पिछले एक हफ्ते से जो इलेक्शन कमीशन को लेकर जो बवाल चल रहा है, उसमें पूरे देश ने देख लिया कि इस मुद्दे पर देश की जनता ना इंडी वालों के साथ है, ना कॉकरोच पार्टी वालों के साथ है. क्योंकि आप देखिए कि पांच छह बार राहुल गांधी सड़क पर उतर चुके हैं. दो दिन कॉकरोच पार्टी वाले हाथ पैर मार चुके हैं. लेकिन ये लोग उस तरह का माहौल नहीं बना पाए, जैसा ये सोच रहे थे. उल्टे ये अपने ही खेल में ऐसा फंस गए हैं कि ये जंतर मंतर पार्ट 2 की प्लानिंग करके उतरे थे, लेकिन गेम ऐसा पलट गया कि जंतर मंतर पर कोई प्रोटेस्ट ही कर पाएगा. इनकी जंतर मंतर वाली दुकान बंद हो गई. यानी प्रोटेस्ट करना है तो रामलीला मैदान जाओ, दिल्ली के आउटर में जाओ, अब ये कह नहीं पाओगे कि जंतर मंतर चलो, क्योंकि जंतर मंतर पर जाने और फिर रीलबाजी वाला बवाल करने की वजह ही खत्म हो गई.
पीएम मोदी और अमित शाह ने अब हमेशा के लिए इस बात का इंतजाम कर दिया कि अब कोई जंतर मंतर की आड़ में संसद और आसपास के इलाके में बवाल ना कर पाए. आज इसके बारे में आपको डिटेल में बताएंगे कि कॉकरोच पार्टी वाले कैसे जंतर मंतर पर फैसले के बाद पैर पटक रहे हैं, उधर राहुल गांधी ने ऐसा ब्लंडर कर दिया कि कॉकरोच पार्टी वालों को भी साथ में ले डूबे. क्योंकि राहुल गांधी ने खुद ही सारा मामला सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया है. जो राहुल गांधी कहते थे कि कोर्ट जाना उनका काम नहीं है. वो अपने ही खेल में ऐसा फंस गए कि मजबूरी में सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा.
राहुल गांधी का प्लान हुआ फेल
राहुल गांधी का तो प्लान ये था कि वो राष्ट्रपति की तरह सुप्रीम कोर्ट को भी अपनी पॉलिटिक्स में घसीट लें, क्योंकि अपनी पॉलिटिक्स के लिए चीफ जस्टिस से मिलने का समय मांगना, ऐसा कभी सुना नहीं गया. सब जानते थे कि सीजेआई कभी मिलने के लिए तैयार नहीं होंगे, खुद कांग्रेस के लोग ये बात कह रहे हैं कि कोर्ट को पॉलिटिक्स में घसीटने की क्या जरूरत है, अगर कुछ करना है तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाओ. पहले तो राहुल गांधी माने नहीं, लेकिन आखिरकार वही करना पड़ा. लेकिन सवाल तो ये है कि जब सुप्रीम कोर्ट में चले ही गए तो फिर सड़क पर बवाल करने का मतलब क्या है. सुप्रीम कोर्ट जो फैसला सुनाएगा उसे सबको मानना पड़ेगा. ऐसे में ना अब राहुल गांधी की सड़क वाली पॉलिटिक्स का मतलब रह जाएगा, ना कॉकरोच पार्टी वालों के बवाल का मतलब रह जाएगा. लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि इन्हें अब यही लग रहा है कि सड़क पर बवाल करके ही मोदी को हटाएंगे. आप देखिए कि आज इसी अराजक पॉलिटिक्स को लेकर कई खुलासे और दावे हुए हैं.
