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Bhilwara Ganesh Mandir: भीलवाड़ा में गणेश जी का एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. शहर में अपनी तरह का यह खास मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी भव्य प्रतिमा के लिए भी जाना जाता है. गणेश उत्सव के दौरान यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है. मंदिर की विशाल प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर खींचती है.
भीलवाड़ा – गणेश चतुर्थी का त्यौहार नजदीक आने वाला है और गणेश चतुर्थी के आने से पहले ही मंदिरों और गणेश जी भगवान के भक्त तैयारी में जुट जाते हैं. कई लोग पंडाल सजाते हैं तो कई लोग मंदिर में जाकर तैयारी करते हैं और श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना करते हैं. ऐसे में आज हम आपको भीलवाड़ा के एक ऐसे गणेश मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने आप में बहुत खास और अलग है. भीलवाड़ा में एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान गर्भ गृह में नहीं बल्कि मंदिर की छत पर विराजित हैं. भगवान की प्रतिमा भी इतनी विशाल है कि दूर-दूर तक इस मूर्ति का नजारा दिखाई देता है.
भीलवाड़ा के रोकड़िया गणेश मंदिर में भगवान गणेश जी की प्रतिमा करीब 21 फीट विशालकाय है. यह भीलवाड़ा जिले की ही नहीं बल्कि मेवाड़ की सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा भी मानी जाती है. मान्यता है कि इस मंदिर में गणेश जी के दर्शन करने से ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. यहां संतान की प्राप्ति के लिए भगवान से मनोकामना मांगने के लिए भक्त मनोकामना का धागा बांधते हैं. इस मंदिर में पाकिस्तान की हिंगलाज माता का मंदिर भी बना हुआ है.
मंदिर में लगभग सभी देवी-देवता विराजमान
रोकड़िया गणेश मंदिर सेवा समिति के सचिव प्रह्लाद कुमार गर्ग ने बताया कि इस मंदिर में लगभग सभी देवी-देवता विराजमान हैं. इस मंदिर में 21 फीट के गजानंद जी की प्रतिमा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है. इस मूर्ति का निर्माण करीब 2007 में करवाया गया था. यह भीलवाड़ा और राजस्थान की पहली ऐसी प्रतिमा है जो 21 फीट की मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थापित है. यहां पर भगवान के दर्शन करने के लिए मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. यहां पर भक्तों की हर प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और यहां पर मनोकामना का एक धागा भी बांधा जाता है, विशेष तौर पर अपने बिगड़े काम को संवारने और संतान प्राप्ति के लिए श्रद्धालु यहां पर मनोकामना मांगते हैं.
मंदिर की छत पर भगवान को स्थापित किया
जब भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो उनके द्वारा यहां पर प्रसादी का भी आयोजन किया जाता है. मूर्ति निर्माण के लिए तत्कालीन समय में तीन कलाकार आए थे, ओडिशा कलाकार को मूर्ति निर्माण की योजना बताने पर उसने तीसरी मंजिल पर निर्माण करने से मना कर दिया. इसके बाद पर्बतसर के कलाकार ने मिट्टी के गजानन की प्रतिमा तैयार की हैं. अंत में हरियाणा के कलाकार रमेश भाई ने एक साल की मेहनत के बाद मूर्ति को मूर्त रूप दिया और मंदिर की छत पर भगवान को स्थापित किया गया.
पाकिस्तान का हिंगलाज माता मंदिर
रोकडिया गणेश मंदिर की एक सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि इस मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं, जिसमें सबसे प्रमुख और खास पाकिस्तान की हिंगलाज माता मंदिर है. यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहां पर पाकिस्तान की हिंगलाज माता की प्रतिमा स्थापित है. भक्त यहां माता रानी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और मनोकामना मांगते हैं.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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