भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और पाकिस्तानी सेना ने एक नया और खतरनाक डिजिटल पैंतरा आजमाया है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मात खाने के बाद अब पाकिस्तान भारतीय युवाओं को ही अपने देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की फिराक में है. न्यूज18 को मिली खुफिया जानकारी में पाकिस्तानी सेना के ‘ऑपरेशन द ग्राउंड वायर’ का खुलासा हुआ है, जिसके जरिए भारत में फर्जी न्यूज पोर्टल चलाए जा रहे थे. इसके तहत 22 से 26 साल के बेरोजगार जर्नलिज्म ग्रेजुएट्स को 30 से 40 हजार रुपए की सैलरी का लालच दिया जाता था. उनसे CJP प्रोटेस्ट और राम मंदिर जैसे सेंसेटिव मुद्दों पर देश विरोधी वीडियो बनवाए जा रहे थे.
क्या है ‘ऑपरेशन द ग्राउंड वायर’ और ISI की नई चाल
पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी ISI अब सीधा हमला करने की स्थिति में नहीं हैं. सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ कराना जब मुश्किल हो गया, तो उन्होंने ‘नैरेटिव वॉरफेयर’ यानी फर्जी खबरों और वीडियो के जरिए देश में आंतरिक तनाव फैलाने का रास्ता चुना. न्यूज18 की तफ्तीश में सामने आया है कि पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस इस पूरे नेटवर्क को ‘ऑपरेशन द ग्राउंड वायर’ (@ TGW) कोडनेम के तहत चला रही थी.
इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड पाकिस्तानी सेना का लेफ्टिनेंट कर्नल जिया है. पाकिस्तान का प्लान बेहद शातिराना था. वो भारत के ही 22 से 26 साल के बेरोजगार युवाओं और फ्रेशर पत्रकारों को पैसों का लालच देकर भर्ती कर रहा था. इन युवाओं से देश के अंदरूनी और सेंसेटिव मुद्दों पर पब्लिक ओपिनियन के नाम पर इंटरव्यू रिकॉर्ड कराए जाते थे, ताकि दुनिया के सामने ये दिखाया जा सके कि भारत के आम नागरिक खुद अपनी सरकार और व्यवस्था के खिलाफ बोल रहे हैं.
‘भारत बाइट्स न्यूज’ : फर्जी डिजिटल दुकान का पूरा सच
पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस ने अपने इस देश विरोधी एजेंडे को अंजाम देने के लिए ‘भारत बाइट्स न्यूज’ नाम से एक फर्जी भारतीय न्यूज चैनल तैयार किया. ये नेटवर्क वेबसाइट bbnewsofficial.in के साथ-साथ एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अपने सोशल मीडिया हैंडल चला रहा था.
देखने में ये पोर्टल बिल्कुल किसी आम भारतीय डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म जैसा लगता था ताकि किसी को कोई शक न हो. इसका मकसद भारतीय जनमानस को भ्रमित करना और पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को भारतीय नागरिकों की अपनी आवाज बनाकर पेश करना था. इस पोर्टल के जरिए जर्नलिज्म पास-आउट युवाओं को करियर और नौकरी का झांसा दिया गया और धीरे-धीरे उन्हें देश विरोधी गतिविधियों के जाल में फंसा लिया गया.
इंस्टाग्राम के विज्ञापनों से व्हाट्सएप का जाल
पाकिस्तान के हैंडलर्स का भर्ती करने का तरीका बेहद हाई-टेक और चालाकी भरा था. सबसे पहले इंस्टाग्राम पर जर्नलिज्म फ्रेशर्स के लिए नौकरी और करियर के लुभावने विज्ञापन चलाए जाते थे. जैसे ही कोई युवा इन विज्ञापनों पर अपनी दिलचस्पी दिखाता था, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स उनसे भारतीय नंबरों के जरिए व्हाट्सएप या अन्य एनक्रिप्टेड ऐप्स पर संपर्क साधते थे.
