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अस्पताल में ओपीडी पर्चा बनवाने के लिए अब लंबी लाइन में नहीं लगना होगा. मरीज सीधे क्यूआर कोड स्कैन करके अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. आयुषमान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक 25 करोड़ से ज्यादा डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. इस सर्विस का सबसे ज्यादा फायदा बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों ने उठाया है. रोजाना करीब 4 लाख मरीज इस डिजिटल सुविधा का शानदार इस्तेमाल कर रहे हैं.
स्मार्टफोन से अस्पताल का पर्चा बनवाना हुआ बहुत आसान, 25 करोड़ डिजिटल OPD रजिस्ट्रेशन पूरे. (File Photo : IANS)
नई दिल्ली: भारत में डिजिटल हेल्थ का दायरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है. अब अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों की भीड़ कम होने लगी है. लोग स्मार्टफोन से क्यूआर कोड स्कैन करके अपना ओपीडी रजिस्ट्रेशन आसानी से कर रहे हैं. आयुषमान भारत डिजिटल मिशन के तहत एक नई सुविधा शुरू की गई थी. इसका नाम आभा आधारित स्कैन एंड रजिस्टर सर्विस है. इस सर्विस के जरिए अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ओपीडी रजिस्ट्रेशन पूरे हो चुके हैं. हर दिन करीब चार लाख लोग इस शानदार सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. यह डिजिटल सिस्टम पेपरवर्क को पूरी तरह से खत्म कर रहा है. इससे मरीजों का कीमती समय भी बच रहा है और अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर हो रही है.
अस्पतालों में क्यूआर कोड से रजिस्ट्रेशन का ये सिस्टम आखिर कैसे काम करता है?
अक्टूबर 2022 में इस खास सर्विस की शुरुआत की गई थी. मरीज आभा इनेबल्ड हेल्थ ऐप के जरिए अस्पताल में लगा क्यूआर कोड स्कैन करते हैं. स्कैन करने के बाद मरीज को अपनी सहमति देनी होती है. इसके तुरंत बाद उनकी सारी डिटेल अस्पताल के सिस्टम में पहुंच जाती है. इससे रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगने वाला समय बहुत कम हो जाता है. यह सर्विस देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है. कुल 756 जिलों के 30,800 से ज्यादा अस्पतालों में यह सुविधा मौजूद है. इनमें 24,000 सरकारी और 6,400 प्राइवेट अस्पताल शामिल हैं.
डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन में कौन सा राज्य और अस्पताल सबसे आगे चल रहा है?
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का सबसे ज्यादा इस्तेमाल बिहार के लोग कर रहे हैं. बिहार में अब तक 7.3 करोड़ से ज्यादा डिजिटल रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है. यूपी में 4.09 करोड़ और आंध्र प्रदेश में 3.38 करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए हैं. जम्मू कश्मीर भी 1.39 करोड़ रजिस्ट्रेशन के साथ टॉप लिस्ट में शामिल है. अगर अस्पतालों की बात करें तो दिल्ली एम्स सबसे आगे है. दिल्ली एम्स में 54.29 लाख से ज्यादा स्कैन एंड रजिस्टर ट्रांजैक्शन हुए हैं. इसके बाद एम्स भोपाल और एम्स भुवनेश्वर का नाम आता है. एम्स पटना और एम्स रायपुर भी इस शानदार लिस्ट में पीछे नहीं हैं.
सीनियर सिटीजन और गर्भवती महिलाओं को इस सर्विस से क्या फायदा मिल रहा है?
इस डिजिटल सर्विस ने अस्पताल के चक्कर लगाने वाले मरीजों की जिंदगी बहुत आसान कर दी है. खासकर सीनियर सिटीजन और गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत मिली है. उन्हें अब बार-बार फॉर्म भरने और लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं है. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ डॉ सुनील कुमार बरनवाल ने कहा, ‘यह माइलस्टोन डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में बढ़ते भरोसे को दिखाता है’. उन्होंने बताया कि इस सर्विस ने मरीजों की सुविधा बढ़ाने के साथ ही अस्पतालों की एफिशिएंसी भी सुधारी है. यह सुविधा अब एम्स और मेडिकल कॉलेज के अलावा ईएसआईसी और रेलवे अस्पतालों में भी चालू हो गई है.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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