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Trump Effect on Pharma : डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ के बाद अब भारतीय फार्मा सेक्टर को एक और झटका दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वे जल्द ही अपने देश में दवाओं के दाम घटाने वाले हैं. इससे भारतीय दवा कंपनियों के मुनाफे पर तगड़ा असर पड़ने की आशंका है.यही वजह है कि 10 सितंबर को भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दिख रही है.
भारतीय दवा कंपनियों के शेयरों में 10 सितंबर को गिरावट दिख रही है.
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वॉर के बाद अब भारतीय दवा कंपनियों को नुकसान पहुंचाने का नया पैंतरा शुरू कर दिया है. उन्होंने अमेरिका में दवाओं के दाम घटाने का ऐलान किया है. इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर ही होगा, क्योंकि अमेरिका में अभी करीब 60 फीसदी जेनरिक दवाओं का आयात भारत से ही किया जाता है. अगर अमेरिकी बाजार में दवाओं की कीमतें कम होती हैं, तो इससे भारतीय दवा कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा.
दरअसल, ट्रंप की नई प्राइसिंग नीति से दुनियाभर की फार्मा कंपनियों में खलबली है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है. इसकी वजह ये है कि भारतीय फार्मा कंपनियों का अमेरिका में काफी ज्यादा कारोबार है. वित्तवर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों का अमेरिका को कुल दवा निर्यात करीब 80 हजार करोड़ रुपये था. अमेरिका की आधे से ज्यादा जेनरिक दवाओं की सप्लाई भारतीय कंपनियों ही करती हैं. यही वजह है कि ट्रंप के ताजा फैसले फार्मा कंपनियों को अपना मुनाफा कम होने का डर सताने लगा है.
फार्मा सेक्टर पर दोहरी मार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले कुछ दिनों के भीतर भारतीय दवा कंपनियों को दोहरा झटका दिया है. पहले तो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून की धारा 232 के तहत दवा सेक्टर पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया और अब अमेरिका में सस्ती दवा बेचने का ऐलान करके उन्होंने एक और झटका दिया है. ट्रंप ने पहले फैसले के तहत जेनरिक दवाओं को टैरिफ से बाहर रखा था, जिससे भारतीय कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं थी. लेकिन, अब दवाओं के दाम घटाने का ऐलान करके इन कंपनियों को भी चिंता में डाल दिया है.
किन कंपनियों पर ज्यादा असर
ट्रंप के ताजा फैसले का असर उन भारतीय कंपनियों पर ज्यादा होने वाला है, जिनका कारोबार आज भी अमेरिका पर ज्यादा निर्भर है. खासकर ऐसी भारतीय कंपनियां जो ब्रांडेड और इनोवेटिव प्रोडक्ट का ज्यादा निर्यात करती हैं. ट्रंप ने टैरिफ का ऐलान करते समय एक शर्त रखी थी कि जो भारतीय कंपनियां अमेरिका में अपना विनिर्माण करती हैं, उन्हें टैरिफ से छूट दी जाएगी. भारतीय दवा कंपनी सन फार्मा ने इस शर्त को मंजूर किया और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को लेकर करार किया है. इससे ट्रंप ने कंपनी को एक साल तक और फिर आगे 2 साल तक छूट देने का प्रस्ताव दिया है.
कौन सी दवाओं पर घटेगा मार्जिन
ट्रंप ने अमेरिका में दवाएं सस्ती करने का फैसला करके उन दवा कंपनियों को चौंका दिया है, जो अभी वहां अपने कारोबार से ज्यादा मुनाफा कमाती हैं. हाई मार्जिन वाली स्पेशल दवाएं बेचने वाली कंपनियों का मार्जिन इस फैसले ज्यादा कम होगा. ऐसी भारतीय कंपनियां जो अमेरिका में कैंसर, अल्जाइमर जैसी हाई मार्जिन वाली दवाएं बेचती हैं, उनके मुनाफे पर इसका ज्यादा असर होगा. इससे बचने के लिए भारतीय कंपनियां अमेरिका में अपनी यूनिट लगाने को भी तैयार हैं, लेकिन इससे खर्च काफी बढ़ेगा. हालांकि, यह फैसला भविष्य में उन पर टैरिफ का जोखिम कम कर देगा.
