नई दिल्ली (President ADC Training and Security Duties). देश के राष्ट्रपति देश के पहले नागरिक होते हैं. इनकी सुरक्षा और प्रोटोकॉल देश की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होता है. राष्ट्रपति के साथ हर वक्त साए की तरह रहने वाले Aide-De-Camp यानी एडीसी की भूमिका बेहद खास और चुनौतीपूर्ण होती है. हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने एक पॉडकास्ट में राष्ट्रपति की सुरक्षा और एडीसी के तौर-तरीकों से जुड़े कई दिलचस्प और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.
ट्रेनिंग की कठोर भट्ठी से निकलते हैं देश के चुनिंदा एडीसी
एडीसी बनना कोई आम नौकरी नहीं है. यह भारतीय सशस्त्र बलों के सबसे काबिल और भरोसेमंद अफसरों को मिलने वाला बेहद गौरवशाली दायित्व है. राष्ट्रपति भवन के गलियारों से लेकर विदेशी दौरों तक, एडीसी राष्ट्रपति के सबसे करीबी सहयोगी के रूप में काम करते हैं. लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कठिन इम्तिहान पास करने होते हैं.
मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राज शमानी के पॉडकास्ट में बताया कि कैसे प्रोबेशन के दौरान एडीसी को हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जाता है. पानी, नींद और खाने के बिना लंबे समय तक फोकस बनाए रखने की ट्रेनिंग से लेकर एक-एक इंच की निगरानी तक, ADC की दुनिया सामान्य लोगों की सोच से बिल्कुल अलग होती है. जानिए एडीसी की ट्रेनिंग और उनकी डेली लाइफ कैसी होती है.
एक किलोमीटर का सैनिटाइज्ड दायरा और परिंदा भी नहीं मार सकता पर
सुरक्षा के लिहाज से राष्ट्रपति के आस-पास के इलाके को लेकर बेहद सख्त नियम होते हैं. मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के मुताबिक, राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके आस-पास लगभग 1 किलोमीटर के क्षेत्र को बहुत अच्छी तरह सैनिटाइज किया जाता है. इस तय दायरे में किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु, धातु या हथियार को रखने की अनुमति नहीं होती है. सुरक्षा व्यवस्था इतनी पैनी होती है कि वहां तैनात सुरक्षाकर्मी और एडीसी हर सेकंड चप्पे-चप्पे पर अपनी नजर गड़ाए रखते हैं, जिससे परिंदा भी पर न मार सके.
शरीर और दिमाग की ली जाती है कठिन परीक्षा
एडीसी को असाधारण रूप से सतर्क और चौकस बनाने के लिए खास ट्रेनिंग दी जाती है. मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने बताया कि प्रोबेशन के दौरान अफसरों को करीब 70 से 80 किलोग्राम वजन लादकर चलना पड़ता है. उन्हें 30-40 दिनों तक पानी, खाना और पर्याप्त नींद से वंचित रखा जाता है. इस शारीरिक और मानसिक थकान के बीच उन्हें 1 किलोमीटर का गोलाकार रास्ता तय करना होता है.
एडीसी की ट्रेनिंग के दौरान उनके रास्ते में अचानक कई चीजें रख दी जाती हैं, जैसे किसी पेड़ के पीछे हेलमेट या कोई अन्य वस्तु. राष्ट्रपति के एडीसी की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद टेस्ट होता है कि उन्होंने रास्ते में क्या-क्या देखा. इसी तकनीक से उनकी नजरों और फोकस को लोहे जैसा मजबूत बनाया जाता है. सब पुख्ता होने के बाद ही उन्हें एडीसी के पद पर नियुक्ति मिलती है.
पांव छूने और हाथ मिलाने पर सख्त पाबंदी
सार्वजनिक कार्यक्रमों में अक्सर लोग अपने चहेते राष्ट्राध्यक्षों के करीब जाना चाहते हैं, उनके पैर छूना चाहते हैं या हाथ मिलाना चाहते हैं. राष्ट्रपति के मामले में सुरक्षा कारणों से यह एकदम वर्जित है. मेजर संब्याल ने इसकी वजह बताई कि आप कभी भी भीड़ में खड़े किसी अनजान व्यक्ति की नीयत का अंदाजा नहीं लगा सकते. सुरक्षा में छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती है. प्रोटोकॉल के तहत किसी को भी राष्ट्रपति के सीधे संपर्क में आने की अनुमति नहीं दी जाती. पानी के ग्लास तक को लेकर अत्यधिक सावधानी बरती जाती है.
एडीसी के जिम्मे है हर आधिकारिक और अनौपचारिक काम की जिम्मेदारी
ADC केवल सुरक्षा गार्ड नहीं होते, बल्कि राष्ट्रपति के सबसे भरोसेमंद सेक्रेटेरियल और मैनेजमेंट अधिकारी भी होते हैं. राष्ट्रपति के दैनिक कार्यक्रमों से लेकर प्रधानमंत्री या अन्य गणमान्य लोगों के साथ बातचीत का प्लान तैयार करने तक, सब कुछ एडीसी की देखरेख में होता है. अगर राष्ट्रपति को देश के प्रधानमंत्री से कोई जरूरी चर्चा करनी है तो एडीसी संबंधित लोगों से संपर्क साधकर तुरंत उच्च स्तरीय बातचीत की व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं. राष्ट्रपति के हर छोटे-बड़े मूवमेंट के पीछे एडीसी की सटीक योजना और मेहनत शामिल होती है.

