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Home » All News » F-22, F-35 और F-47 का छोटा भाई, पर राफेल फाइटर जेट से कितना खतरनाक? – YFQ 44A Fury Fighter Jet carry aerial operation alongside F22 F35 F47 Aircraft
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F-22, F-35 और F-47 का छोटा भाई, पर राफेल फाइटर जेट से कितना खतरनाक? – YFQ 44A Fury Fighter Jet carry aerial operation alongside F22 F35 F47 Aircraft

HawkNewsBy HawkNewsJuly 6, 2026No Comments8 Mins Read
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YFQ 44A Fury Fighter Jet: भारत ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने का करार किया है. यह रक्षा सौदा 3 लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा का है. खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत एक ताकतवर शक्ति बन जाएगा. भारत और फ्रांस के बीच इस महाडील से चीन से लेकर पाकिस्‍तान तक में खलबली मची हुई है. इसके अलावा तेजस और नेक्‍स्‍ट जेनरेशन AMCA पर भी तेजी से काम चल रहा है. ऐसे में आने वाले एक से दो दशक में भारत फाइटर जेट्स के मामले में ग्‍लोबल पावर सेंटर बन जाएगा. इन सब घटनाक्रमों के बीच अमेरिका में ऐसा फाइटर जेट डेवलप किया गया है, जिससे पूरी दुनिया में हलचल बढ़ गई है. लोगों के मन में एक और सवाल उठने लगा है – अमेरिका में डेवलप नया फाइटर जेट राफेल एयरक्राफ्ट के मुकाबले कहां टिकता है?

अमेरिकी एयरफोर्स ने भविष्य के एरियल वॉरफेयर की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने अत्याधुनिक मानवरहित लड़ाकू विमान YFQ-44A ‘फ्यूरी’ (Fury) का सफल ऑपरेशनल ट्रायल किया है. यह एयरक्राफ्ट अमेरिकी वायुसेना के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (CCA) प्रोग्राम के तहत विकसित किया गया है. इसका उद्देश्य ह्यूमन ऑपरेटेड फाइटर जेट्स के साथ ऑटोनोमस ड्रोन को ‘लॉयल विंगमैन’ के रूप में तैनात कर हवाई युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और खुफिया अभियानों की क्षमता को कई गुना बढ़ाना है. दरअसल, हाल ही में कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर अमेरिकी वायुसेना की एक्सपेरिमेंटल ऑपरेशंस यूनिट (EOU) ने YFQ-44A के साथ कई सफल फ्लाइट्स ट्रायल ऑपरेट की हैं. इन परीक्षणों में विमान की ऑटोनोमस फ्लाइट, मिशन को अंजाम देने की क्षमता और ऑपरेशनल कैपेबिलिटी का आकलन किया गया. अमेरिकी वायुसेना के अनुसार, यह परीक्षण भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किए जा रहे नए वॉरफाइटिंग एक्विजिशन सिस्टम की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

YFQ-44A क्‍यों है खास?

YFQ-44A की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अमेरिकी वायुसेना ने पहली बार किसी मानवरहित विमान को आधिकारिक रूप से ‘फाइटर’ (Fighter) कैटेगरी का दर्जा दिया है. इसके नाम में Y का अर्थ प्रोटोटाइप, F का अर्थ फाइटर और Q का अर्थ अनमैन्ड (मानवरहित) एयरक्राफ्ट है. डिफेंस एक्‍सपर्ट इसे एरियल वॉरफेयर की रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव मान रहे हैं, जहां भविष्य में इंसान और AI बेस्‍ड फाइटर जेट एक साथ मिशन पूरा करेंगे. ट्रायल के दौरान सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि विमान को उड़ाने के लिए किसी पायलट या दूर बैठे ऑपरेटर की आवश्यकता नहीं पड़ी. एंडुरिल इंडस्ट्रीज के इंजीनियरिंग प्रमुख जेसन लेविन के अनुसार अब विमान के पीछे ‘स्टिक और थ्रॉटल’ लेकर कोई ऑपरेटर नहीं बैठा होता. EOU के जवानों ने केवल एक लैपटॉप की सहायता से मिशन प्लान अपलोड किया, ऑटोनोमस टैक्सींग और टेकऑफ शुरू कराया, उड़ान के दौरान आवश्यक निर्देश दिए तथा मिशन पूरा होने के बाद डेटा का विश्लेषण किया. इससे यह भी साबित हुआ कि ऐसे विमानों को बड़े एयरबेस या भारी बुनियादी ढांचे के बिना भी संचालित किया जा सकता है.