किन कंपनियों का घटेगा मुनाफा
- Sun Pharma : भारतीय दवा कंपनी सन फार्मा के कुल कारोबार में अमेरिकी बाजार का हिस्सा करीब 29 फीसदी है, जो करीब 17 हजार करोड़ होता है. इस कंपनी ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग करने पर सहमति जता दी है और इस पर ट्रंप के फैसले का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, कंपनी का थोड़ा मुनाफा जरूर कम होगा.
- Aurobindo Pharma : इस भारतीय दवा कंपनी के कुल कारोबार में पिछले वित्तवर्ष में करीब 43 फीसदी हिस्सेदारी थी. यह कंपनी अमेरिका में सबसे ज्यादा जेनरिक दवाएं भेजती है और कुल बिक्री करीब 3,543 करोड़ थी. अगर यह कंपनी अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करती है तो टैरिफ लगने से उसकी मार्जिन पर असर होगा. साथ ही दवाओं की कीमतें कम होने से भी मुनाफे पर असर पड़ेगा.
- Lupin : ल्यूपिन के कुल रेवेन्यू का 42 फीसदी पिछले वित्तवर्ष में सिर्फ अमेरिका से आया, जो करीब 10 हजार करोड़ रुपये होगा. इस कंपनी ने पहले ही अमेरिका में अपनी यूनिट लगा रखी है तो इस पर टैरिफ का ज्यादा असर नहीं दिखेगा. लेकिन, दवाओं के दाम घटाने के हालिया फैसले से मुनाफा जरूर कम होने वाला है. कंपनी की सबसे बड़ी कमजोरी इसका अमेरिका पर ज्यादा निर्भर होना है.
- Dr. Reddy’s : इस भारतीय दवा कंपनी पर सबसे ज्यादा जोखिम है. अमेरिका में इसका कुल कारोबार वित्तवर्ष 2025 में 14,520 करोड़ था जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का 45 फीसदी होगा. अमेरिका में टैरिफ बढ़ाने और जेनरिक दवाओं के दाम घटने से कंपनी के मुनाफे पर सबसे ज्यादा असर पड़ने वाला है.
- Cipla : सिप्ला का उत्तरी अमेरिका में सिर्फ 78 करोड़ डॉलर यानी करीब 7.5 हजार करोड़ का करोबार है, जो उसके कुल रेवेन्यू का 24 फीसदी है. यह कंपनी अपने बाजार के लिए अमेरिका पर ज्यादा निर्भर भी नहीं है. लिहाजा इसके मुनाफे पर अन्य कंपनियों के मुकाबले कम असर पड़ेगा. साथ ही कंपनी ने अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग लगाने पर भी सहमति जता दी है.कंपनी के शेयरों पर क्या असर
- ट्रंप के इस फैसले से 10 सितंबर को डॉ रेड्डीज के शेयरों में दोपहर 1 बजे 0.36 फीसदी की गिरावट दिख रही थी.
- भारतीय दवा कंपनी ल्यूपिन के शेयरों में भी आज सुबह 0.80 फीसदी की गिरावट दिख रही है.
- अरबिंदों फार्मा के शेयरों में आज दोपहर करीब 1.91 फीसदी की तगड़ी गिरावट दिख रही है.
- भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा के शेयरों में भी आज 0.78 फीसदी की गिरावट दिख रही है.
- सिप्ला पर कम असर पड़ने की वजह से इसके शेयरों में 0.51 फीसदी की तेजी दिख रही है, क्योंकि निवेशकों का मानना है कि कंपनी के पास अमेरिकी बाजार में नए अवसर बनेंगे.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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