मोदी विरोधियों के लिए शॉकिंग 2-3 दिन
मोदी विरोधियों के लिए पिछले दो तीन दिन बहुत शॉकिंग रहे हैं. क्योंकि इन्होंने जो सोच कर रखा था, मामला बिल्कुल उसके उलट हो गया. कहां ये सोच रहे थे कि जंतर मंतर जाकर बवाल काट देंगे. पूरा देश आ जाएगा. वो नहीं हुआ. पब्लिक ने साथ नहीं दिया. उल्टे रोज रोज का इनका तमाशा देखकर पब्लिक और गुस्से में आ गई. क्योंकि सबको दिख रहा है कि सड़कों पर आकर बवाल करना, वो भी उस मुद्दे पर जिसका एजेंडा पहले ही फेल हो चुका है. और जो सुप्रीम कोर्ट में ऑलरेडी है, जहां सुनवाई हो रही है. उस मुद्दे पर इतना बवाल करने का क्या तुक है. जो कॉकरोच पार्टी इसमें कूद पड़ी उससे लोग पूछ रहे हैं कि क्या सारे स्कूल ठीक हो गए, क्या एजुकेशन सिस्टम ठीक हो गया. इन्होंने तो खुद को ही एक्सपोज कर दिया कि ये लोग मोदी के खिलाफ एजेंडा चलाने आए थे. लोग ये समझ गए कि ये उन हताश लोगों का इकोसिस्टम है, जो नरेंद्र मोदी को चुनाव में नहीं हरा पाता इसलिए अब सड़कों पर बवाल करके उन्हें हटाना चाहता है. दो दिन से इनको तगड़े झटके मिले हैं आज तो इनकी दुकान ही बंद करवाने वाला काम हो गया.
CJP को लगा बड़ा झटका
कॉकरोच पार्टी को आज सबसे बड़ा झटका लग गया. कॉकरोच पार्टी के नेता आज दिल्ली पुलिस के पास प्रदर्शन की परमिशन लेने गए थे. टाइम और तारीख पूछने गए थे कि वो कब से जंतर मंतर पर धरना शुरू कर सकते हैं, ये लोग इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे रहे थे, लेकिन आज गृहमंत्रालय ने जंतर मंतर पर एजेंडे वाली दुकान को ही ताला लगा दिया.
अब जंतर मंतर पर ना कॉकरोच पार्टी वाले ना राहुल गांधी प्रदर्शन कर पाएंगे, क्योंकि गृह मंत्रालय ने निर्धारित प्रोटेस्ट साइट से जंतर मंतर का नाम हटा दिया है. यानी अब से जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन नहीं होंगे. इसके साथ ही दिल्ली में धरना प्रदर्शन के लिए तीन जगह तय की गई हैं. इसमें ये तीन स्थान हैं- 1 रामलीला मैदान, 2- बुराडी मैदान और 3- CBD ग्राउंड है. गृह मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई थी ताकी जिन प्रदर्शन करना है उन्हें उचित स्थान मिल सके. कमेटी की सिफारिश पर जंतर-मंतर को अब प्रोटेस्ट साइट से डिनोटिफाई कर दिया गया है.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर क्यों लगी रोक
जंतर-मंतर के आसपास संसद भवन के अलावा कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर और संस्थान हैं, आस-पास कई सांसदों का भी आवास है. इस वजह से ये प्रोटेस्ट साइट सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जाती है. जगह कम होने की वजह से आम लोगों को भी परेशानी होती है. प्रोटेस्टर्स को भी परेशानी होती है सुप्रीम कोर्ट भी ये कह चुका है कि प्रदर्शनकारियों को दूसरी जगह देने पर विचार करना चाहिए क्योंकि यहां उनके लिए बुनियादी सुविधाएं और स्पेस नहीं है
यानी अब कॉकरोच पार्टी के पास तीन ही जगह बची है प्रदर्शन के लिए. इसमें रामलीला मैदान है. जो संसद के पास ही है, लेकिन बाकी दोनों जगह संसद से दूर हैं. अब जब जंतर मंतर प्रोटेस्ट की जगह ही नहीं बची तो ये लोग किस मुंह से कहेंगे कि जंतर मंतर चलो यानी जंतर मंतर पार्ट-2 करने की इनकी पूरी प्लानिंग एक झटके में चौपट हो गई. जंतर मंतर पर इन्हें अगर बवाल करने दिया जाता तो वहां नेताओं का जमावड़ा भी लगता, वहां पर इन्हें फुटेज भी मिलती, वहां इनकी रीलबाजी भी चलती. लेकिन अब जब ये सब नहीं होगा तो ये लोग पैर पटक रहे हैं. जंतर मंतर पर प्रदर्शन की दुकान अब नहीं लगेगी.
