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धान की फसल में फिटकरी (Alum) का इस्तेमाल मिट्टी के सुधार और पौधों की सुरक्षा के लिए एक पुराना और असरदार देसी तरीका है. यह मिट्टी के pH स्तर को बनाए रखने और हानिकारक कीटों से फसल को बचाने में मदद करता है. कम लागत में बेहतर पैदावार पाने के लिए कई किसान इसे एक प्राकृतिक विकल्प के रूप में अपनाते हैं.
प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि फिटकरी क्षारीय या क्षारीयता वाली मिट्टी के लिए बहुत फायदेमंद होती है. जब मिट्टी का pH स्तर अधिक होता है, तो पौधे पोषक तत्वों को सही से नहीं सोख पाते हैं. फिटकरी मिट्टी के pH मान को कम करके उसे नैचुरल बनाने में मदद करती है. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और खेत की उपजाऊ क्षमता में सुधार होता है.
जब मिट्टी में पीएच संतुलन ठीक होता है, तो धान के पौधे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी तत्वों को आसानी से ग्रहण कर पाते हैं. फिटकरी जड़ प्रणाली को मजबूत बनाती है, जिससे पौधे जमीन से पानी और खाद को बेहतर तरीके से सोखते हैं. इसके इस्तेमाल से पौधों में हरापन बढ़ता है और वे ज्यादा मजबूत होकर तेजी से बढ़ते हैं.
फिटकरी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं. यह धान के खेत में लगने वाले हानिकारक कीड़ों और फफूंद से जनित बीमारियों को रोकने में मदद करती है. पानी में इसका असर रहने से जड़ों में सड़न की समस्या कम होती है और फसल नुकसानदायक जीवाणुओं से सुरक्षित रहती है, जिससे फसल का बचाव होता है.
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अक्सर खेतों में इस्तेमाल होने वाला सिंचाई का पानी मटमैला या भारी होता है. फिटकरी पानी की गंदगी और मिट्टी के कणों को नीचे बैठा देती है, जिससे पानी साफ हो जाता है. साफ पानी पौधों की जड़ों तक आसानी से पहुंचता है. इससे खेत में काई (Algae) नहीं जमती और जड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती रहती है.
फिटकरी को सीधे खेत में छिड़कने की बजाय पानी के साथ देना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है. इसके लिए जब आप खेत में सिंचाई कर रहे हों, तो नाली पर फिटकरी का एक बड़ा टुकड़ा या कपड़े में बांधकर रख दें. बहता हुआ पानी धीरे-धीरे फिटकरी को घोलकर पूरे खेत में समान रूप से फैला देता है.
धान के खेत में फिटकरी की मात्रा मिट्टी की स्थिति पर निर्भर करती है. आमतौर पर एक एकड़ खेत के लिए 1 से 2 किलोग्राम फिटकरी काफी होती है. अगर मिट्टी ज्यादा क्षारीय है तो 2 किलो और सामान्य स्थिति में 1 किलो का इस्तेमाल करें. इसकी बहुत ज्यादा मात्रा मिट्टी को नुकसान भी पहुंचा सकती है, इसलिए सही मात्रा का ध्यान रखें.
फिटकरी का प्रयोग धान की रोपाई के 15 से 20 दिन बाद करना चाहिए, जब पौधे जड़ पकड़ चुके हों. दूसरा प्रयोग कल्ले (Tillers) निकलते समय या जरूरत के अनुसार सिंचाई के दौरान किया जा सकता है. फसल चक्र के दौरान 1 या 2 बार से ज्यादा फिटकरी का उपयोग नहीं करना चाहिए ताकि मिट्टी का संतुलन बना रहे.
किसान रनजोद सिंह ने कहा कि फिटकरी का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं. इसे कभी भी अत्यधिक मात्रा में न डालें, वर्ना मिट्टी ज्यादा अम्लीय हो सकती है. अगर आपकी मिट्टी पहले से ही अम्लीय (Acidic) है, तो इसका प्रयोग करने से बचें. इस्तेमाल से पहले अपनी मिट्टी की जांच करा लेना या कृषि एक्सपर्ट से सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है.

