जंतर मंतर का प्रोटेस्ट और वहां जो-जो हुआ, वह इस देश के लिए एक ऐसा चैप्टर हो गया है कि क्लोज होने का नाम ही नहीं ले रहा. कुछ ना कुछ सामने आ ही जाता है. अब आज कॉकरोच पार्टी वाले एक अलग मामले को लेकर थाने पहुंच गए. ये मामला जंतर मंतर पर पिटाई का पुराना मामला था, लेकिन इसमें कॉकरोच वाले कूद गए, राहुल गांधी कूद गए, सांसद चंद्रशेखर कूद गए. सबको इसमें ये दिख गया कि इसमें दलित एंगल है तो सब अपना एजेंडा चलाने लगे. इन लोगों ने आज दिल्ली पुलिस के एक थाने को घेर लिया. वहीं पर ये लोग घंटों बैठे रहे. इन लोगों ने पिटाई के इस पुराने मामले में आरोपी पर हत्या के प्रयास का केस और SC-ST एक्ट लगाने के लिए प्रेशर डालना शुरू कर दिया. ये लोग 72 घंटे की धमकी देने लगे कि अगर आरोपी अरेस्ट नहीं हुआ तो ये 72 घंटे बाद बड़ा तमाशा कर देंगे. आप ये भी देखिए कि उधर दबाव में आई पुलिस ने तुरंत ही आरोपी को शाम होते होते पकड़ लिया. लेकिन इससे ये सवाल उठने लगे कि क्या अब कानून सड़कों की राजनीति के हिसाब से चलेगा. क्या इन लोगों ने ये मान लिया कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ इसी तरह की पॉलिटिक्स करेंगे. क्योंकि चुनाव में तो ये जीत नहीं पा रहे, इसलिए क्या अब धरना, प्रदर्शन, घेराव, हंगामा… नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2029 तक यही सब चलेगा.
लोग ये भी पूछ रहे हैं कि क्या दलित पॉलिटिक्स के चक्कर में कानून पर दबाव बनाकर अपने हिसाब से एक्शन करवाए जाएंगे. क्योंकि जिस मामले में ये लोग हल्ला मचाकर दबाव बना रहे हैं, वो अगर हत्या के प्रयास का केस था या SC-ST एक्ट का मामला बनता था तो 70 दिन से इसपर कोई बात क्यों नहीं हो रही थी. उल्टे इस मामले में ऐसे नए-नए वीडियो आ गए हैं, जो पूरी कहानी ही पलट कर रख दे रहे हैं और कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
आज पूरे दिन मोदी विरोधियों ने जो गदर काटा है, वो मामला इन्हें 70 दिन तक दिखाई नहीं दिया. लेकिन आज ये सब हंगामा मचा रहे हैं. हंगामा इसलिए मचा रहे हैं, क्योंकि इन्हें इसमें दलित एंगल दिख गया. निशु आजाद नाम की एक लड़की है, जो जंतर-मंतर में कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट में गई थी. इसने कल राहुल गांधी को टैग करके सोशल मीडिया में ये आरोप लगाया कि उसके पिता को जंतर मंतर पर मारा पीटा गया और आरोपी पर कोई एक्शन नहीं हुआ. जिस पर मारपीट का आरोप लगा, वो स्वतंत्र भारद्वाज नाम का एक लड़का है. इसी मामले को लेकर पहले राहुल गांधी ने ट्वीट किया, फिर कॉकरोच पार्टी वाले भी आ गए.
जिस लड़की को लेकर पूरा इकोसिस्टम जुट गया. उस लड़की को भी देख लीजिए कि ये वही लड़की है जो जंतर मंतर पर पीएम मोदी की तेरहवीं का खाना बांटने के वीडियो बनाकर चर्चा में आई थी. इस लड़की ने आरोप लगाया कि जंतर मंतर पर स्वतंत्र भारद्वाज नाम के लड़के ने उसके पिता के साथ मारपीट की थी. उसके पिता का सिर फोड़ दिया था. और इस मामले में दिल्ली पुलिस कोई एक्शन नहीं ले रही थी. लेकिन इस मामले में कुछ नए वीडियो सामने आए हैं उससे नए खुलासे हुए हैं और पूरा केस ही पलटता दिख रहा है.
