दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर हैं. दुनिया के कई बड़े नेता राजधानी पहुंचेंगे. उनके साथ उनकी पत्नियां भी आएंगी. ऐसे में मेहमानों के लिए सिर्फ बैठकों और आधिकारिक कार्यक्रमों का इंतजाम नहीं हो रहा है. दिल्ली दिखाने की भी तैयारी है. प्लान ऐसा है कि विदेशी मेहमान राजधानी का वो चेहरा देखें, जो डिप्लोमैटिक मीटिंग और बड़े सम्मेलन हॉल से बिल्कुल अलग है. भारत मंडपम का क्राफ्ट्स बाजार इस कार्यक्रम का बड़ा आकर्षण बन सकता है. यहां भारतीय कला, हस्तशिल्प और हैंडलूम की झलक मिलेगी. इसके बाद दिल्ली के चर्चित बाजारों और ऐतिहासिक जगहों की सैर भी हो सकती है. संभावित सूची में चांदनी चौक, खान मार्केट और जनपथ जैसे नाम हैं. यानी इस बार दिल्ली की गलियां भी ग्लोबल डिप्लोमेसी की कहानी का हिस्सा बन सकती हैं.
अब जरा इस पूरे प्लान की तस्वीर समझिए. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक तरफ ब्रिक्स सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्ष दुनिया की बड़ी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे. दूसरी तरफ उनकी पत्नियों के लिए दिल्ली की कला, संस्कृति और बाजारों को करीब से देखने का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक अभी पूरा कार्यक्रम फाइनल नहीं है. समय, सुरक्षा और वीवीआईपी मूवमेंट के हिसाब से इसमें बदलाव हो सकता है. द लॉधी होटल में लंच की तैयारी है. प्रधानमंत्री संग्रहालय और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट भी संभावित कार्यक्रम में हैं. राजघाट, जामा मस्जिद और लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्थल भी सूची में बताए जा रहे हैं. यानी कोशिश है कि मेहमानों को दिल्ली सिर्फ राजधानी के तौर पर नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और विरासत के साथ दिखाई जाए.
राष्ट्राध्यक्षों की पत्नियों के संभावित बाजार दौरे के साथ सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है. (PTI)
भारत मंडपम का क्राफ्ट्स बाजार बनेगा खास आकर्षण
राष्ट्राध्यक्षों की पत्नियों के संभावित कार्यक्रम में भारत मंडपम का क्राफ्ट्स बाजार सबसे खास जगहों में से एक है. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प देखने को मिलते हैं. हैंडलूम भी इसकी बड़ी पहचान है. विदेशी मेहमानों के लिए यह भारत की विविधता को एक जगह देखने का मौका होगा. सम्मेलन के औपचारिक माहौल से निकलकर यहां उन्हें कारीगरों की कला और भारतीय परंपराओं की झलक मिल सकती है. यही वजह है कि इसे कार्यक्रम के प्रमुख हिस्सों में रखा जा रहा है.
चांदनी चौक की गलियों से खान मार्केट तक
दिल्ली के मशहूर बाजारों को भी इस खास कार्यक्रम में जगह मिल सकती है. संभावित सूची में चांदनी चौक, खान मार्केट और जनपथ शामिल हैं. तीनों बाजार दिल्ली की अलग-अलग तस्वीर पेश करते हैं. चांदनी चौक पुरानी दिल्ली की गलियों, खानपान और विरासत के लिए जाना जाता है. खान मार्केट आधुनिक खरीदारी और शहर की समकालीन जीवनशैली की झलक देता है. वहीं जनपथ पारंपरिक हस्तशिल्प और खरीदारी के लिए जाना जाता है. ऐसे में इन जगहों का चुनाव दिल्ली के अलग-अलग रंग दिखाने की कोशिश है.
प्रधानमंत्री संग्रहालय और आर्ट गैलरी भी प्लान में
बाजारों के अलावा सांस्कृतिक जगहों को भी कार्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है. अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री संग्रहालय और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के दौरे की व्यवस्था की जा रही है. इन जगहों पर मेहमानों को भारत के राजनीतिक इतिहास और आधुनिक कला की झलक मिल सकती है. द लॉधी होटल में लंच का कार्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है. हालांकि अंतिम कार्यक्रम समय और सुरक्षा व्यवस्था के हिसाब से तय होगा.
राजघाट, जामा मस्जिद और लाल किले पर भी नजर
दिल्ली की विरासत को देखते हुए राजघाट, जामा मस्जिद और लाल किला भी संभावित स्थलों में शामिल हैं. ये जगहें राजधानी के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान की अहम तस्वीर पेश करती हैं. हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सूची में किसी जगह का नाम होने का मतलब यह नहीं है कि वहां दौरा पक्का है. मेहमानों के पास कितना समय होगा और उस समय सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी, इसी आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
बाजारों में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात
राष्ट्राध्यक्षों की पत्नियों के संभावित बाजार दौरे के साथ सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है. ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दिल्ली में कई वीवीआईपी मौजूद होंगे. इसलिए हर मूवमेंट को बड़े सुरक्षा और ट्रैफिक प्लान के साथ जोड़ा जाएगा. दिल्ली पुलिस ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैयारियां बढ़ा दी हैं. बाजारों में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात किए जा रहे हैं. उनका मकसद भीड़ के बीच रहकर लगातार निगरानी रखना है. सीसीटीवी कैमरों की भी खास निगरानी की जा रही है.
मकसद सिर्फ घूमना नहीं, दिल्ली दिखाना भी
इस पूरे कार्यक्रम का मकसद सिर्फ मेहमानों को घुमाना नहीं है. इसके जरिए दिल्ली और भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखने की कोशिश है. ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान दुनिया की नजर भारत पर होगी. अगर कार्यक्रम तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ा तो राष्ट्राध्यक्षों की पत्नियां भारत मंडपम के क्राफ्ट्स बाजार में भारतीय हस्तशिल्प देखेंगी. इसके बाद चांदनी चौक की पुरानी गलियों से लेकर जनपथ और खान मार्केट तक दिल्ली के अलग-अलग रंगों से रूबरू हो सकती हैं. हालांकि अंतिम कार्यक्रम सुरक्षा और समय को देखते हुए ही तय होगा. फिर भी इतना साफ है कि इस बार ब्रिक्स मेहमानों के लिए दिल्ली सिर्फ सम्मेलन की मेजबान नहीं, बल्कि खुद एक खास अनुभव बनने वाली है.

