Last Updated:
Maglev vs Bullet Train: भारत में जल्द ही हाई-स्पीड ट्रेन के दौड़ने की संभावना है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है. इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है. हाई-स्पीड ट्रेन कॉरिडोर के एक सेक्शन पर जल्द ही बुलेट ट्रन फर्राटा भर सकती है. यह ट्रेन 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफर तय करेगी. इससे लोगों को अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचने में काफी कम समय लगेगा. इससे पहले तेजस और वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें चलाई जा रही हैं. ये दोनों ट्रेनें फिलहाल 130 से 140 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही हैं, लेकिन इन ट्रेनों को 180 से 200 KMPH की स्पीड से चलने में सक्षम बनाया गया है.
Maglev vs Bullet Train: इंडियन रेलवे लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त कर रहा है, ताकि तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकें. भारत में सेमी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के तहत तेजस राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनें देश के विभिन्न हिस्सों में फर्राटा भर रही हैं. दूसरी तरफ, हाई-स्पीड प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है. अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन चलाने का सपना आने वाले कुछ महीनों में साकार हो जाएगा. बुलेट ट्रेन की रफ्तार 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है. भारत देश के अन्य हिस्सों में भी बुलेट ट्रेन चलाने की योजना बना रहा है, ताकि आवागमन को और आसान बनाया जा सके. वहीं, पड़ोसी चीन तो सुपर हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यह ट्रेन 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भरने में सक्षम है. यानी बुलेट ट्रेन से दोगुनी से भी ज्यादा स्पीड. (फोटो: Reuters)
चीन ने हाई-स्पीड मैग्लेव तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है. सेंट्रल चीन के हुबेई प्रांत स्थित ईस्ट लेक लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने 1110 किलोग्राम वजनी हाई-स्पीड रेल मॉडल को महज 5.3 सेकंड में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. यह उपलब्धि लेविटेशन (चुंबकीय प्रभाव) सपोर्ट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी के जरिए हासिल की गई. शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले छह महीनों में इसी परीक्षण प्लेटफॉर्म पर यह तीसरा विश्व रिकॉर्ड है. (फोटो: Reuters)
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रायल में हाई-स्पीड रेल मॉडल को बिना पहियों के मैग्नेटिक फोर्स के सहारे ट्रैक के ऊपर तैराते हुए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन सिस्टम से अत्यधिक तेजी से गति दी गई. वैज्ञानिकों के मुताबिक 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचने के बाद एक महीने तक विभिन्न परीक्षण किए गए, जिनमें स्पीड ट्रायल की सटीकता, हाई-स्पीड लेविटेशन की स्थिरता, एनर्जी एफिशिएंट और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया गया. सभी मानक डिजाइन आवश्यकताओं के अनुरूप पाए गए. ग्लोबल रेलवे टेक्नोलॉजी में यह किसी रिवोल्यूशन से कम नहीं है. (फोटो: Reuters)
Add News18 as
Preferred Source on Google
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रायल में हाई-स्पीड रेल मॉडल को बिना पहियों के मैग्नेटिक फोर्स के सहारे ट्रैक के ऊपर तैराते हुए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन सिस्टम से अत्यधिक तेजी से गति दी गई. वैज्ञानिकों के मुताबिक 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचने के बाद एक महीने तक विभिन्न परीक्षण किए गए, जिनमें स्पीड ट्रायल की सटीकता, हाई-स्पीड लेविटेशन की स्थिरता, एनर्जी एफिशिएंट और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया गया. सभी मानक डिजाइन आवश्यकताओं के अनुरूप पाए गए. ग्लोबल रेलवे टेक्नोलॉजी में यह किसी रिवोल्यूशन से कम नहीं है. (फोटो: Reuters)
इनोवेशन सेंटर के निदेशक ली वेइचाओ के अनुसार, एक किलोमीटर लंबी यह हाई-स्पीड मैग्लेव टेस्ट लाइन 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. प्रोजेक्ट का काम पूरा होने के बाद आमलोगों को काफ सहूलियत मिलने की उम्मीद है. हजारों किलोमीटर की दूरी कुछ घंटों में ही तय किया जा सकेगा. इससे पहले विकसित हाई-स्पीड मैग्लेव इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन इनोवेशन सेंटर ने अपनी एक किलोमीटर लंबी हाई-स्पीड मैग्लेव टेस्ट लाइन का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया था. उस दौरान 1030 किलोग्राम वजनी ट्रेन को 650 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचाया गया था, जिसे भी विश्व रिकॉर्ड बताया गया था. अब नए ट्रायल के साथ चीन ने अपनी ही उपलब्धि को और आगे बढ़ा दिया है. (फोटो: Reuters)
भारत में भी बुलेट ट्रेन पर काम चल रहा है. देश की पहली बुलेट ट्रेन को मुंबई और अहमाबाद के बीच चलाने की योजना है. इस हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन की स्पीड 250 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटे की रहने वाली है. मतलब यह कि चाइनीज मैग्लेव ट्रेन की रफ्तार बुलेट ट्रेन से 3 गुना से भी ज्यादा है. फर्ज कीजिए कि दिल्ली और पटना के बीच यदि मैग्लेव ट्रेन चलती है तो 1000 किलोमीटर की दूरी महज सवा घंटे में ही तय हो जाएगी. मौजूदा समय में 12 से 14 घंटे तक का वक्त लगता है. (फोटो: Reuters)
अब बात करते हैं तेजस राजधानी की. तेजस राजधानी ट्रेन औसतन 130 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार है. इंडियन रेलवे सिस्टम में तेजस राजधानी ऐसी ट्रेन है जो यात्रियों को अपेक्षाकृत जल्दी और समय पर गंतव्य तक पहुंचाती है. हालांकि, मैग्लेव ट्रेन के सामने तेजस जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें फिसड्डी हैं. (फाइल फोटो)
भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेनों का ऑपरेशन भी कर रहा है. इस सेमी हाई-स्पीड प्रीमियम ट्रेन के दो वेरिएंट हैं. एक में सिर्फ चेयर कार होते हैं, जबकि दूसरा संस्करण स्लीपर है. पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को कामख्या से मालदा के बीच चलाया गया है. इसकी गिनती भारत के लग्जरी ट्रेनों में होती है. यह ट्रेन भी फिलहाल 130 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की है. हालांकि, इनकी बोगियों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे 180 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को (फोटो: Reuters)