YFQ 44A Fury की तुलना राफेल फाइटर जेट से होने लगी है कि दोनों में कौन कितना घातक और खतरनाक है. (फाइल फोटो/AP)

आसान ऑपरेशन

एंडुरिल कंपनी के ऑटोनोमस एयर पावर प्रोग्राम के उपाध्यक्ष मार्क शुशनार के अनुसार YFQ-44A को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे पारंपरिक ड्रोन की तुलना में बहुत कम तकनीकी कर्मचारियों के साथ संचालित और तैयार किया जा सके. ट्रायल के दौरान केवल कुछ दिनों की ट्रेनिंग के बाद ही एयरफोर्स के तकनीकी कर्मियों ने लगातार कई उड़ानों के बीच विमान को दोबारा मिशन के लिए तैयार कर दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में युद्ध क्षेत्र में तेजी से तैनाती और कम लागत पर संचालन संभव होगा.

राफेल बनाम YFQ-44A Fury जेट
राफेल फाइटर जेट YFQ-44A Fury जेट
4.5वीं पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान: राफेल (Dassault Rafale) फ्रांस में विकसित 4.5वीं पीढ़ी का ट्विन-इंजन, डेल्टा-विंग मल्टीरोल फाइटर जेट है. यह हवा से हवा, हवा से जमीन, समुद्री हमला और परमाणु मिशनों सहित कई तरह के अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है. अमेरिका का AI ऑपरेटेड ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन: एंड्यूरिल इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित YFQ-44A Fury एक एडवांस, सेमी-ऑटोमेटेड (Semi-Autonomous) मानव रहित लड़ाकू विमान (UCAV) है. इसे अमेरिकी वायुसेना के Collaborative Combat Aircraft (CCA) कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है, जो F-35 और F-22 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ ‘लॉयल विंगमैन’ के रूप में काम करेगा.
बेहतरीन प्रदर्शन और लंबी मारक क्षमता: राफेल की अधिकतम गति मैक 1.8 (करीब 2,220 किमी/घंटा) है. इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 24,500 किलोग्राम है और यह मिशन के अनुसार लगभग 1,850 किलोमीटर तक का कॉम्बैट रेडियस प्रदान करता है. विमान 50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. AI की मदद से स्वतंत्र उड़ान और मिशन संचालन: यह ड्रोन Shield AI के Hivemind और एंड्यूरिल के स्वायत्तता सॉफ्टवेयर से संचालित होता है. यह मानव निगरानी में स्वयं उड़ान, युद्धाभ्यास, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, टोही और अन्य मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है.
अत्याधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम: राफेल में RBE2 AESA रडार, फ्रंट सेक्टर ऑप्ट्रॉनिक्स (FSO) और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगे हैं. ये सिस्टम दुश्मन के खतरों की पहचान, ट्रैकिंग, आत्मरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी क्षमताएं प्रदान करते हैं. हाई-परफॉर्मेंस और हथियार ले जाने की क्षमता: YFQ-44A Fury की लंबाई लगभग 6 मीटर और विंगस्पैन 5 मीटर है. इसमें Williams FJ44 टर्बोफैन इंजन लगाया गया है, जिससे यह लगभग 1 मैक (Mach) गति तक पहुंच सकता है. इसे AIM-120 AMRAAM जैसी मिसाइलों सहित विभिन्न बाहरी हथियारों को ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है.
घातक हथियारों से लैस: राफेल में 14 हार्डपॉइंट हैं, जिन पर लगभग 9,500 किलोग्राम तक हथियार और बाहरी ईंधन टैंक लगाए जा सकते हैं. यह Meteor और MICA एयर-टू-एयर मिसाइल, SCALP क्रूज मिसाइल, HAMMER स्मार्ट बम, लेजर-गाइडेड बम और Exocet एंटी-शिप मिसाइल जैसे अत्याधुनिक हथियार ले जाने में सक्षम है. ट्रायल्‍स में बड़ी सफलता: इस ड्रोन ने अक्टूबर 2025 में अपनी पहली सेमी-ऑटोमेटेड उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की. इसके बाद 2026 की शुरुआत में इसने कैप्टिव-कैरी मिसाइल परीक्षण शुरू किए, जो भविष्य में लाइव फायर (वास्तविक हथियार) परीक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
सिंगल और ट्विन-सीट दोनों संस्करण उपलब्ध: राफेल के राफेल C और राफेल M सिंगल-सीट, जबकि राफेल B ट्विन-सीट वेरिएंट हैं. इसमें दो Snecma M88-4e टर्बोफैन इंजन लगे हैं, जो आफ्टरबर्नर के साथ प्रत्येक इंजन से 75 kN तक का थ्रस्ट प्रदान करते हैं. साथ ही यह सुपरक्रूज़ क्षमता के कारण बिना आफ्टरबर्नर के भी सुपरसोनिक गति से उड़ान भर सकता है. बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी: एंड्यूरिल इंडस्ट्रीज़ YFQ-44A Fury का बड़े पैमाने पर उत्पादन अपनी Arsenal-1 निर्माण इकाई में करेगी. अमेरिकी वायुसेना का लक्ष्य कम लागत में बड़ी संख्या में AI ऑपरेटेड लड़ाकू ड्रोन तैयार करना है, ताकि भविष्य के युद्धों में मानवयुक्त और मानव रहित विमानों की संयुक्त क्षमता को मजबूत किया जा सके.