लेकिन आप देखिए कि इसी मामले को लेकर आज कॉकरोच पार्टी वालों ने मोर्चा खोल दिया. इसी लड़की के पिता से मारपीट के मामले में आरोपी पर एक्शन को लेकर आज कॉकरोच जनता पार्टी सड़क पर उतर गई. सांसद चंद्रशेखर आजाद थाने पहुंच गए और पप्पू यादव धरने पर बैठ गए. इन लोगों ने दिल्ली पुलिस पर ये दबाव बनाया कि वो आरोपी को गिरफ्तार करे, क्योंकि पीड़ित दलित है. इसलिए आरोपी के खिलाफ SC-SC एक्ट लगाए. हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करें.
इस मांग को लेकर कॉकरोच पार्टी के नेताओं ने आज संसद मार्ग थाने पर हंगामा किया है. इस प्रदर्शन में CJP कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी मौजूद थे. सौरव दास ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए और कहा कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज खुद ये कुबूल कर रहा कि उसने मारपीट की. खतरनाक तरीके से मारा, जिससे जान भी जा सकती थी. इसलिए आरोपी पर अटेम्ट टू मर्डर का भी चार्ज लगना चाहिए.
CJP नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन करने के लिए आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद जब संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके साथ नीशू आजाद भी थीं. चंद्रशेखर आजाद ने कहा, ‘तो आज उन्होंने एक्सेप्ट किया और उन्होंने समय मांगा कि हम इसमें एससी/एसटी एक्ट में लगाएंगे और जो है ‘अटेम्प्ट टू मर्डर’ की धाराएं भी लगाएंगे और भी जो धाराएं ऑफेंस बन रहे हैं, वो लगाएंगे और 72 घंटों के अंदर उस आरोपी को गिरफ्तार करेंगे. वो जिस तरह से मजाक उड़ा के कुछ मंत्रियों के नाम लेता है, दिल्ली के केंद्र के मंत्रियों के नाम लेता है, क्या अपराधी अगर ताकतवर होगा तो कार्रवाई नहीं होगी? कानून के लिए तो सब बराबर है.’
कॉकरोच पार्टी और चंद्रशेखर आजाद के साथ पप्पू यादव भी संसद मार्ग थाने के पास पहुंचे और उन्होंने दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े किए. पप्पू यादव ने कहा कि आरोपी जब खुद मान रहा कि उसने हमला किया. इसलिए दिल्ली पुलिस को मनमानी नहीं करनी चाहिए. कड़ा ऐक्शन लेना चाहिए. पप्पू यादव ने कहा, ‘टीम ने जो भीतर गए, उन्होंने 307 से नीचे कोई समझौता नहीं किया है. 12 टांके लगे हैं और वो खुद स्वीकार कर रहा है कि मैंने मारा है. आश्वासन दिया गया है कि हर कीमत पर गिरफ्तारी होगी. वो जेल जाएंगे, हर परिस्थिति में, और जो इसमें दोषी है, उसको दंडित किया जाए.’
जब ये सब हंगामा हो गया तो शाम होते होते ये खबर आ गई कि उस लड़के को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. स्वतंत्र भारद्वाज नाम के इस लड़के को यूपी के बुलंदशहर से पुलिस ने पकड़ा. ये भी दावा किया गया कि इस लड़के पर SC-ST एक्ट लगेगा. कॉकरोच पार्टी और कांग्रेस ये दावा कर रही कि पुलिस ने उनके दबाव में ऐक्शन लिया. कॉकरोच वालों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उनकी मांगें को मानते हुए स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर में हत्या के प्रयास की धारा और एससी-एसटी एक्ट लगाया. साथ ही निशु आजाद को मिली रेप की धमकियाों और गालियों वाले मैसेज के खिलाफ अलग से भी शिकायत दर्ज की गई.
कांग्रेस दावा कर रही कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और इंडियन यूथ कांग्रेस की लीगल टीम ने लगातार इस मामले की पैरवी की और हर स्तर पर दबाव बनाया. कांग्रेस ने कहा कि राहुल ने वादा किया था कि निशु अकेली नहीं है. आज इसे इंडियन यूथ कांग्रेस साबित कर दिखाया. कांग्रेस कह रही कि निशु के लिए उनकी लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती. कांग्रेस सड़क से लेकर अदालत तक न्याय की लड़ाई जारी रखेगी.
