तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 सांसदों को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है. एक तरफ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी दावा कर रहे हैं कि सभी सांसद पूरी तरह एकजुट हैं, वहीं दूसरी ओर तीन सांसदों की लगातार दूसरी बार एनडीए संसदीय दल की बैठक से गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
संसद परिसर में मंगलवार को हुई एनडीए संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक में टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) का दामन थामने वाले 20 सांसदों में से केवल 17 सांसद ही पहुंचे. अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान लगातार दूसरी बार इस बैठक से दूर रहे. खास बात यह है कि पिछली बैठक में भी यही तीनों सांसद शामिल नहीं हुए थे.
हालांकि, शाम को संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि इन तीन सांसदों की गैरमौजूदगी को किसी तरह के मतभेद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उनका कहना था कि जहां भी इन सांसदों को बुलाया जाएगा, सभी 20 सांसद एक साथ मौजूद रहेंगे.
लेकिन राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि अगर सब कुछ सामान्य है, तो फिर लगातार दूसरी बैठक से वही तीन सांसद क्यों दूर रहे?
इसी बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने भी बड़ा दावा कर दिया. उन्होंने कहा कि बागी सांसदों में से कुछ नेता उनके संपर्क में हैं और पार्टी में वापसी की संभावनाएं तलाश रहे हैं. उनके इस बयान के बाद बागी खेमे की एकजुटता पर और सवाल उठने लगे हैं.
दिलचस्प बात यह रही कि एनडीए की बैठक से दूर रहने वाले यही तीनों सांसद बाद में बंग भवन में सुवेंदु अधिकारी की तरफ से आयोजित दोपहर के भोज में शामिल हुए. इस लंच में सभी 20 सांसद मौजूद रहे. सांसदों के लिए पारंपरिक बंगाली व्यंजनों, जिनमें हिल्सा मछली, झींगे और छोले की दाल जैसे पकवान शामिल थे, का इंतजाम किया गया था.
इस बैठक में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी मौजूद थे. दोनों नेताओं को टीएमसी में हुई बगावत के प्रमुख रणनीतिकारों में माना जाता है. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि बैठक से गैरहाजिर तीनों सांसद भी एनडीए के साथ हैं. उनके मुताबिक, यह अनुपस्थिति एक रणनीतिक फैसला है और इसे किसी तरह की नाराजगी या मतभेद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
उधर, पूरे घटनाक्रम में एक और अहम पहलू यह है कि लोकसभा अध्यक्ष ने अभी तक इन 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय को मंजूरी नहीं दी है. लोकसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर इन सभी सांसदों का नाम अब भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के रूप में दर्ज है. इतना ही नहीं, सदन में जब इनमें से कुछ सांसदों ने अपनी बात रखी तो टीवी प्रसारण में भी उनकी पार्टी टीएमसी ही दिखाई गई.
स्पीकर के फैसले तक इन सांसदों को लोकसभा में टीएमसी सांसदों से अलग बैठाया गया है. सूत्रों के मुताबिक, उनके विलय की प्रक्रिया में कुछ तकनीकी अड़चनें हैं.
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को याचिका देकर सभी 20 सांसदों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग कर चुके हैं. बाद में सुवेंदु अधिकारी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में स्पीकर का फैसला इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा.

