इस वक्त सारी पॉलिटिक्स चार मुद्दों के इर्द गिर्द घूम रही है. और ये चार मुद्दे ऐसे हैं, जिनकी बात करके नरेंद्र मोदी के कोर वोटर पर निशाना लगाया जा रहा है. फिर चाहे वो राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा हो, जिस पर संसद से लेकर यूपी की विधानसभा तक भयंकर हंगामा हो रहा है. फिर चाहे वह छात्रों का मुद्दा हो, जिसके जरिए नरेंद्र मोदी के यूथ वोटर्स में सेंध लगाने की कोशिश की जा रही है. या ई-20 का मुद्दा हो, जिसके जरिए उत्तर भारत में बीजेपी के शहरी वोटर्स में सेंध लगाने का प्रयास चल रहा है. या फिर यूजीसी के मामले को लेकर सवर्ण वोटर्स की नाराजगी की बात हो, जिसे भुनाने की कोशिश इंडी वाले करने लगे हैं.
आज इन सभी के बारे में आपको डिटेल में बताएंगे कि कैसे इन चारों मुद्दों पर मार मची हुई है. नरेंद्र मोदी के कोर वोटर्स पर निशाना किस तरह से लगाया जा रहा है. उसका सबसे बड़ा सबूत चढ़ावा चोरी के मामले पर चल रही पॉलिटिक्स है. आप देखिए कि ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है. एसआईटी बनी हुई है. आरोपी अरेस्ट हो चुके हैं. सिस्टम में बदलाव हो चुके हैं.
बड़ा रामभक्त दिखने की कोशिश में इंडी वाले
फिर भी इंडी वालों ने संसद से यूपी तक गजब बवाल काटा हुआ है. इंडी वाले तो आजकल ऐसा दिखा रहे हैं कि इनसे बड़ा रामभक्त कोई नहीं है. जबकि यही लोग राम मंदिर की बात करने से कतराते थे. राम मंदिर जब बन रहा था, जब प्राण प्रतिष्ठा हुई थी तो उसे बीजेपी-आरएसएस का कार्यक्रम बता दिया था. तब इनमें से ही कुछ लोग कहते थे कि मंदिर से क्या होता है, मंदिर से पेट नहीं भरता. कोई कह रहा था कि बेकार में मंदिर बनवा रहे. कोई कह रहा था जल्दबाजी में मंदिर बना दिया, मुहुर्त ठीक नहीं है, वास्तु ठीक नहीं है, करोड़ों खर्च करने की क्या जरूरत है. लेकिन आज की डेट में ये राम मंदिर के नाम पर रोज हल्ला मचा रहे हैं, संसद चलने नहीं दे रहे हैं.
इसी मुद्दे पर आज राज्यसभा में बवाल हो गया है. मल्लिकार्जुन खरगे ने चढ़ावा चोरी पर सीधे पीएम मोदी को घेरा. जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू भड़क गए. किरण रिजिजू ने कहा कि पहले विपक्ष भगवान राम का अपमान करने के लिए देश से माफी मांगे, उसके बाद सरकार से जवाब मांगिए.
यूपी विधानसभा में सपा का हंगामा
इधर संसद में इंडी ब्लॉक ने राम मंदिर को मुद्दा गर्माया हुआ है, उधर यूपी विधानसभा में भी यही सब चल रहा है. विधानसभा के अंदर और बाहर सपा विधायकों ने इस मुद्दे पर खूब हंगामा किया. विधानसभा के अंदर तो ऐसा बवाल मच गया कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना अपनी सीट से उठ गए. सीएम योगी और राम मंदिर से जुड़े विवादित पोस्टर लहराने पर विधानसभा स्पीकर गुस्से में आ गए. और सपा के एक विधायक को पूरे सत्र के लिए निष्कासित कर दिया. सतीश महाना ने भरे सदन में कहा, ‘मैं आदेश देता हूं इनको सचिन को बाहर निकाला जाए, सचिन को पूरे सत्र के लिए बाहर निकाला जाता है. गुंडागर्दी करोगे यहां.’
यूपी विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ की एडिटेड फोटो लहराने पर भड़के स्पीकर सतीश महाना ने सपा विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र से बाहर निकाल दिया. सीएम योगी आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने कथित तौर पर सीएम की एडिटेड फोटो सदन में लहराई. इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी नाराज़गी जताई. पहले चेतावनी दी, फिर सदन से बाहर करने की बात कही. विधायक के नहीं मानने पर महाना ने सदस्यता रद्द करने की चेतावनी दी!