पुलिस को एक्शन इसलिए लेना पड़ा, क्योंकि ये पूरा इकोसिस्टम अल्टीमेटम दे रहा था कि 72 घंटे में इसे अरेस्ट करो, नहीं तो बहुत बड़ा तमाशा कर देंगे. सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, ‘अब रही बात अरेस्ट की, उन्होंने निशु को, संजय जी को, हम सभी को कमिटमेंट दिया है, 72 घंटे के अंदर सारे ऐसे गुंडों का अरेस्ट होगा. वो एक टीम का गठन कर रहे हैं ऑलरेडी और एक्शन लिया जाएगा. इसलिए हम लोग आज वार्तालाप करने आए हैं. आज हम लोग बातचीत करने आए थे, लेकिन अगर ये कमिटमेंट नहीं फुलफिल करते हैं, तो जैसे ऑलरेडी चंद्रशेखर जी ने बोला, हम लोगों को वापस आना पड़ेगा और हमें कोई मुश्किल नहीं है वापस आने के लिए. तो अभी हम लोग यही बोलेंगे कि जो दिल्ली पुलिस ने कमिटमेंट किया है, उसको फुलफिल करें.’
उधर स्वतंत्र भारद्वाज का दावा है कि उस पर अटैक हुआ था, वो सेल्फ डिफेंस कर रहा था और इसी दौरान खुद को बचाने के चक्कर में उसने जो कड़ा पहना हुआ था, वो कड़ा निशू आजाद नाम की लड़की के पिता को गलती से लग गया. करीब-करीब यही बात निशु आजाद के पिता के एक वायरल वीडियो में कह रहे हैं कि उन्हें तो अनजाने में चोट लगी और अगर पुलिस दो मिनट नहीं आती तो स्वतंत्र भारद्वाज की हालात और खराब कर देते.
निशु आजाद के पिता ने कहा, ‘मैं कहना चाहता हूं, कुछ लोग कह रहे हैं अनजाने में मेरे सिर पर चोट मारकर सोचते हैं कोई तीर बहुत बड़ा तीर मार दिया. तो मैं कहना चाहता हूं, अगर वहां पर दो मिनट पुलिस ना आती, तो फोटो में देख सकते हो, तुम्हारी दशा क्या कर रखी थी. पुलिस को सब वहम हो गया था, मैं तुझे मार रहा हूं, तो पुलिस ने हमें पकड़ लिया था गलती से. वन-ऑन-वन कर ले भाई, जहां चाहे वहां मिलने के तैयार हूं.’
निशु आजाद के पिता तो खुद कह रहे हैं कि पुलिस नहीं आती तो स्वतंत्र भारद्वाज की हालत खराब कर देते. वो अपने वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज की तस्वीर भी दिखा रहे हैं. जबकि इंडी वालों का इकोसिस्टम तो ये कह रहा है कि स्वतंत्र भारद्वाज ने तो निशु आजाद के पिता का सिर फोड़ दिया था. उसकी तो गिरफ्तारी होनी चाहिए. जबकि निशु आजाद के पिता कह रहे हैं कि उन्हें अनजाने में लग गया है. यही बात स्वतंत्र भारद्वाज ने भी अपनी सफाई में कहा कि गलती से लग गया है.
इस मारपीट से जुड़ा एक और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि निशु आजाद के पिता जंतर मंतर पर वीडियो बना रहे हैं. उस वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज भी दिख रहा है. स्वतंत्र भारद्वाज को ये लगा कि उनकी वीडियो बनाई जा रही है. वो विरोध करने लगा कि कैमरा बंद करो… यही बात स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी सफाई में कही कि उसका वीडियो ये लोग बना रहे थे. इसका उसने विरोध किया और इसी को लेकर झगड़ा हुआ है.
