अंबाला: अक्सर लोग किसी बीमारी से परेशान होकर उम्मीद के साथ होम्योपैथिक दवाएं शुरू करते हैं. कई मरीज महीनों तक दवा लेते हैं, लेकिन जब राहत नहीं मिलती तो उनकी जुबान पर एक ही बात होती है कि “होम्योपैथी की दवा से कोई फर्क नहीं पड़ा.” लेकिन अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. रजिता का कहना है कि हर बार दवा बेअसर नहीं होती. कई बार मरीजों की छोटी-छोटी लापरवाहियां ही इलाज के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन जाती हैं. दरअसल, होम्योपैथिक इलाज केवल दवा खाने का नाम नहीं है, बल्कि यह अनुशासित जीवनशैली पर आधारित उपचार पद्धति मानी जाती है.
दवा के साथ सावधानियां भी हैं जरूरी
इस बारे में लोकल 18 से बातचीत में अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. रजिता ने बताया कि डॉक्टर जब दवा देते हैं, तो उसके साथ कुछ जरूरी सावधानियां भी बताते हैं. लेकिन अधिकांश लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते. यही कारण है कि बीमारी लंबे समय तक बनी रहती है और मरीज धीरे-धीरे निराश होने लगता है.
दवा लेने का सही तरीका जानना जरूरी
उन्होंने बताया कि हर होम्योपैथिक दवा को लेने का तरीका अलग होता है. कुछ दवाएं खाली पेट लेनी होती हैं, जबकि कई दवाओं को भोजन से लगभग 20 मिनट पहले या 20 मिनट बाद लेना जरूरी होता है. इस दौरान पानी पीने से भी बचने की सलाह दी जाती है. लेकिन लोग जल्दबाजी में दवा लेने के तुरंत बाद चाय, कॉफी या पानी पी लेते हैं, जिससे दवा का प्रभाव कम हो सकता है.
दवा को सही तरीके से रखें और सेवन करें
डॉ. रजिता के अनुसार, दवा को रखने का तरीका भी बेहद महत्वपूर्ण है. होम्योपैथिक दवाइयों को धूप, गर्मी और तेज खुशबू से दूर रखना चाहिए. साथ ही, दवा की शीशी का ढक्कन हमेशा अच्छी तरह बंद रखना चाहिए. उन्होंने बताया कि कई मरीज दवा की गोलियां हाथ से निकालकर खा लेते हैं, जबकि उन्हें ढक्कन या साफ चम्मच की मदद से निकालना चाहिए और जीभ के नीचे धीरे-धीरे घुलने देना चाहिए.
खान-पान और दिनचर्या का भी रखें ध्यान
उन्होंने बताया कि कुछ दवाओं के दौरान प्याज, लहसुन, इलायची, हींग और अदरक जैसी तेज गंध वाली चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है. लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग दवा के साथ तला-भुना भोजन, फास्ट फूड और मसालेदार स्नैक्स खाते रहते हैं. खासकर बच्चों में शाम के समय मैगी, चाउमीन और जंक फूड खाने का चलन बढ़ गया है, जो इलाज की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.
डॉ. रजिता ने कहा कि कई माता-पिता बच्चों को दवा तो समय पर दे देते हैं, लेकिन उनकी दिनचर्या पर ध्यान नहीं देते. देर रात तक मोबाइल चलाना, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालती है.
बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना पड़ सकता है भारी
उन्होंने सुबह योग और हल्का व्यायाम करने की सलाह दी, क्योंकि इससे शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होती है और रिकवरी में मदद मिलती है. उन्होंने एक और गंभीर चिंता जताई कि आजकल इंटरनेट पर दवाइयों के नाम देखकर लोग खुद ही होम्योपैथिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं. उनके अनुसार, बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के दवा लेना आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है.
डॉ. रजिता का कहना है कि मरीज को दवा के साथ धैर्य, परहेज और डॉक्टर की सलाह का भी उतना ही सम्मान करना चाहिए. उनके मुताबिक, होम्योपैथी कोई चमत्कार नहीं, बल्कि संयम और सही पालन पर आधारित उपचार पद्धति है. जब मरीज दवा के साथ अनुशासन अपनाता है, तभी इलाज का वास्तविक असर दिखाई देता है.

