नई दिल्ली. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर नया खुलासा हुआ है. पता चला है कि केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से समझौते के तहत पहले धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बात नहीं बनी. उन्होंने 25 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा था कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन ‘बेहद दुखी’ है और यह मुद्दा उनके लिए ‘व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है’.
दरअसल, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को उम्मीद थी कि सीजेपी और विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता इस बात के लिए तैयार हो जाएंगे कि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय का पोर्टफोलियो वापस ले लिया जाए, लेकिन वे कैबिनेट मंत्री बने रहें. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले दो मंत्रियों – जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह – ने सीजेपी के साथ बातचीत में सुझाव दिया था कि नए शिक्षा मंत्री के आने और CJP की अन्य सभी सहायक मांगें पूरी होने पर छात्र अपना विरोध-प्रदर्शन खत्म कर सकते हैं.
सरकार के एक सूत्र ने कहा, “सरकार ने वह प्रस्ताव रखा था. लेकिन प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े थे कि प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए.” CJP के सूत्रों ने पुष्टि की कि मंत्रियों ने कहा कि कैबिनेट में बदलाव करना प्रधानमंत्री का अधिकार है, लेकिन फेरबदल हो सकता है और शिक्षा मंत्री की जगह किसी और को लाया जा सकता है. CJP के सूत्र ने कहा, “हालांकि, CJP इसे मानने को तैयार नहीं था.”
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सीजेपी का कड़ा रुख
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया कि मुआवज़े और विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी FIR वापस लेने की CJP की दो मांगें पहले ही मान ली गई थीं. उन्होंने कहा कि आम तौर पर विरोध-प्रदर्शनों के दौरान, सिवाय उन मामलों के जिनमें सार्वजनिक संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचा हो, FIR हमेशा वापस ले ली जाती हैं. सूत्र ने कहा, “हमने परीक्षा लीक और रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले NEET उम्मीदवारों के परिवारों को उचित मुआवज़ा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी.”
सरकार के एक अन्य सूत्र ने कहा कि इसलिए, सरकार को उम्मीद थी कि CJP मंत्रालय में बदलाव के लिए सहमत हो जाएगा. बातचीत के रास्ते खोलने में हुई देरी के कारण गतिरोध पैदा हो गया था और CJP प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग पर अड़ा हुआ था. प्रदर्शनकारियों के अड़े रहने, जनता का दबाव बढ़ने और बातचीत के कई दौर नाकाम रहने के बाद, सरकार ने आखिरकार उनकी मांग मान ली. प्रधान ने 25 जुलाई की दोपहर अपने इस्तीफे की घोषणा की, जिसके बाद CJP ने राष्ट्रीय राजधानी में अपना 36 दिन का विरोध-प्रदर्शन आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया.
सीजेपी ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, नीट विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और 20 मार्च को संगठन के ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को वापस लिए जाने की मांग की थी.
सीजेपी ने शनिवार दोपहर शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. यह सीजेपी और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत थी. इसमें केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व नड्डा और सिंह ने किया, जबकि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास के अलावा आशुतोष रांका शामिल थे. रांका ने कहा, “चूंकि, सरकार ने 36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद हमारी सभी मांगें मान ली हैं, इसलिए हम सभी से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध स्थल से हट जाएं और घर लौट जाएं.”

