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मल्लिका आम भारत में विकसित एक संकर (हाइब्रिड) किस्म है, जिसे दशहरी और नीलम आम के संकरण से तैयार किया गया। इसका उद्देश्य ऐसी किस्म विकसित करना था, जिसमें अधिक मिठास, बेहतर गुणवत्ता, कम रेशे और अच्छी शेल्फ लाइफ हो. कृषि अनुसंधानों के अनुसार मल्लिका आम में घुलनशील ठोस पदार्थ (TSS) लगभग 20–24° ब्रिक्स तक पहुंच सकते हैं, जो इसकी अधिक मिठास का संकेत है. इसका गूदा गहरे नारंगी रंग का, लगभग बिना रेशे वाला और बेहद मुलायम होता है.
गाजीपुरः आम का मौसम आते ही बाजार में दशहरी, लंगड़ा और चौसा की चर्चा होती है, लेकिन अब एक और किस्म तेजी से लोकप्रिय हो रही है. मल्लिका आम, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित यह हाइब्रिड आम अपनी मिठास, कम रेशे और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के बीच पसंद किया जा रहा है. गाजीपुर में भी इसका फल अब रिटेल बाजारों, यहां तक कि रिलायंस मार्ट जैसे स्टोरों में भी दिखाई देने लगे हैं.
दशहरी और नीलम का अनोखा मेल
मल्लिका आम भारत में विकसित एक संकर (हाइब्रिड) किस्म है, जिसे दशहरी और नीलम आम के संकरण से तैयार किया गया। इसका उद्देश्य ऐसी किस्म विकसित करना था, जिसमें अधिक मिठास, बेहतर गुणवत्ता, कम रेशे और अच्छी शेल्फ लाइफ हो. कृषि अनुसंधानों के अनुसार मल्लिका आम में घुलनशील ठोस पदार्थ (TSS) लगभग 20–24° ब्रिक्स तक पहुंच सकते हैं, जो इसकी अधिक मिठास का संकेत है. इसका गूदा गहरे नारंगी रंग का, लगभग बिना रेशे वाला और बेहद मुलायम होता है. इसमें हल्की मसालेदार सुगंध भी महसूस होती है, जिसके कारण इसे खाने के साथ-साथ जूस, पल्प और प्रोसेसिंग उद्योग में भी पसंद किया जाता है.
मल्लिका आम की जाने खासियत
कृषि विज्ञान केंद्र, गाजीपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. ओमकार सिंह (पादप रोग वैज्ञानिक) बताते हैं कि मल्लिका आम हाई-डेंसिटी ऑर्चर्ड के लिए उपयुक्त किस्म है. इसमें कम दूरी पर अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. शुरुआती वर्षों में पौधों के बीच की खाली जगह में अंतरवर्ती खेती (Intercropping) करके किसान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं. उनके अनुसार, किसानों को मल्लिका आम का मूल्य करीब 100 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल सकता है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत इससे अधिक हो सकती है.
फल का वजन लगभग 250–450 ग्राम और गहरा नारंगी और लगभग बिना रेशे का गूदा होता है. अधिक मिठास और आकर्षक सुगंध अच्छी शेल्फ लाइफ और लंबी दूरी तक परिवहन के लिए उपयुक्त. जून–जुलाई में पकने वाली किस्म होती है. बदलते समय में जब किसान पारंपरिक किस्मों के साथ नई और बेहतर वैरायटी की तलाश कर रहे हैं, तब मल्लिका आम एक ऐसा विकल्प बनकर उभर रहा है जो स्वाद, गुणवत्ता और बाजार तीनों में अपनी अलग पहचान बना रहा है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

