Last Updated:
अमित शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि आपराधिक न्याय प्रणाली को देश के हर नागरिक के लिए संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को प्राप्त करने का एक उपयुक्त माध्यम बनाया जाये. शाह ने नये आपराधिक कानूनों के तहत उपलब्ध उपकरणों के उपयोग के लिए प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि आरोप-पत्र में केवल वही आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, जो किसी अपराधी की भूमिका की पुष्टि करते हों.
अमित शाह ने अभिज्ञान ऐप लॉन्च किया. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. ABHIGYAN ऐप के जरिए देशभर में अपराधियों की फिंगरप्रिंट के जरिए पहचान होगी महज 35 सेकेंड में. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा शुक्रवार को लॉन्च किया गया ये ऐप देशभर की सारी पुलिस के पास मौजूद होगा. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की मदद ये तैयार किए गए इस ऐप में एक करोड़ उन्तीस लाख से ज्यादा लोगों के फिंगरप्रिंट के रिकॉर्ड मौजूद रहेंगे. इस संख्या में आनेवाले दिनों में लगातार बढ़ोतरी भी होती रहेगी.
गृह मंत्रालय की पहल पर शुरू किए गए इस खास ऐप से फिंगरप्रिंट के जरिए अपराधियों के पहचान की प्रक्रिया में पहले जहां कई दिन लगते थे, अब महज पैतीस सेकेंड में संदिग्ध शख्स की पहचान हो सकेगी. कैसे काम करेगा… तुरंत अपराधियों की फिंगरप्रिंट के जरिए पहचान करनेवाला खास ऐप को लेकर न्यूज18 इंडिया की टीम ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट अलग-अलग राज्यों के पुलिस से बात की. इन राज्यों की पुलिस ने कहा कि ये ऐप हमारे लिए बहुत उपयोगी साबित होगा.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि जांच, अभियोजन और दोषसिद्धि की पूरी प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी का सक्रिय इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाना चाहिए. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा यहां आयोजित ‘ऑल इंडिया फिंगरप्रिंट कॉन्फ्रेंस-2026’ के उद्घाटन के मौके पर शाह ने कहा कि न केवल राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) का उपयोग अपराधियों की पहचान के लिए किया जाना चाहिए, बल्कि अपराध स्थलों से एकत्र किए गए फिंगरप्रिंट जोड़कर इसके डेटाबेस को और समृद्ध भी किया जाना चाहिए.
शाह ने कहा, “ऐसे कई मामले हैं, जहां एनएएफआईएस ने सबसे जटिल मामलों को भी सरल बनाने में बहुत मदद की है. लेकिन, मेरा अभी भी मानना है कि एनएएफआईएस का इस्तेमाल केवल 10 प्रतिशत ही किया जा रहा है.” गृह मंत्री ने कहा, “एनएएफआईएस का इस्तेमाल केवल अपराधियों को खोजने तक सीमित नहीं होना चाहिए. यह तभी सफल हो सकता है, जब आप हर अपराध स्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट के माध्यम से एनएएफआईएस के डेटा को समृद्ध करें.”
About the Author
अमित पांडेय News 18 इंडिया से करीब डेढ़ दशक से जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के अपने इस करियर में उन्होंने क्राइम, कोर्ट, गृह मंत्रालय और संसद की गतिविधियों की रिपोर्टिंग की है. अभी स्पेशल करिस्पांडेट के तौर पर गृह…और पढ़ें

