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Brahmos vs LR-LACM: भारत न केवल अपनी सुरक्षा को पुख्ता कर रहा है, बल्कि दुश्मनों के खिलाफ भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फैसला ले रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का खुलकर सपोर्ट किया था. इससे नई दिल्ली में भारी नाराजगी है. अब भारत इसका मुकम्मल जवाब दे रहा है. तुर्की की घेरेबंदी उसके ही गढ़ में घुसकर की जा रही है. अर्मेनिया और साइप्रस के बाद भारत तुर्की के एक और पड़ोसी देश ग्रीस के साथ रक्षा समझौता करने की तैयारी कर रहा है. ग्रीस को ऐसी मिसाइल देने की चर्चा है, जिससे तुर्की के अधिकांश क्रिटिकल मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर इसकी रेंज में आ जाएंगे.
DRDO द्वारा डेवलप LR-LACM 1500 किलोमीटर तक दुश्मनों को खाक में मिलाने की क्षमता रखती है. (फोटो: ANI)
दरअसल, भारत द्वारा विकसित लंबी दूरी की एयर-लॉन्च्ड लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) को लेकर ग्रीस के साथ बातचीत चल रही है. ग्रीस और भारत के बीच इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम पर संभावित सहयोग की खबरों के बाद तुर्की मीडिया ने चिंता जताई है. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीस में आयोजित रक्षा प्रदर्शनी के दौरान भारतीय मिसाइल कार्यक्रम ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित LR-LACM भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक सटीक हमले की क्षमता को नई मजबूती देने वाली प्रणाली मानी जा रही है. यह मिसाइल निर्भय क्रूज मिसाइल कार्यक्रम पर आधारित है और इसमें स्वदेशी ‘माणिक’ स्मॉल टर्बोफैन इंजन का उपयोग किया गया है. इसकी मारक क्षमता 1000 से 1500 किलोमीटर बताई जा रही है. इस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण नवंबर 2024 में ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया था. परीक्षण के दौरान इसने विभिन्न ऊंचाइयों पर उड़ान, जटिल मार्ग परिवर्तन और रडार से बचने वाली ‘टेरेन हगिंग’ क्षमता का सफल प्रदर्शन किया. यह प्रणाली कन्वेंशनल और परमाणु दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है.
तुर्की के पड़ोस में LR-LACM की तैनाती से क्रिटिकल मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर इस क्रूज मिसाइल की जद में होंगे. (तस्वीर साभार: गूगल मैप)
Su-30MKI के साथ LR-LACM का इंटीग्रेशन
‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, LRLACM के एयर-लॉन्च्ड संस्करण को भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेट करने की तैयारी चल रही है. इससे वायुसेना दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक सटीक हमला करने में सक्षम होगी, जबकि पायलटों और विमानों को खतरे से दूर रखा जा सकेगा. यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सामरिक क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के लॉजिस्टिक ठिकानों और संवेदनशील सैन्य ढांचों को दूर से निशाना बनाने की क्षमता भारतीय वायुसेना को महत्वपूर्ण बढ़त दे सकती है.
LR-LACM की कीमत हाई-प्रोफाइल ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से आधी से भी कम है. (फोटो: PTI)
LR-LACM इस वजह से बेहद खास
- रडार से बचने की क्षमता होगी मजबूत: मिसाइल लॉन्च होने के बाद बेहद कम ऊंचाई (ट्री-टॉप लेवल) पर उड़ान भरेगी और भू-भाग का अनुसरण करने वाली (Terrain-Hugging) प्रोफाइल अपनाएगी. इससे दुश्मन के रडार और वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इसे पकड़ना कठिन होगा.
- सटीक निशाना साधने में सक्षम: इसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर लगाए जाएंगे, जो रियल-टाइम टारगेटिंग और बैटल डैमेज असेसमेंट (BDA) में मदद करेंगे. सैटेलाइट लिंक के जरिए मैन-इन-द-लूप नियंत्रण भी संभव होगा, जिससे उड़ान के दौरान लक्ष्य बदला जा सकेगा.
- हाई-वैल्यू वाले टार्गेट को कर सकेगी नष्ट: मिसाइल में 200 से 450 किलोग्राम तक का वारहेड लगाया जा सकेगा. यह कमांड सेंटर, एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट और अन्य रणनीतिक ठिकानों को सटीकता के साथ निशाना बनाने में सक्षम होगी.
- लंबे समय तक मिशन पर बने रहने की क्षमता: बेहतर ईंधन प्रबंधन प्रणाली के कारण मिसाइल लंबी दूरी तक उड़ान भर सकेगी. जरूरत पड़ने पर यह लक्ष्य क्षेत्र के आसपास कुछ समय तक मंडराने (Loiter-like Capability) के बाद अंतिम चरण में हमला कर सकेगी.
- Su-30MKI के साथ होगी तैनाती, अन्य विमानों में भी संभावना: मिसाइल को भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत किया जा सकता है. प्रत्येक विमान दो मिसाइलें ले जाने में सक्षम होगा. भविष्य में इसे राफेल और स्वदेशी AMCA जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जोड़े जाने की संभावना है. इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन विमान की उड़ान क्षमता को प्रभावित किए बिना अंडर-विंग पायलन पर लगाया जा सकेगा.
कीमत काफी कम
ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों की तुलना में LR-LACM अपेक्षाकृत कम लागत वाली प्रणाली मानी जा रही है. अनुमान है कि इसकी प्रति यूनिट लागत 10 से 20 लाख डॉलर (18 करोड़ रुपये) के बीच हो सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर तैनाती आसान होगी. वहीं, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की प्रति यूनिट कीमत तकरीबन 5 मिलियन डॉलर (47 से 48 करोड़ रुपये) बताई जाती है. रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि परीक्षण और एकीकरण की प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो यह मिसाइल 2027-28 तक भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

