वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने सोमवार को बेहद अहम टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि अगर किसी पात्र मतदाता का नाम SIR के दौरान तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं आता है, तो वह मुश्किल स्थिति में फंस सकता है. खासकर तब, जब चुनाव आयोग पुरानी मतदाता सूची को आधार बनाकर उसकी शिकायत पर विचार नहीं करता.
अदालत ने साफ कहा कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को सिर्फ इसलिए मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है. अगर कोई व्यक्ति पात्र मतदाता है, तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए.
‘आप उसकी बात नहीं सुनने से इनकार नहीं कर सकते’
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी. यह याचिका गोवा के परेश सालगांवकर और उनके परिवार के सदस्यों ने दायर की है. SIR के दौरान उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए थे. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगर किसी मतदाता को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस मिलता है और वह बताता है कि उसने अपना घर बदल लिया है तथा अब वह फॉर्म-8 जमा करना चाहता है, तो आयोग उसकी बात सुनने से इनकार नहीं कर सकता.
अदालत ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि व्यवस्था इसकी इजाजत नहीं देती या व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, इसलिए उसकी बात नहीं सुनी जाएगी.
‘नाम हटाने का मतलब मौजूदा सूची से भी बाहर करना’
पीठ ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 21 में जिस मतदाता सूची का जिक्र है, वह मौजूदा सूची है, सिर्फ ड्राफ्ट सूची नहीं. अदालत ने कहा कि पूरी प्रक्रिया को मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर भी देखा जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो मतदाता के पास अपनी बात रखने का कोई प्रभावी रास्ता नहीं बचेगा.
पीठ ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो इसका असर यह हो सकता है कि वह व्यक्ति मौजूदा मतदाता सूची से भी प्रभावी रूप से बाहर हो जाए.
पात्र मतदाता को बाहर नहीं किया जाना चाहिए
अदालत ने SIR से जुड़े निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि बूथ स्तर के अधिकारियों यानी BLO की जिम्मेदारियों के अलावा भी यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए.
पीठ ने कहा कि SIR के आदेश में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम शामिल हों.
इसके साथ ही अदालत ने सवाल उठाया कि अगर इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पात्र नागरिक ही मतदाता सूची से बाहर हो जाते हैं, तो इस समस्या का समाधान कैसे किया जाएगा.
EC ने फॉर्म-8 का दिया हवाला
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील गौरीश अग्नि ने अदालत को बताया कि आयोग के दिशानिर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि पुरानी मतदाता सूची अभी भी लागू है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चला जाता है, तो उसके पास फॉर्म-8 के जरिए अपना नाम नए क्षेत्र की मतदाता सूची में ट्रांसफर कराने का विकल्प मौजूद है. इसके साथ वह अपने वोटर आईडी यानी EPIC में भी जरूरी बदलाव करा सकता है.
हालांकि, अदालत ने सुनवाई के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया कि प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न रह जाए.
मंगलवार को भी जारी रहेगी सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने कहा कि SIR से जुड़े सभी निर्देशों को एक साथ पढ़ने की जरूरत है. अदालत ने कहा कि इन निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति मतदाता बनने के लिए पात्र है, उसे सूची से बाहर न किया जाए.
मामले में दलीलें अभी पूरी नहीं हुई हैं. हाईकोर्ट मंगलवार को भी इस मामले की सुनवाई जारी रखेगा.