CJP में मची कैसी खलबली?
इस खबर को सुनते ही कॉकरोच पार्टी में खलबली मच गई. जैसे ये खबर आई कॉकरोच पार्टी ने हल्ला काटना शुरू कर दिया है. अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार लोकतंत्र को भी डिनोटिफाई कर देगी. पूरा देश अब जंतर मंतर बनेगा. सौरभ दास कहने लगे कि गृह मंत्रालय कौन होता है ये फैसला लेने वाला. सौरभ दास ने कहा, ‘गृह मंत्रालय कौन होती है हम लोगों से वो जगह छीनने वाली. लोगों से आपने पूछा, स्टेकहोल्डर्स से आपने पूछा? तमाम संगठन हैं जो जंतर-मंतर हमेशा आते हैं, रोज वहां पर प्रदर्शन होते हैं. क्या उन संगठनों से आपने बात-चीत की, उनसे पूछा कि हमारा ऐसा विचार है, आप लोगों को क्या लगता है? ये देश लोगों से चलता है.’
ये लोग जंतर मंतर पर फैसले को लेकर ये माहौल बना रहे हैं कि उनके डर की वजह से सरकार ने ये फैसला किया है. लेकिन आप देखिए कि जंतर मंतर को प्रोटेस्ट साइट ना बनाने की बात तो बहुत पहले से चल रही है. दूसरी बात ये है कि ये लोग कह रहे थे कि जंतर मंतर पर पूरा देश आ जाएगा लेकिन वहां तो लिमिटेड लोग ही आ सकते हैं.
आप देखिए कि जनवरी 2003 को जंतर-मंतर पर अधिकतम 5,000 प्रदर्शनकारियों की सीमा तय हुई थी. उस वक्त दिल्ली पुलिस ने Standing Order 309 जारी किया था. जंतर-मंतर पर अधिकतम 5,000 लोगों की व्यवस्था और उससे बड़े प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान की व्यवस्था की गई. लेकिन लगातार प्रोटेस्ट के वजह से ,जंतर-मंतर के आसपास रहने वाले लोगों की परेशानियां भी बढ़ने लगीं. इलाके के लोगों ने शिकायत की… धरनों की वजह से लगातार शोर होता है. लाउडस्पीकर बजते हैं, सड़कों पर कचरा फैलता है और आने-जाने में परेशानी होती है.मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT पहुंचा, 5 अक्टूबर 2017 को NGT ने बड़ा फैसला सुनाया. NGT ने जंतर-मंतर रोड पर धरना-प्रदर्शन, भाषण और लाउडस्पीकर जैसी गतिविधियां रोकने का आदेश दिया. लेकिन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. 2018 में सुप्रीम कोर्ट के सामने यह बात आई थी कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर 5,000 प्रदर्शनकारियों की सीमा तय कर रखी थी. लेकिन NGT ने पाया था कि पुलिस और NDMC इस नियम को लागू नहीं कर रहे थे.
यानी जंतर मंतर को निर्धारित प्रोटेस्ट साइट ना बनाने को लेकर पहले से ही बातें चल रही थी. दूसरी बात पिछली बार जिस तरह से जंतर मंतर से भीड़ सीधे संसद भवन तक पहुंच गई थी. वो भी सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा हो गया था. जंतर मंतर पर लंबे वक्त तक किसी बड़े प्रदर्शन की परमिशन इसलिए भी नहीं दी जा सकती, क्योंकि लोगों का कामकाज प्रभावित होगा, लोग परेशान होते, काम धंधे पर असर पड़ता है. हाल ही में Chamber of Trade and Industry ने पीएम मोदी को लेटर लिखकर नवरात्री से दिल्ली तक दिल्ली में प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी. दिल्ली के कारोबारी तो यही चाहते हैं कि जो भी धरना प्रदर्शन हो वो दिल्ली के बाहर हो.
