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ED officer Niranjan Singh joins Amritpal Singh Party: ईडी के पूर्व चर्चित अधिकारी निरंजन सिंह ने पंजाब की राजनीति में बड़ा कदम उठाते हुए खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होने का ऐलान किया है. कभी बिक्रम सिंह मजीठिया जैसे नेताओं से पूछताछ करने वाले तेज-तर्रार जांच अधिकारी रहे निरंजन सिंह का कहना है कि पंजाब से नशा खत्म करने और व्यवस्था में बदलाव के लिए उन्होंने यह फैसला लिया है.
ईडी अफसर ने ऐलान किया.
पंजाब की राजनीति में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला सियासी फेरबदल देखने को मिल रहा है. इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के पूर्व चर्चित और तेज तर्रार अधिकारी निरंजन सिंह राजनीति की पिच पर उतरने जा रहे हैं. वे बुधवार को पंजाब की खडूर साहिब सीट से सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत आरोपी अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ का दामन थामेंगे. इस राजनीतिक कदम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि एक तरफ जहां पूर्व जांच अधिकारी भ्रष्टाचार और ड्रग्स के खिलाफ अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका अमृतपाल जैसे विवादित और आतंकवादी मामलों के आरोपी की पार्टी से जुड़ना कई गंभीर सवाल खड़े करता है.
पंजाब में बदलाव और नशे के मुद्दे पर क्या है तर्क?
पार्टी ज्वाइन करने के अपने फैसले पर बात करते हुए पूर्व ईडी अधिकारी निरंजन सिंह का कहना है कि उन्हें सरकारी सेवा से रिटायर हुए पांच से छह साल हो चुके हैं. उनका तर्क है कि पंजाब की लगभग सभी पारंपरिक पार्टियों ने राज्य से नशा खत्म करने के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है और नशा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. उनका मानना है कि पंजाब की व्यवस्था में अब एक बड़ा बदलाव आना बेहद जरूरी है. इसी बदलाव की चाहत और राजनीतिक विकल्प की तलाश में उन्होंने यह नया रास्ता चुना है, जो आने वाले दिनों में पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से प्रभावित कर सकता है.
हाई-प्रोफाइल मामलों के बेबाक जांच अधिकारी का सियासी सफर
निरंजन सिंह का प्रशासनिक और जांच का इतिहास काफी सुर्खियां बटोर चुका है. ईडी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और बेहद संवेदनशील मामलों की जांच की कमान संभाली थी. पंजाब के बहुचर्चित ड्रग्स मामले में अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से लंबी पूछताछ करने वाले अधिकारियों में निरंजन सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे. उस दौरान मजीठिया से पूछताछ और अचानक निरंजन सिंह के ट्रांसफर को लेकर पंजाब की राजनीति में भारी भूचाल आया था और यह मुद्दा लंबे समय तक सुर्खियों में रहा था. अब उसी तेवर वाले पूर्व अधिकारी का एक ऐसे सांसद की पार्टी में शामिल होना, जो खुद गंभीर आपराधिक मामलों और आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना कर रहा है, सवाल उठाता है. इस सियासी कदम से आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, जहां एक तरफ प्रशासनिक अनुभव और सख्त छवि का दावा है, तो दूसरी तरफ विवादित पृष्ठभूमि का साया है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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