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सीजेपी प्रोटेस्ट पर सीजेआई सूर्यकांत का बयान खूब वायरल हुआ. सीजेआई ने बीते दिनों सीजेपी प्रोटेस्ट पर सुनवाई की मांग पर कहा था, ‘मेरा समय बर्बाद मत करो. मेरे पास वीडियो देखने का वक्त नहीं.’ हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसकी सच्चाई बताई. सीजेआई सूर्यकांत ने आज यानी शुक्रवार को मीडिया की कुछ रिपोर्टों पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े मामले में उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया. यह याचिका तो दायर ही नहीं हुई थी.
CJI Suryakant on CJP Protest: CJI सूर्यकांत ने कहा था कि ‘हमारे पास समय नहीं, वीडियो भी नहीं देखना’
CJP के विरोध-प्रदर्शनों पर कोई याचिका दायर नहीं की गई; मीडिया ने बिना सोचे-समझे रिपोर्ट किया कि मैंने अर्जेंट सुनवाई से इनकार कर दिया: CJI सूर्य कांत
जंतर-मंतर पर सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन चल रहा है. बीते दिनों सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग की गई. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत टिप्पणी काफी चर्चा में रही. सीजेआई सूर्यकांत ने तब कहा था कि उनके पास वीडियो देखने का वक्त नहीं है. उनका समय बर्बाद न किया जाए. यह बयान जब वायरल हुआ तो खुद सीजेआई सूर्यकांत ने उस टिप्पणी की सच्चाई बताई है. जी हां, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आज यानी शुक्रवार को मीडिया से नाराजगी जताई. उनका मानना है कि मीडिया ने गलत रिपोर्टिंग की.
बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, मीडिया की रिपोर्टिंग को गलते बताते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया. सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दायर ही नहीं हुई थी. सिर्फ एक प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) दिया गया था. गौरतलब है कि मीडिया में यह खबर आई थी कि सीजेआई सूर्यकांत ने 22 जुलाई को एक याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि जंतर-मंतर पर संसद मार्च के दौरान पुलिस ने बर्बरता की थी.
सीजेआई ने बताई बयान की सच्चाई
हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने अब उस बयान की सच्चाई सबके सामने बताई है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘किसी व्यक्ति ने इसका यानी सीजेपी प्रोटेस्ट का जिक्र नहीं किया था. मीडिया ने गलत रिपोर्ट किया कि मैंने मामले को लिस्ट करने से इनकार कर दिया. यह केवल एक रिप्रेजेंटेशन था और लोगों ने बिना सोचे-समझे इसकी रिपोर्टिंग शुरू कर दी. मैंने रजिस्ट्री से पता किया और कोई भी सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़ा कागज दायर नहीं किया गया था.
22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?
दरअसल, 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने एक मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर ज्यादती की थी. उन्होंने मामले को लिस्ट करने की मांग की और कहा कि पुलिस की बर्बरता के वीडियो सबूत मौजूद हैं. उन्होंने कहा था, ‘जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन चल रहा है. पुलिस बर्बर कार्रवाई कर रही है…’
सूर्यकांत ने क्या टिप्पणी की थी
इस पर उस दिन सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमारे पास समय नहीं है. कृपया हमारा समय बर्बाद न करें और अपना भी नहीं. हमारे आपका समय हमारे समय से अधिक कीमती है.’ इसके बाद वकील ने कहा था कि वह कुछ अहम मांगें कर रहे हैं, जिनमें सरकार की ओर से NEET का निष्पक्ष आयोजन और बार-बार पेपर लीक होने के कारण एनटीए को भंग करना शामिल है.
‘हमारे पास टाइम नहीं है’
जब सुप्रीम कोर्ट ने अगला मामला पुकारा तो वकील ने जोर देकर कहा कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती दिखाने वाले वीडियो पेश कर सकते हैं. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ‘हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारे पास देखने का टाइम नहीं है.’ सीजेआई की इस टिप्पणी पर खूब चर्चा हुई. इसकी आलोचना भी हुई.
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