लुटियंस जोन से बाहर हों विरोध प्रदर्शन
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा भी यही मांग कर रहे हैं कि लुटियंस दिल्ली में ये सब ना हो इससे कारोबार को नुकसान होता है. संजीव मेहरा ने कहा, ‘ये जो प्रदर्शन हैं, दिल्ली में बंद होने चाहिए. दिल्ली के खासकर लुटियंस जोन से बाहर जाने चाहिए. इसी वजह से हम चाहते हैं कि इस प्रदर्शन को बाहर ले जाया जाए, दिल्ली से. हम लोग अब तो त्राहि-त्राहि हो गए. वरना हमें भी सड़कों पर अपनी लेबर को लेकर उतरना पड़ेगा. इनके खिलाफ बोलना पड़ेगा. और आप ये समझ लीजिए कि जो इस चीज को बढ़ावा दे रहे हैं, मैं आपको वचन दे रहा हूं कि हम लोग जो हैं, उन पार्टियों का कभी सहयोग न तो लेंगे, न उनको सहयोग देंगे.’
लगातार विरोध प्रदर्शन से दिल्ली की पब्लिक भी हैरान परेशान है, क्य़ोंकि प्रोटेस्ट की वजह से दिल्ली में कारोबारियों का नुकसान हो रहा है. इन कारोबारी में बीजेपी के सपोर्टर भी हैं और कांग्रेस के सपोर्टर भी हैं. नुकसान सभी का हो रहा है. Chamber of Trade and Industry और New Delhi Traders Association के मुताबिक जंतर-मंतर, खान मार्केट, जनपथ सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके हैं. बिजनेस को होने वाले नुकसान की बात करें तो दिल्ली में अब तक करीब 2 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.
मार्च में क्यों भड़क गए राहुल?
जंतर मंतर बंद होने से कॉकरोच पार्टी को तगड़ा झटका लग गया, रही सही कसर राहुल गांधी ने निकाल दी. राहुल गांधी भी देख रहे थे कि दो दिन से कॉकरोच पार्टी की बात हो रही है. शनिवार और रविवार को सब कॉकरोच पार्टी का ही नाम ले रहे थे. अब सारी चर्चा कॉकरोच पार्टी की होने लगेगी तो राहुल गांधी का क्या होगा. इसलिए आज राहुल गांधी फिर सड़क पर उतर गए. राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के नेताओं ने बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया और अपने लिए माहौल बनाने की कोशिश की. इस मार्च में कई बार ऐसे हालात भी बन गए कि राहुल गांधी भड़क भी गए, धक्का मुक्की भी करते दिखे.
लेकिन आप देखिए कि जो राहुल गांधी ये कहते थे कि कोर्ट जाना उनका काम नहीं है, आज वो सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. राहुल गांधी समेत विपक्ष के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है. याचिका में चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को पक्षकार बना गया है. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, अखिलेश यादव, संजय राउत समेत 11 नेताओं ने मिलकर अर्जी दी है. सु्प्रीम कोर्ट का फाइलिंग काउंटर बंद होने से ठीक पहले ये याचिका दाखिल की गई. यानी राहुल गांधी खुद ही इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर चले गए. अब सुप्रीम कोर्ट से इस पर फैसला हो जाएगा. लेकिन सवाल ये भी उठेंगे कि जब सुप्रीम कोर्ट में खुद चले गए तो फिर सड़कों पर बवाल करने की जरूरत क्या है. यानी इन्होंने खुद ही ये मान लिया कि ये सड़कों पर जो बवाल कर रहे हैं वो गलत है
राहुल ने CJP वालों को डुबोया!