लेकिन जो इकोसिस्टम एक्टिव हुआ, उसमें ये लोग दो बातें कर रहे हैं एक तो इस लड़के पर हत्या के प्रयास का केस चलना चाहिए. और दूसरा एससी-एसटी एक्ट लगना चाहिए. लेकिन ये दोनों मामले कहीं से बनते ही नहीं है. इनका कोई आधार ही नहीं है. जैसे आप अगर हत्या के प्रयास का मामला देखेंगे तो दिल्ली पुलिस ने खुद बताया है कि वहां मारापीटी हुई थी, इसी मारापीटी में मामूली चोट आई.
किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ. दिल्ली पुलिस ने पूरी कहानी बताई कि जंतर मंतर पर क्या हुआ था. दिल्ली पुलिस ने बताया कि 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद निवासी 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में चोट लगी थी. संजय कुमार को यह चोट एक आरोपी द्वारा पहने गए कड़े से लगी थी. घटना के बाद संजय कुमार का RML अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया. डॉक्टरों की रिपोर्ट यानी MLC में चोट को साधारण प्रकृति (Simple Injury) का बताया गया है. जो चोट लगी वो कड़े से लगी, किसी हथियार से नहीं. सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर संजय कुमार की खोपड़ी में फ्रैक्चर/क्रैक होने का दावा किया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक MLC में ऐसी किसी चोट की पुष्टि नहीं हुई है. संजय कुमार के बयान के आधार पर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया. घटना के बाद मौके से संबंधित लोगों को हिरासत में लिया गया था. जांच के दौरान सूरज कुमार और स्वतंत्र भारद्वाज को कानून के मुताबिक नोटिस जारी कर पूछताछ की गई. जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत के सामने जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी. पुलिस ने मामले में किसी तरह के दबाव, राजनीतिक प्रभाव या हस्तक्षेप के आरोपों को भी पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया है.
यानी जंतर मंतर पर दो ग्रुप्स में हाथापाई हुई. इसमें पुलिस ने एक्शन भी लिया. लोगों को हिरासत में भी लिया गया था. कानून के हिसाब से जितना मामला बनता था, उस हिसाब से पुलिस ने उस वक्त काम किया और ये बात वो लोग भी जानते हैं जिनके लिए आज इंडी और विपक्ष के सारे नेता माहौल बना रहे हैं, क्योंकि मारपीट का ये मामला जून का है. दो ढाई महीने होने वाले हैं, इन लोगों को अब याद आ रहा है कि हत्या के प्रयास का केस बनता है. एससी-एसटी एक्ट का मामला बनता है.
लेकिन इन्होंने ये मामला उठाना तब शुरू किया जब स्वतंत्र भारद्वाज नाम के इस लड़के ने अपने बड़बोलेपन में कई बातें कह दी. एक पॉडकास्ट में इसने कहा, ‘ निशु के पिता का हमने सिर फोड़ा. आपको पता है, इसमें कौन सी धारा लगती है. हाफ मर्डर 307. सिर पर 60 टांके लगे हुए थे. बंदा मरने की स्थिति में एंबुलेंस में जा रहा था. हम तो जेल भी नहीं गए. रात भर घूम रहे थे. कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं, ये लोग कहते हैं कि कपिल मिश्रा का कॉल आ गया तो छोड़ दिया. कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं. चिराग पासवान भी अपने बड़े भैया हैं. सारे लोग… आप किन नेताओं को जानती हैं, मोदी जी भी अपने बड़े भाई हैं.’
इस लड़के की बातें सुनकर कोई भी कह सकता है कि ये अपना भोकाल दिखा रहा था. हवाबाजी कर रहा था. लेकिन सवाल ये है कि क्या किसी की सिर्फ बातों को आधार बनाकर सड़कों से ये तय किया जाएगा कि कानून क्या काम करे. क्या कोई आरोपी ये कह देगा कि वो किसी मंत्री को जानता है या प्रधानमंत्री का नाम ले लेगा तो क्या ये मान लिया जाएगा कि उसे बचाया जा रहा है.