मॉडर्न लेकिन सीमित हथियार क्षमता

हालांकि, YFQ-44A की अधिकांश तकनीकी जानकारी गोपनीय रखी गई है, फिर भी उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार इसकी लंबाई लगभग 6 मीटर, पंखों का फैलाव लगभग 5 मीटर और अधिकतम टेकऑफ वजन करीब 2,268 किलोग्राम है. इसमें एक टर्बोफैन इंजन लगाया गया है और इसकी अधिकतम गति लगभग मैक 1.2 यानी ध्वनि की गति से अधिक बताई जा रही है. विमान का डिजाइन स्टील्थ तकनीक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसका सपाट और कोणीय ढांचा तथा V-टेल कॉन्फिगरेशन इसे रडार पर कम दिखाई देने में मदद करता है. हालांकि, इसमें आंतरिक हथियार कक्ष (इंटरनल वेपन बे) नहीं है, इसलिए इसकी वेपन कैपेबिलिटी सीमित मानी जा रही है. माना जा रहा है कि इसका मुख्य उपयोग निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और मानव-ऑपरेटेड लड़ाकू विमानों को समर्थन देने में होगा.

F-22 रैप्टर, F-35, F-47 का भरोसेमंद साथी

YFQ-44A को सेमी-ऑटोनॉमस तरीके से ऑपरेटेड करने के लिए विकसित किया गया है. यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों के खिलाफ हवाई मुकाबले में सहयोग कर सकता है, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के जरिए दुश्मन के रडार और कम्‍यूनिकेशन सिस्‍टम को बाधित कर सकता है तथा इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) मिशनों में वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध करा सकता है. भविष्य में इसे F-22 रैप्टर, F-35 लाइटनिंग-II और विकसित हो रहे F-47 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ उड़ाने की योजना है, जिससे पायलटों पर जोखिम कम होगा और मिशन की सफलता की संभावना बढ़ेगी.

1000 से अधिक ड्रोन शामिल करने की योजना

अमेरिकी वायुसेना ने अप्रैल 2024 में एंडुरिल इंडस्ट्रीज और जनरल एटॉमिक्स को CCA कार्यक्रम के पहले चरण के लिए चुना था. एंडुरिल ने अक्टूबर 2025 में फ्लाइट ट्रायल शुरू किए और मार्च 2026 में YFQ-44A के उत्पादन की घोषणा की. वहीं, जनरल एटॉमिक्स ने अपने प्लेटफॉर्म का ग्राउंड टेस्ट 2025 में शुरू किया था. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी वायुसेना ने YFQ-44A के कितने विमान ऑर्डर किए हैं, लेकिन उसका लक्ष्य कम से कम 1000 कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का बेड़ा तैयार करना है. हालांकि, अंतिम उत्पादन चरण में वायुसेना एंडुरिल और जनरल एटॉमिक्स में से केवल एक कंपनी के प्लेटफॉर्म को चुन सकती है. इस संबंध में निर्णय इसी वर्ष लिए जाने की संभावना है.

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