राहुल गांधी ने आज जो किया, उससे तो कॉकरोच पार्टी वालों को भी डुबा दिया क्योंकि कॉकरोच पार्टी वाले तो बिना वजह के वोट चोरी के मुद्दे पर कूदी. अब जब मामला सुप्रीम कोर्ट में खुद ये लेकर गए तो प्रदर्शन करने की कोई वजह नहीं बची. राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट तो पहुंच गए हैं लेकिन सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डालने से होगा क्या, क्योंकि कोर्ट तो वोट चोरी के सबूत मांगेगा. लेकिन राहुल गांधी तो खुद ज्ञानेश कुमार से सबूत मांग रहे हैं कि आप बताइए कि आपने वोट चोरी नहीं की है, यानी पहले अपने हिसाब से आरोप लगा दो, फिर जिस पर आरोप लगा रहे हो उसी से सबूत मांगो लो… गजब ही खेल है.
अगर आपके पास पक्के सबूत हैं तो ये सबूत आप राष्ट्रपति को क्यों नहीं देकर आए, राहुल गांधी तो खुद दावा कर रहे थे कि राष्ट्रपति ने सबूत मांगे हैं, तो वो सबूत वहां क्यों नहीं दिए, कह रहे हैं कि बाद में देंगे तो फिर बिना सबूत के मिलने ही क्यों गए थे आप. राहुल गांधी की बातों से तो ऐसा लग रहा है कि उनके पास कोई ठोस सबूत है नहीं… इसलिए गोल मोल घूमा रहे हैं, आज कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार सबूत दें…जबकि पहले कह रहे थे कि वोट चोरी हो रही है हम देश को दिखा देंगे.
‘वोट चोरी नहीं हुई इसका सबूत दो’
राहुल ने आज कहा, ‘विपक्ष एक सवाल पूछ रहा है, हमें साबित करके दिखाइए कि आपने चुनाव में बेईमानी नहीं की है. हमें साबित करके दिखाइए कि आपने चुनाव में बेईमानी नहीं की है. हम भारत की राष्ट्रपति के पास गए, भारत की राष्ट्रपति ने खुद कहा, मुझे सबूत दीजिए. हम सबूत लेकर जाएंगे.’
यही राहुल ने पहले कहा था कि चोरी से जीते हैं हम बता देंगे. उन्होंने कहा, ‘हिंदुस्तान के Gen Z जो हैं और युवा हैं, उनको हम बताएंगे कि नरेंद्र मोदी चुनाव चोरी करके प्रधानमंत्री बने है. बीजेपी चुनाव चोरी करती है. साफ साफ बता देंगे, कोई शक नहीं होगा.’
राहुल गांधी जितना भी गोल गोल घूमा लें लेकिन कोर्ट में ये सब बातें नहीं चलती, कोर्ट में सबूत चलते हैं. शायद इसलिए CJI सूर्यकांत ने भी राहुल गांधी को यही समझाया कि वन टू वन मुलाकात से कुछ नहीं होगा. कोर्ट में अर्जी लगाइए. दरअसल, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CJI सूर्यकांत से मुलाकात के लिए टाइम मांगा था. ताकि वे मुख्य चुनाव आयुक्त और इलेक्शन कमीशन के मामले को उठा सकें. लेकिन चीफ जस्टिस ने मिलने से इनकार कर दिया है. उन्होंने राहुल-खरगे को एक पत्र लिखा, जिसे कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है. CJI ने यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि इस तरह के मुद्दे पहले ही SC में विचाराधीन हैं. लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना, शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत यानी Separation of Powers का पूरी तरह से उल्लंघन होगा. यह न्यायिक नैतिकता और मर्यादा के खिलाफ होगा. CJI ने कहा कि पत्र में उठाए गए मुद्दों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं है. CJI ने विपक्षी नेताओं को सलाह दी है कि वे ज्ञापन सौंपने के बजाय कोर्ट में अर्जी दें. CJI ने भरोसा दिया कि उनकी अर्जी पर जल्द से जल्द से सुनवाई होगी.
राहुल गांधी और कांग्रेस की समझ पर ही सवाल है, क्योंकि आप देखिए कि कौन चीफ जस्टिस होगा जो इस तरह से पॉलिटिकल मामले में किसी नेता को मिलने का टाइम देगा, वो भी उस मामले में जो पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में है, जिसमें पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. लेकिन ऐसा लगता है कि राहुल गांधी ना किसी की सुनते हैं, ना किसी की मानते हैं. आप देखिए कि खुद कांग्रेस में जो बड़े वकील हैं, वो कह रहे हैं कि ये क्या चल रहा है. कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट और CJI को राजनीति में घसीटने को गलत बताया है. विवेक तन्खा ने कहा कि CJI को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए.
