद्धांत से इनकार नहीं किया जा सकता.

  1. क्या किसी संगठन के नेताओं को राजनीतिक समर्थन मिल जाने से उनके खिलाफ लगे आरोप अपने आप खत्म हो जाते हैं?
  2. क्या किसी प्रदर्शन का उद्देश्य कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, उसके आयोजकों को सार्वजनिक स्थानों से जुड़े नियमों का पालन नहीं करना चाहिए?

इन सवालों का जवाब किसी पार्टी के राजनीतिक रुख से नहीं, कानून से मिलेगा. राहुल गांधी को पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करने का अधिकार है. उसी तरह, पुलिस को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है. राजनीति में किसी कार्रवाई को दमन बताना आसान है और उसे पूरी तरह उचित घोषित करना भी. असली कसौटी यह है कि क्या कार्रवाई कानूनी आधार पर की गई, क्या संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला और क्या अदालत में लगाए गए आरोप साबित होते हैं.

  • दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर में CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी.
  • इसके बाद 10 अक्टूबर को संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके सहयोगियों को हिरासत में लिया गया था.
  • बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया.

12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का आदेश जारी किया. रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD मैदान को वैकल्पिक स्थलों के रूप में नामित किया गया. पुलिस ने इस निर्णय को सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन स्थलों के नियमन के संदर्भ में रखा.

हालांकि, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को अदालतों में चुनौती दी गई है. 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा. इसलिए इस प्रशासनिक फैसले की वैधता पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है. अदालत की समीक्षा यह भी याद दिलाती है कि कानून का राज केवल नागरिकों पर नियम लागू करने का नाम नहीं, बल्कि प्रशासन को भी संवैधानिक सीमाओं में रखने का सिद्धांत है.

14 अक्टूबर को CJP के कुछ सदस्य फिर जंतर-मंतर पहुंचे. पुलिस के मुताबिक, उन्होंने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली. इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अजिंक्य शिंदे को अलग प्रक्रिया के तहत निजी बॉन्ड पर रिहा किया गया.

पुलिस का आरोप है कि पहले दिए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया. दूसरी तरफ, CJP के नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. इस घटनाक्रम से इतना साफ है कि किसी आंदोलन के नेता को भी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है.राजनीतिक पहचान, समर्थकों की संख्या और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता अपने आप कानूनी छूट नहीं बन जाती.

जिस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोग सरकार से जवाब मांगते हैं, उनसे भी अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण के लिए जवाबदेह रहें. कानून के सामने बराबरी का सिद्धांत तभी सार्थक होगा, जब वह समर्थक और विरोधी, दोनों पर समान रूप से लागू हो. यदि किसी को यह भ्रम हो गया था कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने या राजनीतिक समर्थन जुटाने से उसे नियमों की परवाह नहीं करनी पड़ेगी, तो मौजूदा कार्रवाई उसके लिए चेतावनी है.

कानून की ताकत का वास्तविक प्रमाण केवल गिरफ्तारी या जेल नहीं है. उसका प्रमाण निष्पक्ष जांच, उचित कानूनी प्रक्रिया और अदालत में तथ्यों के आधार पर होने वाला फैसला है. यदि किसी पर आरोप साबित होते हैं, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए. यदि कार्रवाई गलत पाई जाती है, तो उसे भी सुधारा जाना चाहिए. सरकार का विरोध करना लोकतंत्र में अपराध नहीं है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून की अनदेखी करने का अधिकार भी किसी को नहीं है.

कानून न किसी का सगा है, न किसी से बैर रखता है. माथा देखकर तिलक लगाना उसका काम नहीं. जो लोग यह सोचते हैं कि राजनीतिक दबाव बनाकर हर नियम को दरकिनार कर देंगे, उन्हें याद रखना चाहिए कि कानून का सामना नारों या ताकत के प्रदर्शन से नहीं, तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया से होता है. लोकतंत्र में अधिकार सबके हैं, लेकिन जवाबदेही भी सबकी है.

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Articleखत्म होगा Truecaller का खेल! 1 नवंबर से बिना किसी ऐप मोबाइल स्क्रीन पर दिखेगा कॉल करने वाले का नाम | CNAP Mandatory From November 1: Mobile Screen to Display Caller’s Verified Name Without Truecaller App
Next Article ‘Karisma Kapoor ने मुझे छोड़ दिया, शादी कर ली, मेरा दिल तोड़ा’, Salman Khan ने एक्ट्रेस को लेकर दिया कैसा बयान | karisma kapoor and salman khan actor said actress left me got married broke my heart
HawkNews
  • Website

Related Posts

‘Karisma Kapoor ने मुझे छोड़ दिया, शादी कर ली, मेरा दिल तोड़ा’, Salman Khan ने एक्ट्रेस को लेकर दिया कैसा बयान | karisma kapoor and salman khan actor said actress left me got married broke my heart

October 16, 2026

खत्म होगा Truecaller का खेल! 1 नवंबर से बिना किसी ऐप मोबाइल स्क्रीन पर दिखेगा कॉल करने वाले का नाम | CNAP Mandatory From November 1: Mobile Screen to Display Caller’s Verified Name Without Truecaller App

October 16, 2026

तीनों सेनाओं के अलग-अलग बहीखाते होंगे बंद, आर्मी-नेवी और एयरफोर्स का राशन-पेट्रोल अब एक सिस्टम से

October 15, 2026

Comments are closed.

