चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लगातार बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय सेना अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैयारियों में से एक को अंतिम रूप देने जा रही है. इंडियन आर्मी 1 जुलाई से अपने पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) को ऑपरेशनल करने जा रही है. इसके साथ ही भारतीय सेना पारंपरिक भारी-भरकम सैन्य ढांचे से निकलकर तेज, आधुनिक और जरूरत के मुताबिक तुरंत कार्रवाई करने वाली फोर्स की दिशा में बड़ा कदम उठाएगी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पश्चिम बंगाल के पानागढ़ स्थित 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के तहत चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप और एक फायर सपोर्ट ग्रुप तैयार किए जा रहे हैं. पहले इनकी शुरुआत सितंबर में होनी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 1 जुलाई कर दिया गया है.
क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप?
हर आईबीजी में करीब 5,000 से ज्यादा सैनिक होंगे और इसमें 12 से 13 सैन्य यूनिट शामिल रहेंगी. इनकी कमान मेजर जनरल स्तर के अधिकारी के हाथ में होगी, जबकि संचालन की जिम्मेदारी ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी संभाल सकते हैं.
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
मौजूदा व्यवस्था में किसी भी कॉर्प्स को पूरी तरह मोर्चे पर तैनात करने में काफी समय लगता है, क्योंकि एक कॉर्प्स में लगभग एक लाख सैनिक और भारी सैन्य संसाधन शामिल होते हैं. इसके विपरीत आईबीजी छोटे, चुस्त और पूरी तरह आत्मनिर्भर होंगे. यही वजह है कि किसी भी आपात स्थिति में इन्हें बेहद कम समय में पर्वतीय क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा.
भारतीय सेना का मानना है कि भविष्य के युद्ध तेज, सीमित और तकनीक आधारित होंगे. ऐसे में कम समय में ज्यादा प्रभावी कार्रवाई करने वाली सैन्य संरचना की जरूरत महसूस की जा रही थी.
चीन की रणनीति का जवाब
दरअसल, पिछले एक दशक में चीन भी अपनी सेना में बड़ा बदलाव कर चुका है. उसने पारंपरिक डिवीजनों की जगह छोटे लेकिन अत्याधुनिक कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड (CAB) तैयार किए हैं, जिनमें टैंक, तोप, एयर डिफेंस और अन्य हथियार एकीकृत रूप से काम करते हैं.
भारतीय सेना का नया आईबीजी मॉडल भी इसी तरह तेज प्रतिक्रिया देने वाली सैन्य क्षमता विकसित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. हालांकि भारतीय सेना का कहना है कि यह किसी एक देश को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों के हिसाब से क्षमता निर्माण का हिस्सा है.
सिर्फ हमला नहीं, बचाव भी करेंगे
सेना के अनुसार, ये इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप केवल आक्रामक अभियान चलाने के लिए ही नहीं, बल्कि दुश्मन के किसी भी हमले का तुरंत जवाब देने में भी सक्षम होंगे. जरूरत पड़ने पर एक ही मिशन में कई तरह के संयुक्त सैन्य अभियान चलाए जा सकेंगे.
इनके साथ एक अलग फायर सपोर्ट ग्रुप भी बनाया जाएगा, जिसमें आधुनिक तोपखाना और लंबी दूरी तक मार करने वाली नई दिव्यास्त्र बैटरियां शामिल हो सकती हैं. यह ग्रुप सीधे कॉर्प्स मुख्यालय के अधीन काम करेगा.
सेना के बड़े बदलाव का हिस्सा
आईबीजी का गठन सेना के बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है. इसके तहत भैरव बटालियन, रुद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण यूनिट जैसी नई सैन्य संरचनाएं भी तैयार की जा रही हैं. इसका मकसद यही है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारतीय सेना ज्यादा लचीली, तेज और घातक बन सके.
सेना में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप बनाने का विचार करीब सात साल पहले तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के कार्यकाल में सामने आया था. इसके बाद पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान सीमा और पूर्वी सेक्टर में कई सैन्य अभ्यासों के दौरान इस मॉडल का टेस्ट किया गया. अब पहली बार इसे वास्तविक रूप से सेना की ऑपरेशनल संरचना का हिस्सा बनाया जा रहा है.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि IBG के ऑपरेशनल होने के बाद भारतीय सेना की सीमावर्ती इलाकों में त्वरित तैनाती, संयुक्त युद्ध क्षमता और जवाबी कार्रवाई की ताकत पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ जाएगी.