खास बात ये है कि ये भारतीय सिम कार्ड फर्जी दस्तावोजों और जाली पहचान पत्रों के आधार पर हासिल किए गए थे. जब कुछ युवा इस नेटवर्क से जुड़ जाते थे तो उनसे उनके दोस्तों को भी रेफरल के जरिए जोड़ने को कहा जाता था. इस तरह से नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और व्लॉगिंग का अनुभव रखने वाले नौजवानों को आसानी से इस फर्जी नेटवर्क का हिस्सा बना लिया जाता था.
व्हाट्सएप के जरिए फंसाए जाते थे युवा
CJP प्रोटेस्ट से राम मंदिर तक: पाकिस्तान MI का स्क्रिप्टेड प्लान
इन युवा रिपोर्टरों को पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस के एडिटर्स कोई सामान्य या रैंडम खबरें कवर करने के लिए नहीं देते थे. उनसे जानबूझकर देश की इमेज खराब करने वाले और समाज में बवाल पैदा करने वाले मुद्दों पर ही रिपोर्टिंग कराई जाती थी. पाकिस्तान के आकाओं ने युवाओं को जो टॉपिक दिए थे, वो पूरी तरह से स्क्रिप्टेड थे.
- CJP प्रोटेस्ट पर खास फोकस: पाकिस्तानी हैंडलर्स ने भारतीय युवाओं को खास तौर पर ‘CJP प्रोटेस्ट’ को कवर करने का निर्देश दिया था. पाकिस्तान के आकाओं ने जानबूझकर सीजेपी प्रदर्शनों जैसे सेंसेटिव सामाजिक मुद्दों को चुना ताकि देश के भीतर विवाद खड़ा किया जा सके.
- राम मंदिर और फर्जी स्कैम: युवाओं को अयोध्या दान घोटाले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मुद्दों पर मनगढ़ंत लोगों के इंटरव्यू लेने को कहा जाता था.
- सुरक्षा से जुड़ी झूठी खबरें: सेना का मनोबल गिराने और देश को कमजोर दिखाने के लिए पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा चूक और राफेल क्रैश के झूठे दावों वाले वीडियो बनाने के निर्देश दिए जाते थे.
- सामाजिक तनाव वाले मुद्दे: देश में कथित भ्रष्टाचार, गरीबी, प्रेस की आजादी पर सवाल और मस्जिद गिराने जैसे संवोदनशील मुद्दों पर पहले से तय झूठी स्क्रिप्ट के आधार पर बनावटी जनता की राय रिकॉर्ड कराई जाती थी.
भारतीय युवा सिर्फ रॉ वीडियो फुटेज रिकॉर्ड करके व्हाट्सएप से भेजते थे. इसके बाद पाकिस्तान में बैठी एडिटर्स की टीम उस फुटेज को एडिट करके एंटी-इंडिया रंग देती थी और फिर उसे BBN के प्लेटफॉर्म्स पर पब्लिश कर दिया जाता था.
30 से 40 हजार का लालच और क्रिप्टो-UPI से फंडिंग का खेल
पाकिस्तान के हैंडलर्स इन फ्रेशर युवाओं को अपने जाल में बनाए रखने के लिए हर महीने 30,000 से 40,000 रुपए का वेतन देते थे. अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए ये रकम बहुत बड़ी थी.
सुरक्षा और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए पैसों के ट्रांसफर का बहुत ही पेचीदा तरीका अपनाया जाता था. पाकिस्तान से सबसे पहले पैसे किसी क्रिप्टो एजेंट के पास भेजे जाते थे. इसके बाद क्रिप्टो एजेंट उस पैसे को अलग-अलग बिचौलियों तक पहुंचाता था. फिर वहां से कई बैंक खातों, फर्जी UPI आईडी और सीधे कैश के जरिए युवाओं तक पेमेंट पहुंचाई जाती थी. जांच में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के दो बड़े कंट्रीब्यूटर्स को अपनी रिपोर्टिंग और जूनियर टीमों को संभालने के लिए करीब 4.5 लाख रुपए दिए गए थे.
