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मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर इन दिनों भीषण गर्मी और जल संकट ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. हालात इतने विकट हो चुके हैं कि शहर के रांझी क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत के चलते अब फायर ब्रिगेड को आग बुझाने के बजाय लोगों की प्यास बुझाने के काम में जुटना पड़ रहा है
मध्यप्रदेश के संस्कारधानी जबलपुर में इन दिनों भीषण गर्मी और जल संकट ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. हालात इतने विकट हो चुके हैं कि शहर के रांझी क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत के चलते अब फायर ब्रिगेड को आग बुझाने के बजाय लोगों की प्यास बुझाने के काम में जुटना पड़ रहा है. शहर के परियट जलाशय के सूखकर महज 2 फीट पर आ जाने के कारण स्थिति विकराल होती जा रही है.
जबलपुर के रांझी क्षेत्र में पेयजल का मुख्य स्रोत परियट जलाशय है. जो इस बार भीषण गर्मी की भेंट चढ़ गया है. जलस्तर में आई भारी गिरावट के कारण रांझी जशोधन संयंत्र की क्षमता पर असर पड़ा है. एमआईसी सदस्य दामोदर सोनी ने बताया कि जलाशय में पानी की आवक बेहद कम हो गई है. संयंत्र की क्षमता 54 एमएलडी है. वर्तमान में महज 10 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है. इसी के चलते जो जलापूर्ति पहले दिन में दो बार हुआ करती थी, वह अब घटकर ‘दो दिन में एक बार’ पर आ गई है. इसका मुख्य कारण जल स्तर का गिरना और मानसून का लेट होना हैं. फिलहाल 10 दिन का पानी जल शोधन में शेष बचा हैं, यदि बारिश नहीं होती तब वार्ड स्तर पर बोरिंग भी कराई जा रही हैं. जिससे प्यास बुझाने का काम किया जाएगा.
आग बुझाने वाले अब प्यास बुझा रहे
पानी की इस किल्लत को दूर करने के लिए नगर निगम ने आपातकालीन मोर्चा संभाल लिया है. अब स्थिति यह है कि शहर की सड़कों पर आग बुझाने के लिए दौड़ने वाली फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पानी के टैंकरों के साथ लोगों के घरों तक पहुंच रही हैं. फायर ब्रिगेड कर्मचारी विनोद पांडे ने बताया पहले हम आग बुझाकर जनहानि को रोकते थे, लेकिन अब हमारा मुख्य मिशन जनता की प्यास बुझाना है. जिसके चलते फायर ब्रिग्रेड दिन भर में करीब 24 से 25 चक्कर लगाकर जज कॉलोनी, सरकारी अस्पतालों और कई कॉलोनी में पानी पहुँचा रही है.
युद्धस्तर पर राहत कार्य…32 टैंकर से 300 राउंड
नगर निगम प्रशासन और जनप्रनिधि लगातार इस संकट को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं. राहत कार्यों की स्थिति पर नजर डालें तब नगर निगम ने जल शोधन में टैंकरों जाल सा बिछा दिया हैं. नगर निगम के अपने टैंकरों के अलावा कई निजी टैंकरों को भी इस्तेमाल कर रहा हैं. जहां रोजाना करीब दिन-रात 300 फेरे लगाकर लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है. इसके अलावा रांझी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में मौजूद दर्जनों कुओं को मोटर पंप से जोड़कर टंकियों में पानी भरा जा रहा है, ताकि आम नागरिकों को पानी के लिए भटकना न पड़े. इसके अलावा जल संकट को देखते हुए जबलपुर की चार प्रमुख डिफेंस फैक्ट्रियों को दी जाने वाली पानी की आपूर्ति में भी कटौती की गई है, ताकि प्राथमिकता के आधार पर आम जनता को पानी मिल सके.

