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इतिहासकार रामचंद्र गुहा द्वारा राहुल गांधी के प्रशासनिक अनुभव और पीएम पद की योग्यता पर सवाल उठाने के बाद सियासत गरमा गई है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पलटवार करते हुए इसे अति बताया. थरूर ने तर्क दिया कि अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले बराक ओबामा और भारत के पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी के पास भी वैश्विक मामलों का व्यापक अनुभव नहीं था. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अकेले नहीं, सलाहकारों की मदद से सरकार चलाते हैं.
थरूर ने राहुल गांधी का बचाव किया.
नई दिल्ली. क्या देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए पहले से किसी बड़े प्रशासनिक पद या विदेशी मामलों का अनुभव होना अनिवार्य है? या फिर नेतृत्व की क्षमता वक्त और परिस्थितियों के साथ खुद-ब-खुद निखरती है? भारतीय राजनीति में यह बहस एक बार फिर उस समय ज्वालामुखी की तरह धधक उठी जब जाने-माने इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की काबिलियत, अनुभव और प्रधानमंत्री पद की तैयारियों पर सीधे तीखे सवाल खड़े कर दिए. गुहा ने बेबाकी से पूछा कि पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत ईमानदारी के अलावा राहुल के पास आखिर कौन सी योग्यता है? लेकिन इस बार कांग्रेस भी चुप नहीं बैठी. पार्टी के सबसे मुखर सांसद शशि थरूर ने इस हमले को अति करार देते हुए मोर्चा संभाला. थरूर ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का उदाहरण देते हुए पूछा कि उनके पास कौन सा विदेश मामलों का अनुभव पहले से था. थरूर ने पीएम मोदी का नाम लिए बिना कहा कि गुजरात के सीएम के पास विदेश मामलों का अनुभव भी तो नहीं था.
शशि थरूर के बयान की 5 मुख्य बातें
• रामचंद्र गुहा का तीखा हमला: मशहूर इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा ने एक इंटरव्यू में राहुल गांधी की पीएम पद की योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास जटिल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को संभालने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और विदेश नीति का अनुभव नहीं है.
• शशि थरूर का पलटवार: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गुहा के इस बयान को ‘अति’ (A bit much) बताते हुए खारिज किया और राहुल गांधी का खुलकर बचाव किया.
• बराक ओबामा और मोदी का उदाहरण: थरूर ने गुहा को जवाब देते हुए पूछा कि जब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे तब इलिनोइस के इस पहली बार के सीनेटर के पास वैश्विक मामलों का क्या अनुभव था? इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री (नरेंद्र मोदी) के पास कितना अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर था?
• सलाहकारों की भूमिका पर जोर: थरूर ने तर्क दिया कि कोई भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री अकेले संकटों को नहीं संभालता, वे सरकार, संस्थाओं और सलाहकारों की मदद लेते हैं. इसलिए अनुभव की यह बहस अब बंद होनी चाहिए.
• पारिवारिक पृष्ठभूमि पर उठाए थे सवाल: इससे पहले गुहा ने कहा था कि राहुल गांधी के पास पीएम पद के लिए केवल दो ही चीजें हैं एक उनकी व्यक्तिगत शालीनता और दूसरा उनका वंशवादी अधिकार (उनकी मां, पिता, दादी और परदादा का पीएम होना). गुहा ने सुझाव दिया कि कांग्रेस में अन्य नेताओं के पास बेहतर प्रशासनिक अनुभव है.
Come on, @Ram_Guha, this is a bit much. What experience did Barack Obama, a first-term Senator from Illinois, have in world affairs when he became President of the most powerful country on earth, while it was caught up in multiple global issues? For that matter, how much… https://t.co/Tyz2iisNXA

