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तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची ऐतिहासिक बगावत अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला बागी सांसदों और ममता बनर्जी खेमे के बीच ‘पंचायती’ कर अंतिम फैसला सुनाने वाले हैं. मानसून सत्र से पहले कानून मंत्रालय की राय के साथ टीएमसी में औपचारिक टूट का ऐलान हो सकता है.
टीएमसी के बागी गुट को लेकर आने वाला है बड़ा फैसला.
नई दिल्ली. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुआ महाविभाजन अब देश के संसदीय इतिहास के सबसे बड़े कानूनी और राजनीतिक फैसलों की दहलीज पर खड़ा है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला बहुत जल्द टीएमसी में औपचारिक टूट और बागी गुट के ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय पर अपनी अंतिम मुहर लगा सकते हैं. संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले आने वाले इस फैसले को लेकर दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सियासी हलचलें तेज हो गई हैं.
इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष का कार्यालय दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर इस मामले को पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी रूप से अचूक बनाना चाहता है, ताकि भविष्य में इसे अदालत में चुनौती न दी जा सके. इस पूरे घटनाक्रम में बीते रविवार और सोमवार को दिल्ली में जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला. समाचार एजेंसी एएनआई और पीटीआई के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर कार्यालय ने ममता बनर्जी खेमे के शीर्ष नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को 15 जून को दोपहर 2 बजे एक अर्जेंट ईमेल भेजा. इस ईमेल में उन्हें उसी दिन शाम 4 बजे दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक के लिए तलब किया गया था.
लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपते समय टीएमसी के 17 बागी सांसद दिखे.
स्पीकर कार्यालय का ‘ईमेल’ और अभिषेक बनर्जी की मजबूरी
स्पीकर ओम बिरला ने टीएमसी महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया. स्पीकर ऑफिस ने बनर्जी को दो घंटे के अंदर लोकसभा आने को कहा. लेकिन वह बंगाल पुलिस की जांच में उलझे रहे. टीएमसी सूत्रों के हवाले से खबर है कि जब यह ईमेल भेजा गया, तब अभिषेक बनर्जी प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ का सामना कर रहे थे. सुरक्षा और जांच प्रोटोकॉल के कारण उनके पास अपना फोन या ईमेल चेक करने की सुविधा नहीं थी.
ईमेल भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद, स्थिति को संभालते हुए टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद को स्पीकर कार्यालय से फोन गया. कीर्ति आजाद तुरंत स्पीकर कार्यालय पहुंचे और उन्होंने आधिकारिक तौर पर सूचित किया कि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसियों के सामने व्यस्त होने के कारण उपस्थित नहीं हो सकते. उन्होंने इस सुनवाई के लिए स्पीकर से किसी दूसरी तारीख का अनुरोध किया है.
TMC में बगावत तेज हो गई है. (फाइल फोटो PTI)
कानून मंत्रालय की राय क्यों ले रहे हैं स्पीकर ओम बिरला?
रविवार को टीएमसी के 20 बागी सांसदों में से 17 ने व्यक्तिगत रूप से स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा था. इस ज्ञापन में उन्होंने साफ कर दिया कि वे लोकसभा में अपनी अलग बैठने की व्यवस्था चाहते हैं और वे दो-तिहाई से अधिक के बहुमत के साथ नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर ओम बिरला इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं हैं, लेकिन वे जल्दबाजी में कोई ऐसा फैसला भी नहीं लेना चाहते जिसे सुप्रीम कोर्ट में खारिज कर दिया जाए.
व्हिप का संकट खत्म
ओम बिरला बहुत जल्द ही टीएमसी के बागी 20 सांसदों को ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के आधिकारिक व्हिप से पूरी तरह मुक्ति का आदेश जारी कर सकते हैं. अब टीएमसी के बागी सदन के भीतर अपनी मर्जी से मतदान करने और एनडीए के पक्ष में खड़े होने के लिए स्वतंत्र होंगे. संसद के बुलेटिन में टीएमसी के दो टुकड़े आधिकारिक तौर पर दर्ज हो जाएंगे और लोकसभा में विपक्ष की संख्या बल को एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और गणितीय झटका लगेगा.
फिलहाल, अभिषेक बनर्जी को मिलने वाली अगली तारीख और कानून मंत्रालय की अंतिम रिपोर्ट पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. यह तय है कि स्पीकर ओम बिरला की इस ‘पंचायती’ के बाद बंगाल की राजनीति हमेशा के लिए बदलने वाली है.
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