विवेक तनखा ने कहा कि हम जो राहत की मांग कर रहे हैं वो याचिका लगाने से ही मिलेगी. सीजेआई से मुलाकात करने से राहत नहीं मिलेगी. उन्होंने कहा, ‘CJI से, हम भी कानून के अधिकारी हैं और हर कानूनी अधिकारी CJI की बात से सहमति बनाता है. और CJI को राजनीति में दखल देने की न तो कोई आवश्यकता है, न किसी को करना चाहिए. अगर कोई CJI से मिलना चाह रहे थे, तो CJI ने उनसे कहा कि नहीं, मैं मिल नहीं सकता हूं. आप पिटीशन लगा सकते हैं और आपकी पिटीशन की मैं सुनवाई करूंगा. मेरे विचार से ये सही है क्योंकि राहत तो हमें पिटीशन से मिलेगी, मिलने से थोड़ी मिलेगी. तो CJI ने बताया है कि कानूनी रास्ता क्या है. कि आप पिटीशन लगाओ, उस पर हम सुनवाई करेंगे, दोनों पक्षों को सुनेंगे. और जो उचित होगा, वो हम राह खोलेंगे आपके लिए.ट
विवेक तन्खा जैसी बातें अब कम ही कांग्रेस नेता करते हैं. राहुल गांधी की कांग्रेस में नेता और कार्यकर्ता भी उनकी ही तरह हैं. भी तक राहुल गांधी चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं. लेकिन अब कांग्रेस के निशाने पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत आ गए हैं. केरलम कांग्रेस के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर चीफ जस्टिस का इस्तीफा मांग लिया है. दरअसल दिल्ली प्रोटेस्ट के मुद्दे पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की है कि कानून व्यवस्था का मुद्दा हमारे Domain में नहीं है इस पर केरलम कांग्रेस ने पोस्ट किया है कि ‘डियर सूर्यकांत, अगर कानून व्यवस्था का मुद्दा आपके Domain में नहीं है तो इस्तीफा दे दीजिए. हम आपका रिप्लेसमेंट खोज लेंगे जो ये सब हैंडल कर सकता है.
हालांकि जब इस पोस्ट पर विवाद बढ़ा तो इसे डिलीट कर दिया गया. इसी तरह TMC नेता महुआ मोइत्रा ने भी CJI को टारगेट करने वाला पोस्ट डाला… महुआ मोइत्रा ने लिखा कि Surely CJI Can’t..So We Will…यानी CJI से नहीं होगा, हम ही करेंगे…
सोचिए ये लोग किस तरह की भाषा चीफ जस्टिस के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. और कैसे सुप्रीम कोर्ट पर प्रेशर डालने का प्रयास कर रहे हैं. उधर राहुल गांधी ने आज फिर ये थ्योरी गढ़ी कि उन्हें तो सरकार के अंदर से सीक्रेट जानकारी मिल रही है, सीक्रेट टिप मिल रही है है, उन्होंने News18 इंडिया के संवाददाता अरुण सिंह के सवाल पर ये तक दावा किया कि ज्ञानेश कुमार भी उन्हें मैसेज करते हैं.
राहुल गांधी ने कहा, ‘मोदी जी, मैं आपको बताता हूं, आपकी सरकार के 200 अफसर हमारे संपर्क में हैं, हमें जानकारी दे रहे हैं. ED के अंदर, CBI के अंदर, फॉरेन मिनिस्ट्री के अंदर, सारे के सारे हमें जानकारी दे रहे हैं. सर, जो करना है, आपको करो. सच्चाई हमारे साथ है.’
