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संसद मानसून सत्र के लिए सरकार ने जो रणनीति तैयार की है, उसके मुताबिक महत्वपूर्ण आर्डिनेंस हैं पहले उन्हें पारित किया जाएगा. ये महत्वपूर्ण आर्डिनेंस हैं – इनकम टैक्स संशोधन, राष्ट्रीय सम्मान को नुक़सान पहुंचाने पर सज़ा देने सम्बंधित और सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या के सम्बंधित समेत कई बिल शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक सरकार के रणनीतिकार पूरी तरीके से आश्वस्त हैं कि किसी भी बिल के लिए अगर उसे दो-तिहाई नंबर की जरूरत पड़ती है, तो उसके पास सदन में जरूरी नंबर हैं.
एनडीए को भरोसा है कि वह सभी जरूरी बिलों को पारित कर सकेगी. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी राजनीतिक और संसदीय रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को प्रस्तावित एनडीए संसदीय दल की बैठक का नाम बदलकर ‘मंगल मिलन’ रखा गया है.
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को राज्यसभा में वंदे मातरम से संबंधित अध्यादेश पेश किया जा सकता है. इसके अलावा सरकार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और अध्यादेशों को प्राथमिकता के आधार पर पारित कराने की तैयारी में है.
जानकारी के मुताबिक, जल्द ही शिवसेना के दोनों धड़ों के विलय से संबंधित अधिसूचना जारी हो सकती है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के एनसीपीसीआई में शामिल होने के बाद उस दल को मान्यता मिलने की संभावना भी जताई जा रही है. यदि ऐसा होता है, तो दोनों धड़ों को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया जा सकता है.
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मानसून सत्र के लिए जो रणनीति बनाई है, उसमें पहले महत्वपूर्ण अध्यादेशों और विधेयकों को पारित कराने पर जोर रहेगा. इनमें आयकर संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान को नुकसान पहुंचाने पर सजा से संबंधित विधेयक और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव समेत कई अहम बिल शामिल हैं.
सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए, चाहे उसके लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता ही क्यों न हो, सरकार के पास सदन में पर्याप्त संख्या बल उपलब्ध है.
सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि डीएमके के कुछ नेताओं के साथ भी सरकार के संपर्क बने हुए हैं, जिससे आगामी संसदीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं. संसद के मानसून सत्र से पहले तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और संभावित नए गठबंधन समीकरणों ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

