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Housing Price : दिल्ली एनसीआर सहित देश के 7 शहरों में आवासीय संपत्तियों में तगड़ा उछाल आया है. पिछले साल की दूसरी तिमाही के मुकाबले देखें तो अब तक 7 फीसदी का औसतन उछाल दिख रहा है. इसमें भी सबसे ज्यादा 12 फीसदी का उछाल दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी मार्केट में दिख रहा है. यह उछाल खासतौर से प्रॉपर्टी की लागत बढ़ने की वजह से आया है.
देश के 7 प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी के दाम औसतन 7 फीसदी बढ़ गए हैं.
नई दिल्ली. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के अलावा राजधानी दिल्ली में भी घर का सपना पूरा करना और मुश्किल हो गया है. रियल एस्टेट क्षेत्र की सलाहकार कंपनी एनारॉक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के आवासीय बाजार में चालू वित्तवर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान मकानों की औसत कीमतें पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 12 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ गई हैं.
एनारॉक ने बताया है कि निर्माण की बढ़ती लागत में बढ़ोतरी और बिल्डर के लक्जरी प्रोजेक्ट की ओर बढ़ते कदम कीमतों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं. एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान दिल्ली-एनसीआर में आवासीय संपत्तियों की औसत कीमत बढ़कर 9,980 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है. पिछले साल की समान तिमाही में यह कीमत 8,900 रुपये प्रति वर्ग फुट थी. इसका मतलब है कि सालभर के भीतर इन कीमतों में 1,000 रुपये प्रति वर्गफुट से भी ज्यादा उछाल आया है.
7 प्रमुख शहरों में भी बढ़ गए दाम
देश के शीर्ष 7 शहरों में आवासीय संपत्तियों की औसत कीमत सामूहिक रूप से सालाना आधार पर 7 फीसदी वृद्धि के साथ 9,714 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई, जो पिछले वित्तवर्ष की समान तिमाही में 9,105 रुपये प्रति वर्ग फुट थी. शीर्ष 7 शहरों में दिल्ली-एनसीआर में औसत कीमत में सालाना आधार पर सबसे अधिक 12 फीसदी की दर से बढ़ी है. इसके अलावा अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों में भी आवासीय संपत्तियों की कीमतों में बड़ा उछाल आया है.
कोरोना के बाद सबसे तेज उछाल
एनारॉक के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद सभी प्रमुख शहरों में आवास की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह जमीन और निर्माण सामग्री समेत विभिन्न लागत में हो रही वृद्धि है. उन्होंने बताया कि देश के 7 प्रमुख शहरों में बैंगलुरु, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), दिल्ली-एनसीआर, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता शामिल हैं. इन सभी शहरों में संपत्तियों की कीमतों में तगड़ा उछाल आया है.
6 महीने में बदल जाएगी सस्ते मकान की परिभाषा
रियल एस्टेट सेक्टर के शीर्ष संगठन क्रेडाई ने कहा है कि मकान बनाने की बढ़ती लागत की वजह से अफॉर्डेबल हाउसिंग की पुरानी परिभाषा के तहत अब मकानों का निर्माण करना संभव नहीं रहा है. लिहाजा इसकी लिमिट बढ़ाने अथवा परिभाषा में बदलाव करने के लिए सरकार से मांग की गई है. संगठन ने दावा किया कि आने वाले 6 महीने के भीतर देश में किफायती मकानों की परिभाषा में बदलाव दिखेगा. अभी इसकी लिमिट 45 लाख रुपये है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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