और जहां तक स्वतंत्र भारद्वाज का सवाल है ये लड़का तो इतना बड़बोला है कि ये तक कह रहा था कि राहुल गांधी से लेकर डॉनल्ड ट्रंप तक इसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. उसने कहा, ‘हम ये खुद कहेंगे, डंके की चोट पर कहेंगे, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा. तुम ट्रंप, नेतन्याहू, जितने को भी… अभी तो राहुल गांधी उतरा है न. हम तो कह रहे हैं, भारत के अंदर जितने विपक्ष के नेता हैं, तुम जितने विपक्ष के सपोर्टर हैं, उन सारे लोगों को लेकर ग्राउंड पर उतर जाओ, तो भी अगर मेरा बाल-बांका कर दो, तो मान जाएं. नहीं हो सकता, सर. जलवा है हमारा और जलवा ऐसे ही बना रहेगा. धर्मो रक्षति रक्षितः, जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है. जेल जाएंगे, फिर आएंगे, फिर कोई कुछ बोलेगा, फिर इलाज हो जाएगा.’
इस मामले में इकोसिस्टम ने इसलिए भी हंगामा मचाया, क्योंकि इसमें इन्हें दलित पॉलिटिक्स करने का सियासी मसाला दिख गया. दलित वोटबैंक दिख गया. इसीलिए आप ये भी देखिए कि स्वतंत्र भारद्वाज ने चिराग पासवान का भी नाम लिया था, तो चिराग पासवान भी तुरंत आ गए कि इस लड़के के खिलाफ केस करेंगे. चिराग पासवान ने कहा, ‘विषय की गंभीरता को समझते हुए क्योंकि उस व्यक्ति ने कई राजनेताओं के साथ-साथ मेरे भी नाम का मिस यूज करने का काम किया, इसलिए मैंने उस व्यक्ति के खिलाफ अधिकृत शिकायत की है.’
लेकिन इस मामले के कॉकरोच पार्टी वालों को फिर से माहौल बनाने का मौका मिल गया. इसलिए कॉकरोच पार्टी वाले तुरंत इस मामले में कूद गए और थाने तक पहुंच गए. आप देखिए कि कॉकरोच पार्टी वालों की प्लानिंग बहुत लंबी है. ये दावा किया जा रहा है कि कॉकरोच पार्टी वालों का यूपी में भी कोई बड़ा प्लान हो सकता है, क्योंकि कहा जा रहा है कि कॉकरोच पार्टी के आशुतोष रांका की लखनऊ में अखिलेश यादव से लंबी बातचीत हुई. करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई. इस मीटिंग से सवाल उठे कि क्या यूपी में भी कॉकरोच पार्टी वालों को आगे करके कोई नई खिचड़ी पकाई जा रही है.
आप ये भी देखिए कि निशु आजाद नाम की जिस लड़की के पिता को लेकर बवाल हुआ, वो लड़की जंतर मंतर पर पीएम मोदी के तेरहवीं का खाना बांटने वाले वीडियो में थी और उसे एन्ज्वॉय करने की बात कह रही थी, जबकि अब सफाई में कुछ और कह रही है. पहले वायरल वीडियो में वह कहती दिख रही है, ‘तो गाइज, आप देख सकते हो, ये मोदी की तेरहवीं का खाना है. अगर किसी को इंजॉय करना हो, तो यहां पर आ सकते हैं और समोसा खा सकते हैं. प्लीज़ इंजॉय दिस, मोदी की तेरहवीं का खाना जो है. ईट इट.’
वहीं अब इस वीडियो पर सफाई देते हुए उसने कहा, ‘मैंने अपने मन से नहीं कहा था, मैंने ऐसा भी नहीं कि अपने थॉट से बोला हो. वो मैंने पढ़ के बोला था, मैंने जो देखा, मैंने आपको दिखाया था, वो बोल के दिखाया था. वो भी एक पद पर बैठे हैं, ये हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं और वो एक महान इंसान भी कह सकते है, क्योंकि वो देश को चला रहे हैं. उनको हम गाली नहीं दे सकते, लेकिन अगर हम उनकी कुछ चीजों से खुश नहीं हैं, उनके काम से खुश नहीं हैं तो हम उनको एक्सपोज कर सकते हैं, हम उनकी रियलिटी दिखा सकते हैं, हम बता सकते हैं कि हमें उनकी कौन सी चीजें पसंद नहीं आ रही हैं और उनसे सवाल कर सकते हैं, जिसमें कोई भी गलती नहीं है, कुछ गलत नहीं.’