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने रानीगंज विधायक आरके वर्मा के आचरण पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनका आचरण ऐसा है कि उन्हें एथिक्स कमेटी के पास भेजकर सदस्यता खत्म करने की कार्रवाई तक की जा सकती है.
‘राम मंदिर को चंदे का रसीद तो दिख दें’
इस दौरान सतीश महाना ने यह भी कहा, ‘मुझे कितना अच्छा लग रहा है. मुझे कितना संतोष हो रहा है. सुहैब अंसारी साहब राम मंदिर की बात कर रहे हैं. अच्छा लग रहा है कि उमर अली भाई भी राम मंदिर की बात कर रहे हैं. मुझे और अच्छा लग रहा है कि शाहिद मंजूर साहब भी राम मंदिर की बात कर रहे हैं. इन्होंने शुरुआत से लेकर आखिर तक सिर्फ राम मंदिर का विरोध किया है. आप में से किसी ने चंदा दिया हो, तो रसीद लेकर आ जाएं, भाई, यहां पर बीच में आप लोगों में से किसी ने कुछ चंदा दिया हो, तो रसीद लेकर आ जाओ, भैया! ज़रा देखें तो सही. आपका कौन सा पैसा चोरी हुआ है? ज़रा रसीद लेकर आ जाओ, जितने खड़े हो यहां पर.’
इस बवाल के बाद भी सपा विधायकों ने राम मंदिर का मुद्दा नहीं छोड़ा. यूपी विधानसभा के अंदर बवाल हुआ तो बाहर सीएम योगी ने विपक्ष को घेर लिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘संसद के अंदर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सांसदों और नेताओं का जो आचरण रहा है. संतों के प्रति जिस प्रकार के आक्षेप वहां किए गए, ये सीधे-सीधे सनातन धर्म का अपमान है. इस पूरे प्रकरण में जो लोग पकड़े गए हैं इनका भारतीय जनता पार्टी या साधु संतों से कोई लेना देना नहीं.
अखिलेश-राहुल का सवर्ण वोटर वाला प्लान
अखिलेश-राहुल और इंडी को लग रहा है कि राम मंदिर का मुद्दा उठाकर वो बीजेपी के उन कोर वोटर में सेंध लगा सकते हैं, जो कोर वोटर राम मंदिर आंदोलन के समय से बीजेपी के साथ है और टस से मस नहीं हुआ. पहले इन लोगों ने पीडीए के नाम पर हिंदू वोटों को तोड़ने की राजनीति की, जिसमें ये संविधान खतरे में है और लोकतंत्र खतरे में है कहकर 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ा फायदा भी उठा ले गए. अब यही काम सवर्ण वोटर्स के साथ हो रहा है. आप देखिए कि यूपी में किस तरह से सवर्ण वोटरों को अपने साथ लाने की होड़ लगी है.
अखिलेश यादव ने बुधवार लखनऊ में ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ बुलाया है, जिसके जरिए ब्राह्मण और सवर्ण समाज तक पहुंचने की रणनीति है. समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे ‘जनेश्वर मिश्र’ की जयंती पर ब्राह्मण सम्मेलन का कार्यक्रम रखा गया है. जनेश्वर मिश्र सपा के ब्राह्मण चेहरा रहे हैं. दावा है कि समाजवादी पार्टी के इस कार्यक्रम में संत समाज के लोग भी शामिल होंगे. इसके अलावा अखिलेश यादव ने सपा नेता सनातन पांडे और पवन पांडे को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर आगे किया हुआ है. वहीं सात बार के विधायक माता प्रसाद पांडे फिलहाल विपक्ष के नेता के तौर पर काम कर रहे हैं.
