Last Updated:
Loan Growth : आरबीआई ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि देश में होम और ऑटो लोन से ज्यादा गोल्ड लोन की डिमांड बढ़ रही है. इसकी वजह ये है कि एक तो सोने की कीमत अभी आसमान छू रही है और दूसरी कि गोल्ड लोन लेने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती. बीते एक साल में इसमें 69 फीसदी का तगड़ा उछाल दिख रहा है.
गोल्ड लोन पर प्रोसेसिंग फीस अमूमन नहीं लगती है.
नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. आरबीआई ने बताया है कि देश में न तो ऑटो लोन में इतनी तेज ग्रोथ दिख रही और न ही होल लोन में, बल्कि लोग अब कुछ अलग ही तरह का लोन लेने पर जोर दे रहे हैं. इस लोन को पसंद करने का सबसे बड़ा कारण ये भी है कि यहां पैसे पाने के लिए न तो पेपरवर्क करना पड़ता है और न ही घंटों का इंतजार. बस आप ब्रांच तक जाते हैं और खटाक से पैसा खाते में पहुंच जाता है.
आरबीआई ने बताया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का सोने के गहनों पर दिया गया कर्ज जून में 69 फीसदी उछलकर 3.42 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह एक साल पहले 2.02 लाख करोड़ रुपये था और कर्ज से जुड़े सभी बड़े खंड में यह सबसे तेज बढ़ोतरी है. जून 2024 में तो यह आंकड़ा 1.44 लाख करोड़ रुपये था. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की कुल कर्ज वृद्धि में खुदरा कर्ज प्रमुख चालक बना रहा. जून 2026 में खुदरा कर्ज में सालाना आधार पर 20.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 14.3 फीसदी थी.
होम और ऑटो लोन से भी आगे
आरबीआई ने बताया कि खुदरा कर्ज श्रेणी में होम लोन, ऑटो लोन और सोने के गहने गिरवी रखकर दिए जाने वाले कर्ज में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे उपभोक्ता कर्ज की रफ्तार बनी रही. वहीं, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए दिए गए कर्ज में जून 2026 में सालाना आधार पर 17.9 फीसदी की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 5.1 फीसदी थी.
इंडस्ट्री को लोन बांटने में आई सुस्ती
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि इसी दौरान औद्योगिक क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज की रफ्तार धीमी पड़ी. जून 2026 में इसमें 6.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह 10.3 फीसदी थी. इसकी मुख्य वजह बुनियादी ढांचा क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज में सुस्ती रही, जिसका औद्योगिक कर्ज में सबसे बड़ा हिस्सा है. सेवा क्षेत्र को एनबीएफसी द्वारा दिए जाने वाले कर्ज की वृद्धि भी घटकर 17.6 फीसदी रह गई, जो जून 2025 में 22.4 फीसदी थी. मुख्य रूप से व्यापार और परिवहन क्षेत्र के परिचालकों को दिए जाने वाले कर्ज में धीमी वृद्धि के कारण सेवा क्षेत्र के कर्ज में वृद्धि कम रही. हालांकि, वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में कर्ज वृद्धि मजबूत बनी रही.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
और पढ़ें

