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CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने साफ कर दिया है कि उन्होंने प्रदर्शन न करने का कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है. सोशल मीडिया पर आ रही खबरों को दीपके ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है और वे जल्द ही फिर से सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे.
सीजेपी की तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया. (PTI)
कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक एक्स पोस्ट से साफ कर दिया कि उन्हें फिर से सड़कों पर प्रदर्शन करने से कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने लिखा कि “हमने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है जो हमें प्रदर्शन करने से रोके, हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे.”दरअसल, कल तक सोशल मीडिया के गलियारों में यह जोर-शोर से कहा जा रहा था कि सीजेपी के संस्थापकों समेत आशुतोष रांका और सौरव दास ने पुलिस और कोर्ट के आगे घुटने टेकते हुए ऐसा बॉन्ड साइन कर दिया है कि वे भविष्य में कभी विरोध-प्रदर्शन नहीं करेंगे. लेकिन अभिजीत दीपके ने अपने इस तीखे और बेबाक बयान से सारे दावों की धज्जियां उड़ाते हुए सब दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया. उनके इस रुख से साफ हो गया है कि वे किसी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं. सीजेपी का यह पलटवार साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में राजधानी की सड़कों पर एक बार फिर से भारी राजनीतिक संग्राम देखने को मिलेगा. उधर, सीजेपी के आशुतोष रांका और सौरव दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीफ इलेक्शन कमिशनर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी मुहीम में विपक्ष का साथ मांगा है.
1 साल तक शांति बनाए रखने का ₹50,000 का श्योरिटी बॉन्ड
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया था कि CJP नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया था. SEM कोर्ट ने तीनों नेताओं को 50,000 के जमानती व श्योरिटी बॉन्ड पर इस शर्त के साथ रिहा किया है कि वे अगले 1 साल तक क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखेंगे और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे.
CJP नेता मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाकर पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उनके प्लेन लैंड करते ही उन्हें हिरासत में ले लिया था. कानून के तहत BNSS की धारा 170 पुलिस को किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) को रोकने के लिए बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार देती है, वहीं धारा 126 के तहत शांति भंग करने की आशंका में 1 साल तक का बॉन्ड भरवाया जाता है.
पुलिस के दावे बनाम CJP के तेवर
दिल्ली पुलिस के इस आधिकारिक बयान के सामने आते ही सियासी हलकों में यह माना जाने लगा था कि कानूनी बंदिशों और श्योरिटी बॉन्ड की वजह से CJP नेता अब सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे. लेकिन CJP के तेवरों और सोशल मीडिया पर दिए बयानों ने साफ कर दिया है कि पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद उनका विरोध थमने वाला नहीं है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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