दरअसल, अखिलेश यादव सिर्फ PDA के भरोसे नहीं बैठना चाहते हैं. वह PDA के साथ सवर्ण वोटों को भी साधने की कोशिश में हैं. सवर्ण वोटरों की बीजेपी से नाराजगी का सियासी फायदा उन्हें दिख रहा है. 2024 के चुनाव में अखिलेश यादव ने गैर यादव OBC और दलित वोटों को अपने साथ जोड़ा था. लेकिन 2027 के चुनाव में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए वो सवर्ण वोटरों को भी अपने साथ जोड़ने में लगे हैं. इसके अलावा मायावती भी ब्राह्मण वोटरों को साधने में लगी है. 2007 के दलित-ब्राह्मण सामाजिक गठजोड़ को फिर से बनाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन इस राजनीति पर बीजेपी कह रही है कि अखिलेश कोई भी सम्मेलन कर लें, 2027 नहीं बचेगा.
बांकीपुर रिजल्ट से बम-बम विपक्ष
पीएम मोदी के हिंदू वोटों में सेंध लगाने के लिए अखिलेश खूब हाथ पैर मार हैं. जो समाजवादी पार्टी बाबरी के मुद्दे पर ये कहती थी कि उन्हें हिंदू वोट मिले ना मिले परवाह नहीं. वो पार्टी आज भगवान राम और हनुमान जी को अपने मंच पर बुला बुलाकर पूज रही हैं. आप देखिए कि दो दिन पहले अखिलेश यादव के मंच पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी के भेष में आए कलाकारों को अखिलेश यादव ने 51 हजार रुपये देखकर उन्हें सम्मानित किया.
बिहार और एमपी के उपचुनाव में बीजेपी की हार में इंडी वालों को अपने लिए कुछ उम्मीद दिख रही है. नहीं तो जिस तरह से बीजेपी ने बंगाल जीता था, उससे इंडी वालों के होश उड़े हुए थे. बंगाल के नतीजे देखकर अखिलेश यादव भी टेंशन में आ गए थे, क्योंकि अगला नंबर यूपी चुनाव का है. इसलिए अखिलेश ये माहौल बना रहे हैं कि बांकीपुर में बीजेपी के खिलाफ काफी नाराजगी थी और ये नाराजगी हर जगह है.
बीजेपी के लिए कितने अहम सवर्ण वोट?
आप देखिए कि यूपी में अपर कास्ट किस तरह से बीजेपी को सपोर्ट करता है. किस तरह से बीजेपी को वोट करता है. CSDS लोकनीति के डेटा के मुताबिक, 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अपर कास्ट वोट का 85 फीसदी हिस्सा बीजेपी गठबंधन को मिला था. वहीं सपा के खाते में 9%, जबकि कांग्रेस और बीएसपी को एक-एक फीसदी सवर्ण वोट मिले थे.
वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन को 79% अपर कास्ट वोट मिले थे, जबकि इंडी गठबंधन को 16 फीसदी वोट मिले थे. यानी 2022 और 2024 में अपर कास्ट वोट बीजेपी के साथ बना रहा, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें घट गई थी. इसके बावजूद अपर कास्ट वोटर बीजेपी से जुड़े रहे.
अपरकास्ट वोटर को लेकर इंडी वाले इतना हाथ पैर इसलिए भी मार रहे हैं, क्योंकि पिछले कुछ महीने से यूजीसी के मुद्दे को लेकर अपरकास्ट वोटर्स में बड़ी नाराजगी दिखी. ये मुद्दा सोशल मीडिया पर अब तो ठंडा है, लेकिन अपरकास्ट वोटर्स में असंतोष का जो भाव है, वो कई बार दिख जाता है. जैसे आप देखिए कि राजस्थान में इसी को लेकर एक बड़ा प्रोटेस्ट हो गया.
राजपूत करणी सेना ने भी फूंका बिगुल
जयपुर में राजपूत करणी सेना ने सोमवार को UGC के नियमों को वापस लेने के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में भारी भीड़ जुटी. UGC Roll back के नारे लगे. इस प्रदर्शन के दौरान खूब हंगामा भी हो गया. पुलिस ने राजपूत करणी सेना पर लाठीचार्ज कर दिया. वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. पुलिस और राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं र्के बीच धक्का मुक्की भी हो गई. इस लाठीचार्ज के खिलाफ राजपूत करणी सेना ने धरना भी दिया. आरोपी पुलिसवालों पर एक्शन लेने की मांग की. राजपूत करणी सेना अल्टीमेटम दे रही है कि अगर UGC के नियम वापस नहीं लिए तो अगड़ी जातियां बीजेपी को वोट नहीं देगी.
