पटना. बिहार की राजनीति में जन सुराज के नेता और बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर (PK) एक और बड़ा राजनीतिक कदम उठाने जा रहे हैं. रविवार को प्रशांत किशोर ने एक अहम ऐलान किया है. जन सुराज ने बिहार में होने वाले 8 सीटों के एमएलसी चुनाव में से 5 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं. जन सुराज ने सारण शिक्षक सीट से आफ़ाक अहमद, कोशी स्नातक सीट से रजनीश रंजन, पटना शिक्षक सीट से दिव्य ज्योति, दरभंगा शिक्षक सीट से सुरेश प्रसाद राय और दरभंगा स्नातक सीट से रविंद्र कुमार यादव को उम्मीदवार बनाया है. खास बात यह है कि हाई-प्रोफाइल पटना स्नातक सीट पर पीके ने अभी भी अनुज सिंह के नाम पर सस्पेंस बरकरार रखा है. इसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच क्या पीके, अनुज सिंह पर दांव लगाएंगे या नहीं? क्या एनडीए उम्मीदवारों के ऐलान के बाद इस सीट पर पीके फैसला करेंगे?
बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी को शिकस्त देने के बाद पीके ने जेडीयू को निशाने पर लिया है. बांकीपुर उपचुनाव के दौरान नीरज कुमार ने पीके को लेकर कई बड़े खुलासे किए थे. नीरज कुमार पीके खिलाप शिकायत दर्ज कराने थाने तक भी गए थे. प्रशांत किशोर बांकीपुर जीत गए लेकिन वह अब नीरज कुमार के बहाने जेडीयू को इस बार चित करना चाहते हैं. बिहार विधान परिषद चुनाव की 8 सीटें हैं, जहां नवंबर में मतदान होना तय माना जा रहा है. इन आठ सीटों में सबसे हाई-प्रोफाइल सीट पटना स्नातक बन गया है. नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच छिड़े मल्लयुद्ध में पीके अनुज सिंह पर दांव खेलकर एक तीर से कई निशाने साध सकते हैं.
अनंत सिंह ने प्रशांत किशोर की खूब तारीफ की है.
प्रशांत किशोर क्या एमएलसी चुनाव में करेंगे धमाका?
पीके दुश्मन का दुश्मन दोस्त वाला फॉर्मूला आजमा रहे हैं. बिहार की राजनीति में जेडीयू के दिग्गज नेता और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के खिलाफ माहौल गरमाया हुआ है. नीरज कुमार बनाम अनंत सिंह की लड़ाई में पीके उस अनुज सिंह पर दांव खेल सकते हैं, जिनको लेकर पूरा माहौल गरमाया हुआ है. पटना स्नातक सीट पर मुकाबला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत साख की जंग में बदल गया है. जदयू की ओर से मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार का मैदान में उतरना तय माना जा रहा है. हालांकि, मोकामा के दबंग विधायक अनंत सिंह ने खुलेआम घोषणा कर दी है कि वे नीरज कुमार का समर्थन नहीं करेंगे.
कौन हैं अनुज सिंह और प्रशांत किशोर ने क्या कहा?
अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से डॉ. अनुज सिंह को अपना समर्थन और आशीर्वाद देने का ऐलान किया है. इसके बाद नीरज कुमार और अनंत सिंह के समर्थकों के बीच तीखा वाकयुद्ध शुरू हो गया है, जिसमें पुराने राजनीतिक हिसाब चुकता करने के आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं. डॉ. अनुज सिंह पटना स्नातक क्षेत्र में लंबे समय से युवाओं और पढ़े-लिखे तबके के बीच सक्रिय रहे हैं और स्नातकों के मुद्दों पर काम करते आए हैं. शनिवार को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान जब पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से सवाल किया कि क्या जन सुराज अनुज सिंह को अपना उम्मीदवार बनाएगा और अनंत सिंह के समर्थन को वे कैसे देखते हैं, तो PK ने स्थिति को बेहद चतुराई से संभालते हुए कहा, ‘अनंत सिंह किसको समर्थन देते हैं या क्या बयानबाजी करते हैं, यह जन सुराज का विषय नहीं है. जन सुराज के लिए महत्वपूर्ण यह है कि पार्टी की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से कौन उम्मीदवार चुनकर सामने आता है. हमारी लड़ाई व्यक्ति विशेष या किसी बाहुबली के प्रभाव से नहीं, बल्कि बिहार के पढ़े-लिखे स्नातकों और शिक्षकों के हक के लिए है.’
जन सुराज की नई रणनीति और सियासत का पुराना नियम
राजनीतिक जानकारों की माानें तो जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के भीतर नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच जारी इस तनातनी का सीधा फायदा जन सुराज उठाने की फिराक में है. नीरज को लेकर सत्ता विरोधी लहर लंबे समय से एमएलसी रहने के कारण स्नातकों के बीच कुछ नाराजगी है. जन सुराज व्यवस्था परिवर्तन के नारे के साथ नए विकल्प के रूप में उभर रहा है. इस बीच एनडीए के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आए हैं. अनंत सिंह का खुला विरोध जदयू के कैडर वोट बैंक को बिखेर सकता है. अनुज सिंह को समर्थन मिलने से एनडीए के असंतुष्ट वोटों का ध्रुवीकरण जन सुराज की तरफ हो सकता है.
बांकीपुर की जीत ने पटना और आसपास के स्नातकों में पीके की क्रेडिबिलिटी बढ़ा दी है. हालांकि रविवार को पटना स्नातक सीट से डॉ. अनुज सिंह के नाम पर मुहर नहीं लगी. लेकिन जिन 6 नामों का ऐलान हुआ, इससे साफ लगता है कि पीके जातिगत समीकरण के साथ-साथ एनडीए के दांव-पेच पर भी ध्यान रख रहे हैं. पटना शिक्षक सीट से डॉ. दिव्या ज्योति और सारण से अफाक अहमद जैसे नामों का ऐलान हो गया है. ऐसे में आने ने वाले दिनों में प्रशांत किशोर अनुज सिंह के नाम का आधिकारिक ऐलान करते हैं, तो यह पटना स्नातक सीट पर त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प मुकाबले की शुरुआत होगी.

