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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के आदिवासी क्षेत्र खालवा में स्थित रोशनी गौशाला आज पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन चुकी है. जहां कभी सिर्फ गोवंश की देखभाल होती थी. आज वहीं से ऊर्जा, रोजगार और कमाई के नए रास्ते तैयार हो रहे हैं. गौशाला में वर्तमान में करीब 305 गोवंश हैं. हर महीने करीब 1.80 लाख रुपए तक की आय हो रही है
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के आदिवासी क्षेत्र खालवा में स्थित रोशनी गौशाला आज पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन चुकी है. जहां कभी सिर्फ गोवंश की देखभाल होती थी. आज वहीं से ऊर्जा, रोजगार और कमाई के नए रास्ते तैयार हो रहे हैं. यह गौशाला न सिर्फ गोवंश संरक्षण का काम कर रही है, बल्कि आत्मनिर्भरता का ऐसा मॉडल बन गई है. जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं. यहां की सबसे बड़ी खासियत है. गोबर से बायोगैस उत्पादन. इस बायोगैस का उपयोग पास में स्थित रोशनी एकलव्य छात्रावास में किया जा रहा है, जहां 400 से ज्यादा बच्चों के लिए इसी गैस से रोजाना भोजन तैयार होता है.
पहले जहां छात्रावास में गैस सिलेंडर पर भारी खर्च होता था. अब वह खर्च लगभग खत्म हो गया है। इससे न सिर्फ पैसे की बचत हो रही है, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा मिल रहा है। साथ ही गौशाला में मौजूद गायों का शुद्ध दूध भी विद्यार्थियों को दिया जा रहा है. जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है. रोशनी गौशाला की सफलता की कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. यहां स्थानीय महिलाओं के लिए भी रोजगार के बड़े अवसर पैदा हुए हैं.
गोबर से बन रही गैस
रोशनी गौशाला की सफलता की कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. यहां स्थानीय महिलाओं के लिए भी रोजगार के बड़े अवसर पैदा हुए हैं. श्री राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस गौशाला का संचालन कर रही हैं. गोबर व गोमूत्र से कई उत्पाद तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों की बिक्री से महिलाओं को हर महीने करीब 1.80 लाख रुपए तक की आय हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है.गौशाला में वर्तमान में करीब 305 गोवंश हैं, जिनकी देखरेख पूरी जिम्मेदारी के साथ की जा रही है. वर्ष 2019 में जिला प्रशासन ने इस गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मनरेगा योजना के तहत बायोगैस प्लांट स्थापित किया था. इसके बाद से यहां गोबर का सही उपयोग शुरू हुआ और ऊर्जा उत्पादन का नया रास्ता खुल गया.
हर महीने करीब 1.80 लाख रुपए तक की आय
इस पहल को सफल बनाने में कई सरकारी योजनाओं का भी बड़ा योगदान रहा है। स्वच्छ भारत मिशन, गोवर्धन योजना, मनरेगा, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग जैसी योजनाओं के सहयोग से यह मॉडल तैयार हुआ है.आज यह गौशाला सिर्फ पशुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण रोजगार का मजबूत केंद्र बन चुकी है. यहां कचरे को संसाधन में बदलकर यह साबित किया गया है कि सही सोच और योजना से गांव भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं.खंडवा की रोशनी गौशाला ने यह दिखा दिया है कि अगर संसाधनों का सही उपयोग किया जाए, तो गोबर और कचरा भी कमाई और ऊर्जा का बड़ा जरिया बन सकता है. यही मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रहा है.