करणी सेना प्रमुख महिपाल सिंह मकराना ने कहा, ‘सवर्णो की ताकत की शुरुआत जयपुर से कर दी गई है. उसके बाद दिल्ली की हिलाने की बारी है. हम भगवान की कसम खाते हैं. आने वाले चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देंगे…!’
इंडी वाले इसका भी फायदा उठाने के बारे में सोच रहे होंगे कि कैसे अपरकास्ट वोटर जो नरेंद्र मोदी और बीजेपी का बेस रहे हैं, उसमें सेंध लगा दी जाए. इसी तरह से यूथ वोटर जो नरेंद्र मोदी के कोर वोटर में एक रहा है, उसमें जेन जी के नाम पर सेंध लगाने की कोशिश हो रही है. Genz के मुद्दे पर तो इंडी में मार मची हुई है. अखिलेश यादव हो या राहुल गांधी या केजरीवाल हर कोई खुद को GenZ का लीडर साबित करने में लगा है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी पेपर लीक के मुद्दे को जिंदा रखने के लिए कभी अमित शाह को टारगेट किया जा रहा. कभी पीएम मोदी को टारगेट किया जा रहा है. इस मुद्दे को यूपी चुनाव में भुनाने के लिए 8 अगस्त को राहुल गांधी प्रयागराज में पेपर लीक, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा के मुद्दे पर बड़ा कार्यक्रम करने वाले हैं.
यूपी चुनाव का GenZ फैक्टर
ये सब इसलिए हो रहा है ताकी GenZ को अपने पाले में कर लिया जाए. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ मतदाता है, जिनमें से 21.19 फीसदी यानी करीब 3 करोड़ 27 लाख वोटर्स 18 से 25 साल के बीच उम्र के हैं. आप देखिए कि 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी के 25 साल उम्र तक के वोटर्स का 45% वोट बीजेपी गठबंधन को मिला, जबकि करीब इतना ही युवा वोट सपा-कांग्रेस गठबंधन को भी मिले थे. इससे पहले 2019 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन को 53 फीसदी युवाओं ने वोट दिए थे, जबकि सपा-बसपा गठबंधन को 38% वोट गए थे.
राहुल गांधी लगातार जंतर मंतर की बात तो कर रहे हैं, लेकिन झारखंड में छात्र आंदोलन पर वह चुप हैं. क्योंकि वहां इंडी गठबंधन की सरकार है, इसलिए इंडी वाले सन्नाटे में हैं. छात्रों को वहां पर प्रोटेस्ट करते हुए 11-12 दिन हो चुके हैं.
E-20 के सहारे सियासी लौ जलाने की कोशिश में केजरीवाल
इंडी वालों का झारखंड पर ध्यान नहीं है, क्योंकि पूरा फोकस तो नरेंद्र मोदी को घेरने पर लगा रखा है. इधर अखिलेश ने राम मंदिर का मुद्दा पकड़ा हुआ है, राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे पर जोर लगा रहे हैं. उधर अरविंद केजरीवाल ने नया मोर्चा खोल दिया. अरविंद केजरीवाल आज E-20 के मुद्दे पर सड़क पर उतर गए. वह पीएम आवास की तरफ मार्च करने लगे. अरविंद केजरीवाल का दावा है कि वो ई20 के मु्द्दे पर 2 लाख से ज्यादा अर्जियां लेकर पीएम आवास जा रहे थे, लेकिन पीएम मोदी ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया है. अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि ट्रंप पीएम मोदी के सिर पर बैठा हुआ है.
ई-20 का मुद्दा उठाकर भी विपक्ष पीएम मोदी के उस वोट बैंक में सेंध लगाने में लगा है, जो बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है. ये उत्तर भारत के अर्बन वोटर्स हैं. उत्तर भारत के अर्बन इलाकों में बीजेपी की मजबूत पकड़ मानी जाती है. ई-20 के मुद्दे को गर्माकर उसमें सेंध लगाने की तैयारी है. अगर आप अर्बन वोटर्स का वोटिंग पैटर्न देखेंगे तो 2024 के लोकसभा चुनाव में शहरी वोटरों का 43% हिस्सा बीजेपी गठबंधन को गया था, जबकि 35 फीसदी इंडी गठबंधन को मिले थे. वहीं बड़े शहरों में 44 फीसदी वोट बीजेपी गठबंधन को मिले थे, जबकि 36 फीसदी वोट इंडी गठबंधन को.