शिव की बारात vs हुड़दंगियों की जमात
राहुल गांधी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिव की बारात का भी जिक्र किया.. ये कहा कि ये प्रोटेस्ट तो शिव की बारात है…इसमें कोई भी शामिल हो सकता है…इस पर बीजेपी ने कहा कि ये शिव की बारात नहीं…हुड़दंगियों की जमात है
राहुल गांधी ने कहा, ‘ये तांडव है, ये शिव का डांस है. इसमें कोई तैयारी नहीं होती. ये डांस चल रहा है, ये शिवजी का डांस चल रहा है. इसमें शिव की बारात में कोई भी आ सकता है. मैंने बोला, देखिए ये शिव की बारात है. इसमें किसी को भी आना है, आ सकता है. कोई भी जीव आ सकता है, हम रोकेंगे नहीं. बस दिखाना है. कोई भी आ जाए, फर्क नहीं पड़ता. कुत्ता आ जाए, बिल्ली आ जाए, बंदर आ जाए, जो भी आना चाहे आ जाए, कोई फर्क नहीं पड़ता. हिंदुस्तान ऐसे विरोध करता है. हिंदुस्तान तैयारी के साथ विरोध नहीं करता, हिंदुस्तान दिल के साथ विरोध करता है. और विरोध जारी है, जारी रहेगा.’
आप देखिए कि दिल्ली में जो SIR हो रहा है, उसे लेकर भी इंडी गठबंधन ने खूब माहौल बनाया था कि दिल्ली में भी चुनाव आयोग ने लाखों लोगों के नाम काट दिए. जबकि आज ही चुनाव आयोग ने ये जानकारी दी है कि वोटर लिस्ट में 33 लाख एंट्री में गड़बड़ी या मैपिंग की समस्या मिली थी. इनमें से 20 लाख मामलों का समाधान हो चुका है. बाकी मामलों पर अभी काम होना है.
एक और गजब की बात है, राहुल गांधी आज वोट चोरी वोट चोरी चिल्ला रहे हैं. लेकिन राहुल गांधी को ये समझ नहीं आ रहा है कि बीजेपी तो 2014 में केंद्र की सत्ता में आई है. 2014 के बाद से ही देश के कई राज्यों में बीजेपी का सरकारें बनी हैं. क्या उस से पहले भी वोट चोरी हो रही थी. आप देखिए
सत्ता से कांग्रेस की दूरी
- तमिलनाडु – 59 साल
- पश्चिम बंगाल- 49 साल
- सिक्किम- 42 साल
- उत्तर प्रदेश- 37 साल
- बिहार- 36 साल
- त्रिपुरा- 33 साल
- गुजरात- 31 साल
- ओडिशा- 26 साल
- मध्य प्रदेश- 23 साल
देश में 18 राज्य ऐसे हैं जहां अपने दम पर दस दस बीस बीस साल से कांग्रेस की सरकार नहीं बनी हैं. क्या इन सब राज्यों में भी वोट चोरी से कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखा गया था. आप देखिए जिस SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी ने वोट चोरी का नैरेटिव खड़ा किया है. आज उसकी भी पोल खुल गई है. पंजाब में आज ही SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई है, जिसके मुताबिक फाइनल वोटर लिस्ट से 13 लाख नाम कटे हैं. अब पंजाब में कुल मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 1 लाख हो गई है. कांग्रेस, AAP और अकाली दल ने SIR प्रक्रिया पर संतुष्टि जाहिर की है. तीनों ही दलों को चुनाव आयोग ने SIR के बाद वोटर लिस्ट सौंपी है. कांग्रेस, AAP, अकाली दल ने पूरी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं पाई है. यानी पंजाब के SIR से किसी को कोई दिक्कत अभी तक नहीं है. ना ही कोई गड़बड़ी मिली है.
फिर भी प्रोटेस्ट करना है, नारा लगाना है कि लोकतंत्र खतरे में है, संविधान खतरे में हैं. आप देखिए वोट चोरी के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने भी प्रदर्शन किया. आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं ने पोस्टर बैनर के साथ प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस ने संजय सिंह को डीटेन भी कर लिया. चुनाव आयोग पर हमले और ज्ञानेश कुमार को घेर रहे कांग्रेस के खिलाफ भी अब प्रोटेस्ट शुरू हो चुका है.