सामने आए पाकिस्तानी आकाओं के चेहरे, तस्वीरों का सच
सीएनएन न्यूज18 के इस खुलासे में सबसे बड़ी सफलता ये है कि इस पूरी साजिश के पीछे मौजूद पाकिस्तानी आकाओं की तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं.
इस नेटवर्क का मुख्य रिक्रूटर अब्दुल्लाह साद है, जो पाकिस्तान में बैठकर काम कर रहा है. वो खुद को कभी नोएडा, कभी ऑस्ट्रेलिया तो कभी अमेरिका का निवासी बताकर ‘नवीन दुबे’ और ‘हर्ष’ जैसे फर्जी भारतीय नामों से युवाओं से बात करता था. वो सीधे पाक एमआई के लेफ्टिनेंट कर्नल जिया के इशारों पर काम कर रहा था. सामने आई खास तस्वीर में इस नेटवर्क के चार प्रमुख चेहरे साफ देखे जा सकते हैं
- अब्दुल्लाह साद : मुख्य रिक्रूटर, जो नवीन दुबे और हर्ष नाम से युवाओं को फंसाता था
- आकिब : डिजिटल एजेंडे को संभालने वाला पाकिस्तानी हैंडलर
- अहमद चौधरी : नेटवर्क का मुख्य पाकिस्तानी ऑपरेटिव
- जयान खान : पाकिस्तानी सेना और इंटेलिजेंस का मददगार
कैसे युवाओं को टारगेट करता है पाकिस्तान
इस पूरे मामले पर रक्षा और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल हिमांशी सिंह का कहना है कि ‘पाकिस्तानी एजेंसी ISI लगातार भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की ताक में रहती है और ‘ऑपरेशन द ग्राउंड वायर’ उसी की एक नई कड़ी है. पाकिस्तान डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लगातार फर्जी नैरेटिव फैलाने का काम कर रहा है. 2015 में भी ‘डिफेंडर्स ऑफ पाकिस्तान’ नाम के प्लेटफॉर्म ने टेक्नोलॉजी की समझ रखने वाले भारतीय युवाओं को हायर करके देश के अंदर से ही भ्रम फैलाने की कोशिश की थी’.
हिमांशी सिंह के मुताबिक ‘इनका टारगेट हमेशा वही युवा होते हैं जो जर्नलिज्म फ्रेशर्स हैं, बेरोजगार हैं या जिन पर आर्थिक दबाव है. पहले उन्हें पैसों और नौकरी का लालच दिया जाता है और फिर धीरे-धीरे ब्लैकमेल किया जाता है. पाकिस्तान अच्छी तरह समझता है कि वो सीधे मिलिट्री टकराव में भारत का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए वो देश के भीतर से ही ऐसी पौध तैयार कर रहा है ताकि इंफॉर्मेशन वॉरफेयर छेड़ा जा सके. जब ये नेटवर्क टूटते हैं तो पाकिस्तान साफ पल्ला झाड़ लेता है कि ये तो भारत के अंदर की बात है. हमारे युवाओं को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय जागरूक और सावधान रहने की सख्त जरूरत है’.
पाकिस्तान के फर्जी न्यूज पोर्टल का पर्दाफाश
हाइब्रिड वॉरफेयर में पाकिस्तान की नाकामी
टॉप सरकारी सूत्रों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेना और बेरोजगार युवाओं को मोहरा बनाना इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान सीधे युद्ध के मैदान में भारत के आगे टिक नहीं पा रहा है. जंग में बार-बार मात खाने के बाद अब वह हाइब्रिड वॉरफेयर का सहारा ले रहा है.
‘भारत बाइट्स न्यूज’ जैसे फर्जी पोर्टल बनाकर भारतीय नौजवानों को जाल में फंसाना पाकिस्तान की बौखलाहट को दिखाता है. भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंच चुकी हैं और देश के युवाओं को भी ऐसे फर्जी नौकरी के विज्ञापनों और संदिग्ध प्लेटफॉर्म्स से सावधान रहने की सख्त हिदायत दी जा रही है.