Tags
culture fashion Featured fitness gadgets Just In leisure lifestyle Opinion phones Picks Science technology Top News
Categories
  • Beauty (12)
  • Business (19)
  • Celebrities (11)
  • Education (8)
  • Entertainment (6)
  • Fashion (12)
  • Fitness (11)
  • Health (3)
  • Hindi News (13,466)
  • Jobs (14)
  • Leisure (15)
  • Lifestyle (17)
  • Opinion (13)
  • Picks (7)
  • Politics (4)
  • Sports (3)
  • Tech (13)
  • Travel (10)
Editors Picks

Review: Record Shares of Voters Turned Out for 2020 election

January 11, 2021

EU: ‘Addiction’ to Social Media Causing Conspiracy Theories

January 11, 2021

World’s Most Advanced Oil Rig Commissioned at ONGC Well

January 11, 2021

Melbourne: All Refugees Held in Hotel Detention to be Released

January 11, 2021
Latest Posts

Queen Elizabeth the Last! Monarchy Faces Fresh Demand to be Axed

January 20, 2021

Pico 4 Review: Should You Actually Buy One Instead Of Quest 2?

January 15, 2021

A Review of the Venus Optics Argus 18mm f/0.95 MFT APO Lens

January 15, 2021

Subscribe to News

Get the latest sports news from NewsSite about world, sports and politics.

Advertisement
Demo
Demo
Top Posts

Sajjan Kumar Caste: चाय बेचने वाले सज्जन की जाति क्या? 3 बार कांग्रेस MP रहे, कितनी दौलत परिवार के लिए छोड़ी? | Sajjan Kumar Caste: Tea Seller 3 Time Congress MP Dies-Know Family, Net Worth News Hindi

August 20, 2026114 Views

PM Modi के परमात्मा और महात्मा गांधी वाले बयान पर ऐसा क्या बोले राहुल गांधी? सदन में बजने लगी तालियां

July 1, 202412 Views

Katra Srinagar Mata Vashno Devi Vande Bharat Indian Railways New Train Rote

April 14, 202515 Views
Stay In Touch
  • Facebook
  • YouTube
  • TikTok
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews

Queen Elizabeth the Last! Monarchy Faces Fresh Demand to be Axed

By HawkNewsJanuary 20, 2021

Pico 4 Review: Should You Actually Buy One Instead Of Quest 2?

By HawkNewsJanuary 15, 2021

A Review of the Venus Optics Argus 18mm f/0.95 MFT APO Lens

By HawkNewsJanuary 15, 2021

Subscribe to Updates

Get the latest tech news from FooBar about tech, design and biz.

Demo
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • Pinterest
Our Picks

‘Karisma Kapoor ने मुझे छोड़ दिया, शादी कर ली, मेरा दिल तोड़ा’, Salman Khan ने एक्ट्रेस को लेकर दिया कैसा बयान | karisma kapoor and salman khan actor said actress left me got married broke my heart

October 16, 2026

कानून माथा देखकर तिलक नहीं लगाता, न किसी का सगा, न किसी से बैर!

October 16, 2026

खत्म होगा Truecaller का खेल! 1 नवंबर से बिना किसी ऐप मोबाइल स्क्रीन पर दिखेगा कॉल करने वाले का नाम | CNAP Mandatory From November 1: Mobile Screen to Display Caller’s Verified Name Without Truecaller App

October 16, 2026

तीनों सेनाओं के अलग-अलग बहीखाते होंगे बंद, आर्मी-नेवी और एयरफोर्स का राशन-पेट्रोल अब एक सिस्टम से

October 15, 2026
Don't Miss

Stay updated with our comprehensive news portal, delivering timely insights on global events, politics, tech, culture, and more. Your reliable source for informed perspectives.

We're social. Connect with us:

Facebook Twitter Instagram Pinterest YouTube

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

About

Your source for the lifestyle news. This demo is crafted specifically to exhibit the use of the theme as a lifestyle site. Visit our main page for more demos.

We're social, connect with us:

Facebook Twitter Pinterest LinkedIn VKontakte
From Flickr
Ascend
terns
casual
riders on the storm
chairman
mood
monument
liquid cancer
blue
basement
ditch
stars
Popular Posts

‘Karisma Kapoor ने मुझे छोड़ दिया, शादी कर ली, मेरा दिल तोड़ा’, Salman Khan ने एक्ट्रेस को लेकर दिया कैसा बयान | karisma kapoor and salman khan actor said actress left me got married broke my heart

October 16, 2026

कानून माथा देखकर तिलक नहीं लगाता, न किसी का सगा, न किसी से बैर!

October 16, 2026

खत्म होगा Truecaller का खेल! 1 नवंबर से बिना किसी ऐप मोबाइल स्क्रीन पर दिखेगा कॉल करने वाले का नाम | CNAP Mandatory From November 1: Mobile Screen to Display Caller’s Verified Name Without Truecaller App

October 16, 2026
Copyright © 2017. Designed by Webdadz.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.